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आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')

2122     1212  22

.

दिल को फिर बेकरार कौन करे

आपका ऐतबार कौन करे

 

कत्ल का दिन अगर मुकर्रर है

 ज़िन्दगानी से प्यार कौन करे

 

तीर मुड़ जाएगा मेरी जानिब

 जानकर ये शिकार कौन करे

 

मैं शिनावर हूँ तैर जाऊँगा

नाव का इंतजार कौन करे

 

उनकी आँखे मेरे लिये काफी

 आईने में सिंगार कौन करे

 

जानकर ये मेरा कफस इतना

जिस्म को हद से पार कौन करे

 

होगा मेरा तो लौट आयेगा

मिन्नते बार बार कौन करे

 

जब नजर से ही काम चल जाए

तीर को  दागदार कौन करे

 

इश्क की पुरखतर सदा  राहें

हैं मगर  ये विचार कौन करे

 

चाँद तारों की आरजू है तुम्हें  

काम ये ख़ाकसार  कौन करे

 

है मुख़ालिफ़ भले लहू अपना   

रब्त को दरकिनार कौन करे  

.

-----मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 27, 2017 at 9:35am

आदरणीया राजेश जी , खूब सूरत गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ । बस - सिंगार ( शृंगार ) को 221 मे बान्धना चाहिये था शायद ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 27, 2017 at 8:29am
आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन, बेहतरीन ग़ज़ल कहीं आपने, और इस ग़ज़ल पर आद0 समर साहब की इस्लाह, सब पढ़कर बहुत कुछ सीखने को मिला, बधाई स्वीकार करें। सादर
Comment by vijay nikore on September 27, 2017 at 5:40am

//है मुख़ालिफ़ भले लहू अपना
रब्त को दरकिनार कौन करे //

सारी गज़ल ही दिलकश है, बहुत-बहुत बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 26, 2017 at 10:46pm
बड़ी ही अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीया..सादर
Comment by रामबली गुप्ता on September 26, 2017 at 9:50pm
वाह वाह आदरणीया बहन राजेश कुमारी जी। बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने। दिल से बधाई स्वीकारें।सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 26, 2017 at 1:37pm

आदरणीया राजेश जी आपकी यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद आई . गुनगुनाने में भी बढ़िया लगा / काबिले तारीफ इस ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 26, 2017 at 11:42am

आद० निलेश भैया ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया .

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 26, 2017 at 11:36am

बहुत खूब आ. राजेश दीदी 
बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 26, 2017 at 11:35am

बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी 

Comment by Samar kabeer on September 26, 2017 at 11:28am
'जानकर भी विचार कौन करे'
ये मिसरा पसन्द आया ।

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