For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल...इश्क़ चल के आ गया अपने हंसी अंजाम तक -बृजेश कुमार 'ब्रज'

2122 2122 2122 212
इश्क़ चल के आ गया अपने हंसी अंजाम तक
मुस्कुराती भोर से आँसू बहाती शाम तक

कल तलक तो साथ ही था हमनशीं हमदर्द सा
अनसुनी कर चल दिया अब दर्द का पैगाम तक

जा रहे हो छोड़कर इतना यकीं रखना सनम
हम सिमट जायेंगे तेरी याद तेरे नाम तक

है अजब सी ख़ामुशी सहमे हुये मंज़र सभी
मौन है अब दर दरीचा चुप्पी पसरी बाम तक

फिर सहर होगी यक़ीनन रात ये ढल जाएगी
क्या रखोगे हौसला तुम गर्दिशे अय्याम तक

'ब्रज' चले थे हौंसलों को पोटली में बाँध कर
ज़िन्दगी भर कर सफ़र पहुँचे दिले नाकाम तक
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 68

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on Tuesday

आ. भाई बृजेश जी सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Monday

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र जी..सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Monday

हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार आदरणीय अजय जी..सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Monday

आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार..सर्वप्रथम देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ..आपके सुझाव उम्दा हैं आदरणीय उनके मुताबिक सुधार करता हूँ..सादर

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on Monday

आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, शेष आली जनाब समर साहब कह चुके हैं। इस ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई

Comment by Ajay Tiwari on Sunday

आदरणीय बृजेश जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. शेष सब कुछ आदरणीय समार साहब कह चुके हैं.  

Comment by Samar kabeer on Sunday

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के ऊला मिसरे में 'हंसी' को "हसीं" कर लें ।

दूसरा शैर यूँ कर सकते हैं :-

'लन्तरानी भी मेरी सुनता था कल जो ग़ौर से

आज क्यों सुनता नहीं वो दर्द का पैग़ाम तक'

तीसरे शैर में शुतरगुर्बा दोष है,ऊला मिसरा यूँ कर लें :-

'जा रहा है छोड़कर इतना यकीं रखना सनम'

4थे शैर का सानी मिसरा यूँ कर लें :-

'हर दरीचा मौन है चुप्पी है पसरी बाम तक'

मक़्ते का सानी मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'देखना घर लौट कर आएंगे बुद्धू शाम तक'

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Sunday

आदरणीय आरिफ जी सादर नमस्कार..अपने बिलकुल दुरुस्त फ़रमाया..तीसरे,चौथे शेर एवं मक़्ते में गहराई नहीं ला पाया..काफी समय से इस ग़ज़ल के लिए प्रयासरत हूँ लेकिन सफलता नहीं मिली। पटल पे लाया हूँ ताकि बड़ों की तरफ से कुछ सुझाव मिलें और ग़ज़ल पूर्ण हो..क्योंकि इसका मतला मेरे दिल के बहुत करीब है।

Comment by Mohammed Arif on January 14, 2018 at 10:27am

आदरणीय बृजेश कुमार जी आदाब,

                    पूरी ग़ज़ल पढ़ी । जैसी आपकी ग़ज़लें हुआ करती है उस स्तर की नहीं लगी । यह मेरा मानना है । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ  है, देखिएगा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद घड़ी धैर्य की है बढ़ी जा रही ।नहीं दूर तक माँ नजर आ रही। करें क्या विपत्ति बड़ी सामने ।नहीं…"
27 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीया मंजीत कौर जी"
43 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका इशारा सही है इस छंद मे द्विकलों का गुरू की तरह प्रयोग नहीं होता है। मार्गदर्शन के लिये आपका…"
44 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय"
52 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय"
53 minutes ago
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"भुजंगप्रयात ------------------ अमीरी सदा से सियासत चलाती। सियासत सभी को रुलाती सताती।। सजा है…"
53 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय"
54 minutes ago
santosh khirwadkar posted a blog post

तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”

 फ़ाइलातुन फ़ईलातुन फ़ईलातुन फ़ेलुनतेरे नज़दीक ही हर वक़्त भटकता क्यों हूँतू बता फूल के जैसा मैं…See More
56 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी छंद को पसंद करने विस्तार से प्रतिक्रिया व्यक्त करने और उचित सलाह के लिए हृदय से…"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र  भाईजी वाह वाह ! छंदमय  सुंदर टिप्पणी के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सतविंद्र कुमार साहिब , आपका इशारा समझ गया ,हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।"
4 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब अशोक कुमार साहिब ,छन्दों को पसंद करने और आपकी हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया । मात्राओं की…"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service