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ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )

ग़ज़ल
-------
(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फअल )

क़ियामत की वो चाल चलते रहे |
निगाहें मिलाकर बदलते रहे |

दिखा कर गया इक झलक क्या कोई
मुसलसल ही हम आँख मलते रहे |

यही तो है गम प्यार के नाम पर
हमें ज़िंदगी भर वो छलते रहे |

मिली हार उलफत के आगे उन्हें
जो ज़हरे तअस्सुब उगलते रहे |

तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ
वफ़ा के दिए सारे जलते रहे |

असर होगा उनपर यही सोच कर
निगाहों से आँसू निकलते रहे |

था तस्दीक़ शाना किसी गैर का
जहाँ बैठ कर वो उछलते रहे |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 20, 2017 at 10:51pm

मुहतरम जनाब मोहित साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ
का बहुत बहुत शुक्रिया , महरबानी ---

Comment by Mohit mishra (mukt) on March 20, 2017 at 10:43pm

 आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan बहुत सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने हार्दिक बधाई

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 20, 2017 at 9:13pm

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी --

Comment by सतविन्द्र कुमार on March 19, 2017 at 9:48pm
आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,बेहतरीन अशआर हुए हैं,हार्दिक बधाई
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 9:04pm

मुहतरम जनाब ब्रजेश . कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 9:04pm

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 9:03pm

मुहतरम जनाब राघव साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---
जनाब ग़ज़ल तो ग़ज़ल होती है वो न कभी बदली है और न बदलेगी
अगर इसे बदलने की कोशिश की गयी तो वो ग़ज़ल नहीं रह सकती
मेरे हिसाब से मिसरा मुकम्मल है बदलाओ की ज़रूरत नहीं है ----सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:56pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---आपके मशवरे का शुक्रिया
मिसरा तो यही है " तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ " आप ने जैसा कहा
वैसा भी हो सकता है ---सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:50pm

मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:49pm

मुहतरम जनाब रवि साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

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