For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है....


ज़िंदगी
साँसों के महीन रेशों से
गुंथी हुई
बिना सिरों वाली
एक रस्सी ही तो है
जिसकी उत्पत्ति भी अंधेरों से
और विलय भी अंधेरों में होता है


ज़िंदगी
लम्हों के पायदानों पर
आबगीनों सी ख़्वाहिशों को
छूने के लिए
सांस दर सांस
चढ़ती जाती है
मौसम
अपने ज़िस्म के
इक इक लिबास को उतारते
ज़िंदगी को
हकीकत के आफ़ताब की
तपिश से रूबरू करवाने की
हर मुमकिन कोशिश करते हैं
मगर अफ़सोस
ग़ुरूर में गुम ज़िंदगी
कायनात की हर ख़्वाहिश को
अपनी मुट्ठी में क़ैद करना चाहती है
नहीं जानती कि
ख़्वाहिश तो
अजल की डिब्बी में क़ैद है
वो कहाँ किसी के हाथों की ज़द में आती है
हर अलससुब्ह
नयी ख़्वाहिश ज़ह्न में अंगड़ाई लेती है
फिर रात की तारीकियों में
अजल की हो जाती है
ज़िंदगी
फिर अपनी नाकामी पे
उदास हो जाती है
थक-हार के
आख़िर
साथ ख्वाहिशों के
वो भी
अजल की हो जाती है


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 62

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on November 23, 2017 at 12:38pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत ही उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
'ग़रूर'-"ग़ुरूर"
'ग़ुम'-"गुम"
'अलसुब्ह'-"अलससुब्ह"
'ज़हन'-"ज़ह्न"
Comment by Mohammed Arif on November 22, 2017 at 4:38pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,
सुंदर ख़्यालों के रेशमी धागों की बुनी मखमली ज़िंदगी की चादर । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post प्रश्न चिन्ह - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय नीता कसार जी।"
16 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मृत्यु भोज - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय नीता कसार जी।"
17 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal posted a blog post

ग़ज़ल -राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया आनी : रदीफ़ :मुझेबह्र :२१२२ २१२२  २१२२  २१२राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझेइन…See More
53 minutes ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है।बधाई"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय गोपाल भाईजी सरसी में चित्र को साकार कर दिया आपने। चित्र के अनुरूप सुंदर शब्दों और भावों से…"
10 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेश भाईजी चित्र के अनुरूप सुंदर शब्दों और भावों से युक्त इस सरसी छंद के लिए मेरी हार्दिक…"
10 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी चित्र के अनुरूप सुंदर शब्दों और भावों से युक्त इस सरसी छंद के लिए मेरी हार्दिक…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी रचना की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से धन्यवाद आभार। उम्मीद है अब आप सभी उत्सवों में…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद     खंडहरों सा घर है कोई , पत्थर की दीवार | लगा सामने बँगलों जैसा, ऊँचा सा इक…"
11 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -गीत कुछ वस्ल और अलगाओं की’ भी गानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय समर कबीर साहिब , कुछ सुधार कर फिर पेश करता हूँ | कृपया एक नज़र डालें |"
12 hours ago
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post मृत्यु भोज - लघुकथा –
"परंपरायें जब बेडिया बन जायें तो तब उन्है तोड़ देना बेहतर ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद० तेजवीर सिंह जी…"
13 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ।"
13 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service