For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

1222 1222 122
बिखरकर फिर इकट्ठा हो रहा है
जवाँ फिर से इरादा हो रहा है।

जिसे अपना समझते थे,न जाने
वही क्यों अब पराया हो रहा है?

समन्दर सी छलकती हैं ये आँखें
कोई तो ज़ख्म गहरा हो रहा है।

किसे जाकर सुनाएँ हाल अपना
हमारा शाह बहरा हो रहा है।

भरोसा टूटना लाज़िम हुआ अब
जहाँ का दौर झूठा हो रहा है।

ज़ुबाँ कैसे किसी की अब उठेगी
ज़ुबाँ पे सख़्त पहरा हो रहा है।

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 107

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार yesterday
आदरणीय गिरिराज सर,गजल प्रयास को पसन्द कर प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार संग सादर नमन!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी yesterday

आदरनीय सतविन्द्र भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , सभी अशआर अच्छे हुये हैं ... हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by सतविन्द्र कुमार on Monday
आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार on Monday
आदरणीय बृजेश भाई जी,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहे दिल शुक्रिया।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Sunday

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है
मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ --

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Sunday
वाह वाह खूबसूरत बहुत खूबसूरत
Comment by सतविन्द्र कुमार on Friday
आदरणीय तेजवीर जी,सादर नमन!प्रयास पर उपस्थित होकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार on Friday
आदरणीय रवि शुक्ल सर,आपको प्रयास पसन्द आया यह सार्थक हुआ।सादर हार्दिक आभार संग नमन
Comment by सतविन्द्र कुमार on Friday
आदरणीय मुहम्मद आरिफ साहब,सादर नमन,प्रयास के अनुमोदन ,सराहना कर प्रोत्सहित करने के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार
Comment by TEJ VEER SINGH on March 17, 2017 at 10:28am

हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर जी।बेहतरीन गज़ल।
किसे जाकर सुनाएँ हाल अपना
हमारा शाह बहरा हो रहा है।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Profile IconMajid ali kawish and Anuraag Vashishth joined Open Books Online
9 minutes ago
Seema mishra commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )
" आदरणीय गिरिराज जी शानदार ग़ज़ल, मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ| सादर "
32 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (इंसानियत)
"आदरणीय वासुदेव भाई , गज़ल अच्छी हुई है ,  आपने बहर निभाने मे  सफल रहे आप । शब्दों का चुनाव…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय सतविन्द्र भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभार ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरनीय बृजेश भाई , अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । मेरा सोचना है कि .. अगर…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरनीय नवीन भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये बधाइयाँ आपको । आ,रवि भाई की बातों का ख्याल कीजियेगा । -- कुछ…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी posted a blog post

ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )

22   22   22   22   22   2हर चहरे पर चहरा कोई जीता हैऔर बदलने की भी खूब सुभीता है सांप, सांप को…See More
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

ई-मौजी ...

ई-मौजी ...आज के दौर में क्या हम ई-मौजी वाले स्टीकर नहीं हो गए ?भावहीन चेहरे हैं संवेदनाएं…See More
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Sushil Sarna's blog post एक शब्द ....
"आदरनीय सुशील भाई , खूब सूरत दार्शनिक कविता के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Mohit mukt's blog post अरे पगली (याचना} (कविता ):- मोहित मुक्त
"आदरनीय मोहित भाई , प्रेम भाव से ओत प्रोत कविता के लिये बधाई । शब्दों की वर्तनी का ख्याल कीजिये ...…"
4 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service