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Comment by Arun Srivastava on April 20, 2012 at 9:59am दिव्या मैम , आपकी सराहना के लिए धन्यवाद !
Comment by दिव्या on April 20, 2012 at 9:38am पुरानी किताब के पन्ने पलटना मन मे एक टीस उठा गया ........... काश हमेशा रह जाता है |
काश
कि उसी वक्त देख लेता
पलट कर पन्ने
उस किताब के !

भाई अरुण जी और सरिता जी, इस अदम्य विश्वासी वार्तालाप से मन विभोर हो गया.
आप दोनों गुणीजनों को मेरा हार्दिक धन्यवाद .. :-)))
Comment by Arun Srivastava on April 19, 2012 at 8:56pm सरिता सिन्हा मैम ,
अब क्या करें गलती हो ही गई तो ! अगली बार कोई किताब वापस मिलेगी तो जरूर देखूंगा ! :)) :))
माहौल हल्का करने के लिए आपका धन्यवाद , आपकी विनोदप्रियता का अभिनन्दन !
Comment by Sarita Sinha on April 19, 2012 at 5:51pm
Comment by Arun Srivastava on April 19, 2012 at 12:35pm प्रदीप सर , बहुत बहुत धन्यवाद !
Comment by Arun Srivastava on April 19, 2012 at 12:35pm महिमा श्री जी , आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया ने उत्साहित किया ! धन्यवाद !
Comment by Arun Srivastava on April 19, 2012 at 12:33pm राजेश कुमारी मैम , जिंदगी के सफर में अक्सर वक्त बहुत कुछ हमसे छीन लेता है और कुछ हम खुद खो देते है और फिर बस एक ही शब्द बचता है अपने पास " काश ......................... !"
आपने कविता को सम्मान दिया इसके लिए आभारी हूँ !
Comment by Arun Srivastava on April 19, 2012 at 12:31pm वंदना गुप्ता मैम , आपका निशब्द होना मेरे लिए सम्मान की बात है ! आपकी प्रतिक्रिया आत्ममुग्धता का कारण बनी ! दृष्टी बनाए रखें ! सादर धन्यवाद !
Comment by Arun Srivastava on April 19, 2012 at 12:30pm शैलेन्द्रर कुमार भ्रमर सर , सच कहा ऐसा भी होता है ! और हमें पता चलता है देर हो चुकी होती है ! धन्यवाद !
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