For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नए चेहरों की कुछ दरकार है क्या

1222 1222 122

नए चेहरों की कुछ दरकार है क्या ।
बदलनी अब तुम्हें सरकार है क्या ।।

बड़ी मुश्किल से रोजी मिल सकी है ।
किया तुमने कोई उपकार है क्या ।।

सुना मासूम की सांसें बिकी हैं ।
तुम्हारा यह नया व्यापार है क्या ।।

इलेक्शन लड़ गए तुम जात कहकर ।
तुम्हारी बात का आधार है क्या ।।

यहां पर जिस्म फिर नोचा गया है ।
यहां भी भेड़िया खूंखार है क्या ।।

बड़ी शिद्दत से मुझको पढ़ रहे हो ।
मेरा चेहरा कोई अखबार है क्या ।।

हिजाबों में खरीदारों की रौनक ।
गली में खुल गया बाज़ार है क्या ।।

बहुत दिन से कसीदे लिख रहे हैं ।
कलम में आपके भी धार है क्या ।।

कदम उसके जमीं पर अब नहीं हैं ।
हुआ कुछ चांद का दीदार है क्या ।।

तबस्सुम पर तेरे हैरत हुई है।
गमों की हो गयी भरमार है क्या ।।

महज मजहब मेरा पूछा था उसने ।
कहा तू देश का गद्दार है क्या ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 106

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 23, 2017 at 9:12pm

आदरणीय नवीन भाई , अच्छी गज़ल कही है , बधाइयाँ स्वीकार करें । आ. समर भाई की की बातों का खयाल कीजियेगा

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 22, 2017 at 6:19pm
जनाब नवीन साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।
Comment by Ravi Shukla on August 22, 2017 at 5:31pm

आदरणीय नवीन मणि जी क्‍या खुब गजल कही है आपने हर श्‍ोर कमाल का लगा मुबारक बाद हाजिर है

और ये शेर हमें बहुत पसन्‍द आया

बड़ी शिद्दत से मुझको पढ़ रहे हो ।
मेरा चेहरा कोई अखबार है क्या ।।  वाह वाह । पुन: बधाई सादर

Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:46pm
आ0 आरिफ साहब शुक्रिया
Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:46pm
आ0 लक्ष्मण धामी साहब शुक्रिया
Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:45pm
आ0 नीरज साहब आपकी सलाह के अनुसार पोस्ट एडिट कर दिया हूँ
Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:44pm
आ0 कबीर सर सही सलाह हेतु दिल शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on August 21, 2017 at 11:11pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'नए चहरों की कुछ दरकार है क्या'
इस मिसरे में 'दरकार'शब्द का अर्थ होता है,ज़रूरी,मतलूब, इस अर्थ में 'चहरों'शब्द की वजह से रदीफ़ की 'है','हैं'हो रही है,और इस मिसरे में इसी कारण से 'कुछ'शब्द भर्ती का हो रहा है,मेरे ख़याल से इस मिसरे को इस तरह करना उचित होगा :-
'नया चहरा कोई दरकार है क्या'
देखियेगा ।
Comment by Niraj Kumar on August 21, 2017 at 4:50pm

आदरणीय नविन जी,

उम्दा ग़ज़ल हुई है.दाद के साथ मुबारकबाद.

 'गमों का हो गया भरमार है क्या' में शायद 'गमों का' की जगह 'ग़मों की' होना चाहिए था.

सादर 

Comment by Mohammed Arif on August 21, 2017 at 7:54am
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत अच्छे अश'आर । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन को अपनी स्नेहिल प्रतिक्रिया से प्रशंसित करने का दिल से आभार।"
13 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। "
14 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब , सृजन के भावों को सहमति देती आपकी प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया से सृजन जीवंत…"
14 minutes ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-मुझ को कोई ख़रीद सस्ता किए बग़ैर
"आदरणीय भाई नीलेश जी आपकी तो हर रचना ही लाजवाब होती है .उसी कड़ी में इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेर सारी…"
14 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"भाई मो. आरिफ़ जी, यह अत्यंत ही प्रसन्नता का विषय है, कि ऐसा रचनात्मक कार्य न केवल सराहा गया, बल्कि…"
28 minutes ago
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में?है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में। शून्य में सामान्यतः…"
56 minutes ago
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब , हर लफ्ज़ आपकी तारीफ़ की रोशनी के आगे जुगनू साबित होता है। इस मोहब्बत…"
59 minutes ago
Dr Ashutosh Mishra commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आदरणीया राजेश जी आपकी यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद आई . गुनगुनाने में भी बढ़िया लगा / काबिले तारीफ इस ग़ज़ल…"
1 hour ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"सादर आभार आदरणीय आशुतोष मिश्र जी"
1 hour ago
Dr Ashutosh Mishra commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी सार्थक संदेशों को समाहित किये वर्तमान परिदृश्यों को चित्रित करती हुयी शानदार रचना…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"भाई मो. आरिफ़ जी, यह अत्यंत ही प्रसन्नता का विषय है, कि ऐसा रचनात्मक कार्य न केवल सराहा गया, बल्कि…"
1 hour ago
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-मुझ को कोई ख़रीद सस्ता किए बग़ैर
"वाह वाह आ. नीलेश जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद हर शेर लाजवाब, हर शेर के लिए मुबारक़बाद,.."
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service