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लघु कथा 

अरे भाई हँसमुख जी, आज क्यूँ उदास हो, क्या हुआ ? क्या बताऊँ मैं आज बहुत परेशां हूँ, आप ही बताओ आप को कैसा लगेगा यह जान कर कि आप जिस घर में पिछले दस साल से अकेले रहते हो, उसमे आप के अलावा कोई और भी अचानक आकर रहने लगे !! कल रात कुछ लोग अचानक मेरे घर में मेरे ही सामने मेरे घर में डेरा डाल कर बैठ गए और अपना आधिपत्य जताने लगे और मैं कुछ न कर सका | जी में तो आया कि एक एक को उठाकर फेंक दूं पर क्या करे हमारी भी कुछ अपनी सीमायें हैं | क्या करूँ कौन से तंत्र मंत्र का सहारा लूं कि वो भाग जाएँ, पर सोचता हूँ कि इसमें इनका क्या दोष, दोष तो मेरे ही अपनों का है जिन्होंने मेरे हाथो से बनाए हुए दिनरात मेहनत करके बनाए हुए मेरे इस आशियाने को दूसरों को बेच दिया | कल वो मेरा श्राद्ध दूसरे देश में मना रहे हैं, अपना देश अपना आशियाना छोड़  कर इतनी दूर कैसे जाऊं इसी लिए मैं आज बहुत दुखी हूँ मित्रो |

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Comment by kanta roy on February 23, 2016 at 11:50am
बेहद गम्भीर प्रस्तुति हुई है यहाँ आपकी आदरणीया राजेश कुमारी जी । बेच खाया अपना ही घर द्वार .... बहुत गहरा तंज रोपित हुआ है । बधाई अापको हृदयतल से ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 14, 2012 at 7:48am

बहुत बहुत आभार सौरभ जी आपने इस कहानी  के मर्म को महसूस किया 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 14, 2012 at 4:55am

बहुत-बहुत बधाई, राजेशकुमारी जी.  इस सार्थक प्रयास को देख कर एहसास हुआ कि वास्तव में विलम्ब से इस पन्ने पर आ पाया. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 13, 2012 at 9:51am

bahut bahut aabhar Ajay kumar ji aapne is laghu katha ko dil se mehsoos kiya.

Comment by AjAy Kumar Bohat on April 13, 2012 at 9:23am

dil ko chhoo lene wali kahani...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 26, 2012 at 8:42am

जी आशा  जी जिस आशियाने मे तुम्हारी आत्मा बसी हो वो कहाँ छूट ता है आभार |

Comment by asha pandey ojha on February 25, 2012 at 11:12pm

 waaaaaah kitni marmsprshi kahani hai .. jade nahi chhoti .. jivan chhotne ke baad bhi yah katu saty hai 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 25, 2012 at 6:46pm

Nazeel ji shukriya.

Comment by Nazeel on February 25, 2012 at 5:37pm
Nice

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 25, 2012 at 5:06pm

हा गणेश जी बुजुर्गों की भावनाओं का क्या

कृपया ध्यान दे...

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