For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गनेश जी "बागी")


'ग़ज़ल'

दुआओं से किसी की फल रहा हूँ

निगाहों में तुम्हारी खल रहा हूँ

 

किसी को भी नहीं मैं छल रहा हूँ

न तो रहमोकरम पर पल रहा हूँ

 

बुरा था वक्त पीछे छोड़ आया

नहीं भूला जहाँ पर कल रहा हूँ

 

हिमालय की रुपहली बर्फ पर जा

वतन के वास्ते मैं गल रहा हूँ

 

दिलों में प्यार की शमआ जलाने

मैं अपनी रहगुज़र पर चल रहा हूँ

 

दुआयें माँ की अपने साथ में ले

बुजुर्गों का मुसलसल बल रहा हूँ

 

किसी के प्यार में भूला तुम्हें क्यों

तुझे खोकर हथेली मल रहा हूँ

 

भुला दूं तुमको कैसे आज जानम्

पहेली तुम तुम्हारा हल रहा हूँ

 

सियासत से रहो तुम दूर ‘अम्बर’

बुरी है आग नाहक जल रहा हूँ

--अम्बरीष श्रीवास्तव

Views: 93

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 14, 2012 at 11:19pm

धन्यवाद आदरणीय भ्रमर जी ! आपकी सराहना से हृदय में एक नवऊर्जा का संचार होता है ....सादर

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 21, 2012 at 11:27pm

दिलों में प्यार की शमआ जलाने

मैं अपनी रहगुज़र पर चल रहा हूँ

 

दुआयें माँ की अपने साथ में ले

बुजुर्गों का मुसलसल बल रहा हूँ

आदरणीय अम्बरीश जी बहुत सुन्दर भाव लिए गजल ...हिंद और पाक का बाघा बार्डर याद हो आया वहां गुजारे वक्त ...आभार आप का ..माँ की दुवाएं हमारे वीरों के साथ सदा रहें  -भ्रमर ५ 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on May 1, 2012 at 12:24am

स्वागत है मित्र शैलेन्द्र जी ! आपका हार्दिक धन्यवाद |

Comment by CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 30, 2012 at 12:33pm

बुरा था वक्त पीछे छोड़ आया

नहीं भूला जहाँ पर कल रहा हूँ

 

हिमालय की रुपहली बर्फ पर जा

वतन के वास्ते मैं गल रहा हूँ

 

दिलों में प्यार की शमआ जलाने

मैं अपनी रहगुज़र पर चल रहा हूँ

मुसलसल गजल पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें अम्बरीष सर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 30, 2012 at 9:15am

नमस्कार महिमा जी, गज़ल को सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार !

Comment by MAHIMA SHREE on April 29, 2012 at 7:11pm

हिमालय की रुपहली बर्फ पर जा

वतन के वास्ते मैं गल रहा हूँ

 

दिलों में प्यार की शमआ जलाने

मैं अपनी रहगुज़र पर चल रहा हूँ

आदरणीय अम्बरीश सर , नमस्कार

बहुत ही भावपूर्ण रचना .... बहुत-२ बधाई आपको

 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 29, 2012 at 3:55pm

स्वागत है आदरणीय कुशवाहा साहब , आपका  हार्दिक आभार ! बहुत अच्छी पंक्तियाँ कही हैं आपने !

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 29, 2012 at 2:16pm

aadarniy ambrish ji, saadar.

chitra hi mere lahoo ke ubal ke liye kaafi hai

gajal to puri ki imtihaan abhi baaki hai.

ye achha hi kiya na likha paimane par 

bahah tere intjar main khadi ek saaki hai. 

laakh sitam ye kar len rahnuma mere

bah chuka bah raha par abhi bhi lahoo baaki hai. 

badhai.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 28, 2012 at 5:48pm

स्वागत है आदरणीया वंदना जी ! गजल की तारीफ़ के लिए तहे दिल से शुक्रिया !

Comment by vandana gupta on April 28, 2012 at 1:09pm

एक बेहतरीन शानदार गज़ल

कृपया ध्यान दे...

New

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा,रचना शीघ्र अनुमोदित कराने हेतु रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिख दें । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विजय मिश्र commented on Dr Ashutosh Vajpeyee's blog post क्लीवत्व नदी बहती
"भाव से भरी वीररस में पगी बहुत ही प्रेरक कविता ,जो आजको अपने गौरवशाली इतिहास का आइना दिखा रही है .…"
5 minutes ago
aditya chaturvedi is now friends with बृजेश नीरज and Kewal Prasad
8 minutes ago
विजय मिश्र commented on Abhinav Arun's blog post ग़ज़ल - मंडी से आढ़त तक सबकी पर्ची कटी हुई !
""इस घर से उस घर तक जाने में रोना हँसना , सब कुछ गुड्डे गुड़ियों का एक खेला ही तो है…"
15 minutes ago
बृजेश नीरज commented on Dr Ashutosh Vajpeyee's blog post क्लीवत्व नदी बहती
"वाह भाई जी! बहुत ही सुन्दर! वास्तव में आज देश को इन्हीं तेवरों की जरूरत है। बहुत बहुत बधाई…"
1 hour ago
बृजेश नीरज commented on Abhinav Arun's blog post ग़ज़ल - मंडी से आढ़त तक सबकी पर्ची कटी हुई !
"वाह, वाह! बहुत ही सुन्दर! मेरी ढेरों बधाई स्वीकारें।"
1 hour ago
बृजेश नीरज commented on Kewal Prasad's blog post !!! नव गीत !!!
"केवल भाई इस प्रयास के लिए आप बधाई के पात्र हैं। आदरणीय राजेश कुमार झा जी ने जो बात कही है उस पर…"
1 hour ago
बृजेश नीरज commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post ग़ज़ल "बह रही गंगा अजल से पापियों के वास्ते"
"संदीप भाई बहुत सुन्दर! बधाई आपको!"
1 hour ago
बृजेश नीरज commented on Neeraj Mishra's blog post सागर में सागर की खोज [गीत ]
"गीत का अन्तिम अंतरा अच्छा है। शुरूआत को और स्पष्ट करने की जरूरत है। इस प्रयास के लिए बधाई!"
1 hour ago
बृजेश नीरज commented on Neeraj Mishra's blog post चाँद बादल में छुपा [नज़्म]
"इस सुंदर नज्म के लिए आपको बधाई! नज्म क्या होती है इस पर आपसे मार्गदर्शन चाहूंगा।"
2 hours ago
बृजेश नीरज commented on Gul Sarika Thakur's blog post कंजूस
"बहुत ही सुन्दर! कविता समाप्त होते होते भाव और कहन के चरम पर पहुंच गयी। मेरी बधाई स्वीकारें!"
2 hours ago
Dr Ashutosh Vajpeyee liked Dr Ashutosh Vajpeyee's blog post क्लीवत्व नदी बहती
2 hours ago
Dr Ashutosh Vajpeyee posted blog posts
2 hours ago

© 2013   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service