For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1212 1122 1212 22


कफ़स को तोड़ बहारों में आज ढल तो सही ।।
तू इस नकाब से बाहर कभी निकल तो सही ।।

तमाम उम्र गुजारी है इश्क में हमने ।
करेंगे आप हमें याद एक पल तो सही ।।

सियाह रात में आये वो चाँद भी कैसे ।
अदब के साथ ये लहज़ा ज़रा बदल तो सही ।।

बड़े लिहाज़ से पूंछा है तिश्नगी उसने ।
आना ए हुस्न पे इतरा के कुछ उबल तो सही ।।

झुकी नज़र में अदाओं पे मुस्कुरा देना ।
ऐ दिल सनम की शरारत पे कुछ मचल तो सही ।।

जमी है वर्फ़ ज़माने की खूब रिश्तों पर ।
बची हो आग तो हंसकर जरा पिघल तो सही ।।

तेरे लिए वो किताबें ग़ज़ल की लिखता है ।
असर हो दिल पे तो अपनी सुना ग़ज़ल तो सही ।।

सफर अधूरा है मंजिल अभी है दूर बहुत ।

तू थोड़ी दूर तलक मेरे साथ चल तो सही ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 75

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on January 13, 2018 at 2:04pm

अब ठीक है ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 13, 2018 at 1:59pm

आ0 कबीर सर शत शत नमन के साथ सादर आभार सुधार कर दिया ।

Comment by Samar kabeer on January 10, 2018 at 5:38pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

4थे शैर का सानी मिसरा यूँ कर लें :-

'अना-ए-हुस्न पे इतरा के कुछ उबल तो सही'

5वें शैर के ऊला में 'से' की जगह 'की' और 'में' की जगह 'पे' कर लें ।

छटे शैर में क़ाफ़िया दोष है,सही शब्द है "द्ख्ल"

7वें शैर के ऊला ने 'से' की जगह "की" कर लें ।

आख़री शैर का सानी मिसरा बह्र में नहीं है इसे यूँ कर लें :-

'तू थोड़ी दूर तलक मेरे साथ चल तो सही'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"क्षणिकाएँ अच्छी बनी हैं, हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी"
3 hours ago
vijay nikore commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"गज़ल अच्छी लगी। हार्दिक बधाई, आदरणीय संतोष जी"
3 hours ago
vijay nikore commented on TEJ VEER SINGH's blog post पहल - लघुकथा -
"बेह्तरीन, कसी हुई लघु कथा के लिए हार्द्क बधाई भाई तेज वीर सिंह जी"
3 hours ago
vijay nikore commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"इस अच्छी गज़ल के लिए दिल से बधाई, आदरणीय शिज्जू शकूर जी"
3 hours ago
vijay nikore replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"प्रतिभा पांडे जी, आपका जीवन सुखमय हो। जन्मदिन की हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
vijay nikore replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"भाई योगराज जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ"
4 hours ago
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"हरिगीतिका छंद में यह लाडली है देश की आकाश को छूने चलीसब तोड़कर बाधा बढ़ी है आज वह हक़ की गली जग सोचता…"
7 hours ago
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"हरिगीतिका छन्द में यह लाडली है देश की आकाश को छूने चलीसब तोड़कर बाधा चली है आज वह हक़ की गली जग…"
7 hours ago
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह जनाबे मोहतरम समर कबीर साहब, उस्ताद वाली नज़र पड़ी और रचना धन्य हुई। बहुत बहुत शुक्रिया इतनी…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,रचना आपको पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ,आपकी प्रशंसा पाकर मुग्ध हूँ,…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत शुक्रिया आपका,मुहतरमा प्रतिभा पाण्डेय साहिबा ।"
8 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह! वाह!! वाह! बहुत ख़ूब ! बहुत ख़ूब ! छंद पढ़कर मज़ा आ गया । अभिभूत हो गया हूँ । बहुत सशक्त…"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service