इश्क की कोमल भावनाओ से
अछूती है मेरी कविताये
Comment
Comment by अरुन शर्मा 'अनन्त' on May 1, 2013 at 5:11pm वाह आह वाह आह दिव्या जी सिर्फ यही शब्द हैं कुछ और शेष हैं ही नहीं, किन शब्दों में आपकी सराहना करूँ किन शब्दों में मन के भीतर उठ रहे भावों को व्यक्त करूँ. निःशब्द कर दिया है आपने, शब्दकोष से सारे शब्द आपने चुरा लिए हैं. आनंद आ गया काफी अरसे के बाद ऐसी रचना मिली है पढ़ने. दिल से भर भर के ढेरों बधाई स्वीकारें.
ye painting bhi aapki hai kya?
मेरे तो सब्द ही खो गए क्या लिखूं आपकी तारीफ में
अति सुन्दर
Comment by दिव्या on April 23, 2012 at 8:03am आदरणीय सौरभ सर जी, मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए आप का ह्रदय से आभार | आप की इस उम्मीद पर खरा उतरने की पूरी पूरी कोशिश रहेगी | आप के आशीष का हाथ सदा चाहूंगी | गलतियों की तरफ ध्यान दिलाने के लिए आभार अगली बार कोशिश रहेगी ये टंकण दोष न हो | एक बार फिर से आप का शुक्रिया
Comment by दिव्या on April 23, 2012 at 7:56am आदरणीया सरिता सिन्हा जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया

दिव्या जी....... . देर तक गुम रहा... बेबोल... . अद्भुत भाव-संसार में उछाल दिया आपने.
खुले दिल से कहूँ, तो, ओबीओ के पटल पर अबतक की प्रतीक्षित रचना थी.
इस पटल पर कई बार कई-कई रचनाकारों द्वारा वयस के इस मुलायम मोड़ की अभिनव अनुभूतियों को अभिव्यक्त करती रचनाएँ आयीं हैं, किन्तु, हर बार ’कुछ और..’ की पिपासा के साथ मेरा पाठक मन प्रछन्न बना रह गया था. आज आपकी इस प्रवहमान रचना ने एकबारगी संतृप्त कर दिया. शब्द, भाव, अभिव्यक्ति और छंदमुक्तता का शिल्प, सबकुछ सामञ्जस्य में है. ईश्वर आपके रचनाकर्म को अनवरत प्रखर करता रहे.
आपसे हम सभी ने बहुत उम्मीदें लगा रखी हैं, दिव्याजी. हृदय की गहराइयों से शुभकामनाएँ.
ध्यातव्य : अक्षरी और व्याकरण सम्बन्धी दोषों के प्रति संवेदनशील रहें. वर्ना रुमानी खयालों के हलवे को गुलगुलाने के आनन्द में ऐसे दोष बेतरीके पड़े कंकड़ से कस के लगते हैं.
Comment by Sarita Sinha on April 20, 2012 at 2:08pm दिव्या जी नमस्कार ,
Comment by दिव्या on April 20, 2012 at 8:43am आदरणीया राजेश कुमारी जी, इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से आभार

दिव्या जी आपने रचना के माध्यम से पहले प्रेम में उभरते दिली भावों को बड़ी चतुरता से कह डाला बड़ा सुन्दर लगा यह अंदाज इस प्यारी सी भोली सी रचना के लिए हार्दिक बधाई
Comment by दिव्या on April 20, 2012 at 8:18am आदरणीय प्रदीप जी, बहुत बहुत शुक्रिया आप का आप ही की कोशिशो का नतीजा है की मैंने फिर से वापसी की आप का आशीर्वाद ऐसे ही मिलता रहे :)
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा,रचना शीघ्र अनुमोदित कराने हेतु रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिख दें । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
कल्पना रामानी left a comment for Raj Kumar Jindal
aman kumar commented on poonam singh's blog post क्यों नही लिखती तुमको
aman kumar commented on aditya chaturvedi's blog post हास्य कविता
aman kumar commented on aditya chaturvedi's blog post व्यंग्य
aman kumar commented on Parveen Malik's blog post ये था मेरा भी एक गुनाह ....
sanju singh commented on sanju singh's blog post अब चाँद तारे ख्वाबों में आते नहीं,
dinesh solanki posted a blog post© 2013 Created by Admin.
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |


You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online