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लावणी छंद पर आधारित रचना =कालीपद 'प्रसाद'

मुसीबतों से लोकतंत्र को, जल्दी उबारना होगा

निर्धनों के हक़ में देश में कानून बदलना होगा |

निर्धन नहीं खड़ा हो सकता, पार्षद के भी चुनाव में

लाखों रुपये चाहिए उसे, चुनाव दंगल लड़ने में |

गणतंत्र अभी धनतंत्र हुआ, धनाढ्य चुनाव लड़ते हैं

गरीब कैसे लडेगा भला, पास न लाखो रूपये हैं’ |

धनबल बाहुबल की प्रचुरता, ताकत बड़ी अमीरों की

निर्धनता ही कमजोरी है, इस देश के गरीबो की |

भ्रष्टाचार और महँगाई, साथ यौन शोषण भी है

कालाबाजारी के भीषण संकटों के भँवर भी है |

नेता आफिसर कर्मचारी, सब जेब भरने लगे हैं |

अब तो न्यायाधीशों पर भी, ऊँगली उठाने लगे हैं |

राजनीतिक अपराधीकरण, अब सभी रोकना होगा

विषधरों के सिर को शक्ति से,अब हमें कुचलना होगा |

चुनाव कानून बने ऐसा, अपराधी अपात्र होगा

गुनाह करने वाले सबको, पावक में जलना होगा |

शर्म की बात यह है ‘काली’,  बोलने झेंप होती है

मृत्य की प्रमाण पत्र लेने, रिश्वत देने पड़ती है |

मौलिक व अप्रकाशित  
 

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 1, 2018 at 6:34am

देश के हाल को बयाँ करती रचना के लिए बधाई ।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on January 30, 2018 at 10:52am

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी ! हौसला  अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया | लिखा था कुकुभ में परन्तु तकती के समय एक जगह २२ के स्थान पर १२ से अंत हो रहा हथा  | इसीलिए इसे लावनी का नाम  दिया || सादर 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 29, 2018 at 5:16am

देश की एक और तस्वीर दिखाती बेहतरीन रचना पर कालीपद जी सादर बधाई, वाकई मन मोह लिया आपने। बहुत बहुत बधाई आपको। 

लावणी छंद में अंत मे 2 गुरु होता है पर आपकी रचना में कहीं तीन भी हैं। जो इसे ताटंक की ओर कर दें रहे हैं।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on January 28, 2018 at 8:14pm

सादर आभार आ राम अवध विश्वकर्मा जी 

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 28, 2018 at 4:23pm

मृत्यु का प्रमाणपत्र लेने रिश्वत देनी पड़ती है। कटु सत्य को बयान करती कविता कहने के लिये बधाई

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