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मौसम को .....

सुइयाँ
अपनी रफ्तार से चलती रहीं
समय
घड़ी के बाहर खड़ा खड़ा काँपता रहा
मौसम
समय के काँधे पर
अपनी उपस्थिति की दस्तक देता रहा

बदले मौसम की बयार को छूकर
झुकी टहनियाँ
स्मृतियों में
पिछले मौसम के स्पर्श का रोमांच
सुनाती रहीं
मौसम को

वायु वेग से
रेत पर छोड़े पाँव के निशान
उड़- उड़ कर
अपनी व्यथा सुनाने लगे
मौसम को

झील के पानी में निस्तब्धता
दिखाती रही
वीचियों पर सोये हुए
समय के मौन प्रतिबिम्ब
मौसम को

ठहर गया ठिठक कर मौसम
वृक्ष से
मिट्टी में  गिरे हुए 
असहाय
एक पीले पत्ते को देख कर
एक दर्द की नदी बहने लगी
मौसम के अन्तस में

मौसम ने
समय को देखा
समय ने
घड़ी को
मौसम , समय , घड़ी
तीनों मौन
विधि के विधान के आगे
तीनों मजबूर
चलते ही रहना है
घड़ी ,समय
मौसम को

सुशील सरना /2-8-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 9, 2021 at 2:23pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on August 9, 2021 at 12:13pm
ठीक है सर । हार्दिक आभार सर ।
Comment by Samar kabeer on August 7, 2021 at 2:46pm

मेरी जानकारी में तो सहीह शब्द 'सूई' है, आप देख लें ।

Comment by Sushil Sarna on August 7, 2021 at 1:31pm
आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार सर । आप की शंका काबिले तारीफ है । मेरे विचार से भाव अपने आप में स्पष्ट है । अतः इसमें संशोधन की आवश्यकता महसूस नहीं होती । आपने समय दिया इसके लिए हार्दिक आभार आदरणीय । आपका मार्गदर्शन अमूल्य है ।सादर नमन
Comment by Sushil Sarna on August 7, 2021 at 1:23pm
आदरणीय समीर कबीर साहब , आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार सर । सर मेरे विचार से दोनों ही सही हैं ।शब्दकोश में दोनों का अर्थ /भाव एक ही है ।शेष आप जैसा कहें मैं स्वीकार कर लूँगा । सादर आभार
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 4, 2021 at 9:31am

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। 

"वायु वेग से

रेत पर छोड़े पाँव के निशान

उड़- उड़ कर

अपनी व्यथा सुनाने लगे

मौसम को"                  जनाब वाक्य विन्यास की दृष्टि से क्या यहाँ "छोड़े" के स्थान पर  बने, पड़े या 'छोड़े गये' जैसा कुछ नहीं होना चाहिए? 

Comment by Samar kabeer on August 3, 2021 at 6:59pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

'सुइयाँ' या "सूइयाँ"?

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