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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog (89)

अब समझ में नहीं आरही बेरुख़ी..

बह्र -212-212-212-212

मैने कह तो दिया जिंदगी आपकी।।

अब समझ में नहीं आ रही बेरुख़ी ।।

धड़कनें दिल की अपनी जवां गिन कहो।

क्या  बदलती न  मेरे लिए आज भी।।

आप समझें मुझे गर खिलौना न गम।

मुझको स्वीकार है ना समझ आशिक़ी।।

प्यार अहसास जुल्मों सितम रख लिए।

आगे चलकर मिले न मिले यह सभी।।

जिसकी रग में मुहब्बत की स्याही बहे।

वो कलम क्या बगावत लिखेगी कभी।।

कितना छांटो या काटो या मोड़ो…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 23, 2018 at 8:30am — 3 Comments

इस नशेमन की मोहलत है तबतक...

बह्र:-2122-1221-22

वक्त बे वक्त का आसरा है।।

घर का टुटा हुआ जो घड़ा है ।।1

  जो  मुहब्बत में अपनी बिका है।

उसको दौलत ओ शुहरत से क्या है ।।2

जब समझलो की क्या माजरा है।

बोल बोलो नही कुछ बुरा है।।3…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 11, 2018 at 8:30pm — 2 Comments

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ

मापनी :-

1212-1122-1212-112

शुरू कहाँ से करूँ ओऱ कहाँ से बात करूँ।।

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ।।

मुझे तो इतना तज्ज्रिबा नहीं मुहब्बत की।

फ़िसल वो जाएं शुरू मैं जहां से बात करूँ।।

कोई हसीन सा किरदार जिंदगी से जुड़े।

यही है चाह की उल्फत की हाँ से बात करूँ ।।

समझ समझ के समझ को समझ न पाए हमीं।

की किससे कौन अदा से जुबाँ से बात करुं।।

मेरे हबीब मेरे रब मेरी अना में अभी।

है इतनी चाह जमीं आसमाँ से बात…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 9, 2018 at 6:22pm — 3 Comments

तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता

बहर :-1212-1122-1212-22

गरीब वो हैं कि जिनका मकां नहीं मिलता।।

अमीर वो जो कभी खामखां नहीं मिलता।।

कोई भी शख़्स मुझे खुश नुमां नहीं मिलता।।

मुझे तो दर्द भी हँस कर मियां नहीं मिलता।।

मैं ढूंढता हूँ खुद का निशाँ नहीं मिलता।।

शह्र में तेरे मिरा हम जुबाँ नहीं मिलता।।

मिले बहुत से मगर और बात है तुम में।।

तुम्हारे जैसा कोई खुशनुमां नहीं मिलता।।

कसम भी प्यार में खाई कसम को तोड़ा भी।

हाँ यार…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 8, 2018 at 5:55pm — 8 Comments

अरे हम कोई लेखक थोड़ी हैं


बह्र:- 1222-1221-22
अरे ! हम कोई लेखक थोड़ी हैं।।
समय हो पास , वो मुमफली हैं।।

कहाँ कहना हमें मंच-कविता।
बहल बस दिल ही जाएं ख़ुशी हैं।।

बड़े ओहदे ,रंगीं रात ,ना ना।
गरीबां का निवाला, सही हैं।।

मुहब्बत में हमारी भी दोस्त।
नशा भी वो ,वही मयकशी हैं।।

कोई रूठे तो रूठे मेरा क्या।
मेरी दौलत ओ शोहरत नही हैं।।


आमोद बिंदौरी /मौलिक अप्रकाशित

Added by amod shrivastav (bindouri) on January 24, 2018 at 8:42pm — 2 Comments

वो कहते हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला

वो कहते हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला

बह्र-1222-1222-1222-1222

वो कहतें हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला।।

मैं कहता हूँ पुरानी थी नया रिश्ता बना डाला।।

न भूला कर की रिश्ते में मैं तेरा बाप हूँ बेटा।

कहाँ भूला यही तो सोंच उल्फत को भुना डाला।।

मैं कहता हूँ मेरी पहचान इक दिन आप की होगी।

वो बोले तुझ से कितने  बीज बो कर के उगा डाला ।।

मुझे अब तक यकीं होता न उल्फत की मिसालों पर।

मुहब्बत नाम है किसका उसे किसका बना…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on January 19, 2018 at 7:29pm — 2 Comments

मुझे है भला क्या कमी जिंदगी से

बह्र- 122-122-122-122

मुझे है भला क्या कमी जिंदगी से।।

है रिश्ता मेरा तीरगी ,रौशनी से।।

मुझे बज्म इतना न पहचां रही है।

है पहचान मेरी-तेरी माशुकी से।।

कई बार गुजरे हैं तेरे शह्र से।

तेरी आशिक़ी से तेरी बेरुख़ी से।।

मुहब्बत के कुछ ऐसे क़िस्से सुने हैं।

की डर लगता है आज की आशिक़ी से।।

दिये की जरुरत किसे अब नही है?

बता किसकी कब है बनी तीरगी से??

पता मुझको उस शख्स का भी जरा…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on January 19, 2018 at 5:24pm — 5 Comments

न पूछता है.. कोई आज यूँ पता मेरा/

बहर:- 1212-1122-1212-22



मेरे अतीत मेँ जाकर के जिन्दगी मुझसे॥

क्योँ चाहती हो मेरा प्यार,दोस्ती मुझसे॥

न पूछता है.. कोई आज यूँ पता मेरा॥

तमाम शहर मेँ इक तुम हो अजनबी मुझसे॥…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on December 4, 2017 at 3:30pm — 5 Comments

कोई फकीर तो कोई बादशा नजर आये

बहर:-1212-1122-1212-22



कोई फ़क़ीर तो कोई बादशा नजर आये।।

नजर का फर्क है ये किसको क्या नजर आये।।



है चाह दिल में की मुझको वफ़ा नजर आये।।

लिबास गुल में भी अदबी हया नजर आये।।



उन्हें जो देख लु तो जख्म दिल हरा हो ले ।

वो इश्क राह में इक हादसा नजर आये।।



भटक गया हूँ मै इस जिन्दगी की उलझन में।

है फ़िक्रे दिल की कोई रास्ता नजर आये।।



वो मश्खरे में भी भददी जुबाँ नही होता ।

जिन्हें वजूद में अपने खुदा नजर आये।।



सवाल… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 25, 2017 at 12:11pm — 2 Comments

इश्क की दास्ताँ यह छुपानी नही (गजल)

बहर:- 212-212-212-212



फर्ज के वास्ते बद-जुबानी नही ।

फर्ज वो राह है जिसके मानी नही ।।



हिज्र से बढ़के कोई कहानी नही।।

इश्क की दास्ताँ यह,छुपानी नही ।।



रूठ कर आप ने ही तो रुसवा किया।

आप ने ही मेरी बात मानी नही।।



शोर-ओ- गुल मे बसर हो गई जिंदगी ।

यूं लगे हम ने पाई जवानी नही।।



उम्र का हर तजुर्बा गरल दे रहा ।

इतना जहरीला अश्को का पानी नही ।।



जानलेवा रहा जिंदगी का सफ़र ।

हर कदम मौत है जिंदगानी… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 7, 2017 at 8:00am — 10 Comments

मैंने तन्हाई को भी पाला है। गजल

बह्र:- 2122-1212-22

जिसके तलवे में निकला छाला है।।
घर उसी हौसले ने पाला है।।।

पहले टूटा तिरा वही रिश्ता।
नौ महीने जिसे सभाला है।।

बाद मुद्दत के आज लौटी हो।
मौत कितना तुम्हे खंगाला है।।

मुश्क!.. ये ऐतबार देती है।
दिल नही जी जेहन भीआला है।।

साथ मेरे ही लौट आती है।
मैंने तन्हाई को भी पाला है।।

अप्रकाशित/ मौलिक
आमोद बिन्दौरी

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 3, 2017 at 9:30am — 8 Comments

ये छुआ छूत घाव है भाई

बहर:-2122-1212-22

ये छुआ छूत घाव है भाई।।
आदमी का स्वभाव है भाई।।

उनसे रिश्ता जुड़ा जुदा तो है ।
अपना अपना झुकाव है भाई।।

लोग दर्दो गमो के मारे हैं ।
बस सजगता बचाव है भाई।।

ये बहर ही गजल का नक्शा है।
इसपे लिखना ही चाव है भाई।।

आज आमोद तुम भी रुस्वा हो।
अब ये कैसा पड़ाव है भाई।।..आमोद बिन्दौरी

Added by amod shrivastav (bindouri) on September 7, 2016 at 11:09pm — 5 Comments

ये हवा मस्ती भरी...

ये हवा मस्ती भरी इस पार तक आती तो है।।

तन को मेरे छु के मुझसे प्यार फ़रमाती तो है।।



गाँव की सुन्दर सी गालियाँ और उनकी याद सब।

संग मेरे खेतों की मिट्टी ये हवा लाती तो है।।



जिनकी नजरों में सिवा नफरत के न कुछ और था।

ये हवा झकझोर कर के जात बतलाती तो है।।



क्यों बुराई कर रहा है बाप माँ ही शान हैं।

नाव कितनी भी हो जर्जर पार ले जाती तो है।।



क्यों नही है काम की लिक्खी गई ये पुस्तकें।

धूल इनपर है चढ़ी दीमक इन्हें खाती तो… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on September 7, 2016 at 1:49am — 5 Comments

दर्द अपना कह रही बस प्रीत गजलों की मेरे।

2122-2122-2122-212



मत करो तारीफ फ़र्जी गीत गजलों की मेरी।।

दर्द अपना कह रही बस प्रीत गजलों की मेरी।।



कशमकश है आप की मेरे दिले दरबार में।

लिख रहा हूँ आज जो भी जीत गजलों की मेरी ।।



राह में निकला मुसाफिर मुफलिसी हूँ ख्वाब हूँ।

चल रही गुपचुप सी बाता चीत गजलों की मेरी।।



मानता हूँ दर्द से लिपटी रही है उम्र भर।

दौरे पर्दा उठ गया है मीत गजलों की मेरी।।



वाह वाही लूटते दिख जायेगे बेशक हमीं।

बज्म बेशक जानती है रीत गजलों की… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on September 7, 2016 at 1:30am — 7 Comments

दिनरात चिरागों सा जला अपने वतन में

बह्र:-221-1221-1221-122



रुतबा -ए-उजाला है मिया अपने वतन में।

अब चैन मुहब्बत ओ मजा अपने वतन में।



अनपढ़ सा अंधेरा है मिटा अपने वतन में।

जैसे कोई खलिहान सजा अपने वतन में।।



वो रोज मुझे याद है वो ख़ूनी नजारा।

जब जुल्म से इन्सान लड़ा अपने वतन में।।



मुश्किल से हवा देश में लौटी है अमन की।

मजहब की न अब आग लगा अपने वतन में।।



बस चैन मुहब्बत -ओ-दुआ फर्ज के खातिर।

दिन रात चिरागों को जला अपने वतन में।।



आमोद… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on April 15, 2016 at 12:00am — 9 Comments

लो ये खिलते गुलाब ले जाओ

बह्र:-2122-1212-22

क्या नही है जनाब ले जाओ।
लो ये खिलते गुलाब ले जाओ।।

अब नही मेरा वास्ता उससे।
याद-ए-दौर-ए-शबाब ले जाओ।।

मुझको चाहो तो छोड़ दो तन्हा।
ये न करना की ख्वाब ले जाओ।।

जो भी आगोश में तेरी गुजरे।
उन पलों का हिसाब ले जाओ।।

मेरी तक़दीर में अंधेरे हैं।
आप यह माहताब ले जाओ।

है अगर मुझको छोड़कर जाना।
जिंदगी की किताब ले जाओ।।

आमोद बिन्दौरीमैलिक /अप्रकाशित

Added by amod shrivastav (bindouri) on April 3, 2016 at 1:35pm — 7 Comments

मय वो दौलत है जो जन्नत से यहाँ तक पहुँचे

बह्र:-2122-1122-1122-22



उसने ख़त लिख्खे रूमानी, वो कहाँ तक पहुँचे।।

मेरा दावा है रकीबों की ,जुबाँ तक पहुँचे।।



आह मत ले तु गरीबों की ,अमीराँ हो कर।

छोड़ दौलत को दुआयें ही, वहाँ तक पहुँचे।।



दौरे हाजिर में मुकाबिल है कहीं भी बेटी।

मेरी ख्वाहिस है बुलंदी के मकाँ तक पहुँचे।।



खुद खुदा ने ही खुदाई की खिलाफत करदी।

बे समय पानी ये पत्थर भी किसां तक पहुचे।।



नाम लेना भी गुनाहों में गिना क्यों तुमने।

मय वो दौलत है जो जन्नत से… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on April 3, 2016 at 1:32pm — 6 Comments

रोग जैसे लग रही है।

बह्र:-2122-2122-2122-212



क्या कहेगे लोग आखिर मेरी गजलें देखकर।

मैं किसानों की तरह ही खुश हुँ फसलें देखकर।।



जिनके घर छप्पर पड़े हैं आदमी क्या वो नहीं।

रो रहे है कुछ अमीराँ अपनी नस्लें देखकर।।



कांपते होठों से मेरे सुगबुगाती बात सा।

जैसे कोई लिख रहा हो आज शक्लें देख कर।।



कुछ न होगा वक्त की जुल्मी हवा की जीत से।

कुछ गरीबाँ ही रहेगे पिछली नक्लें देखकर।।



रोग जैसे लग रही है आज की यह सभ्यता।

काँपने लगती है रूहें भी मिसालें… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 31, 2016 at 1:11pm — 5 Comments

समय की मार से दो चार होंगे

1222/1222/122



समय की मार से दो चार होंगे।।

मेरे बच्चे तभी तैयार होंगे।।



मुहब्बत के खुले बाजार होंगे।

हमारे शेर तब अख़बार होंगे।।



न समझो दुश्मनों को काम जवानों।

नकाबों में छिपे ऐय्यार होंगे।।



जो मजहब की रही ऐसी ही हालत।

तो सच कहता हूँ हम बीमार होंगे।।



लगा की दीप रौशन कर मुहब्बत।

मेरा जुगनू सा सब परिवार होंगे।।



वो घूँघट में छिपा कर रुख मिले हैं।

लगा था इश्क में दीदार होंगे।।



जरा समझो हयाती इस… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 31, 2016 at 9:12am — 6 Comments

अमासी रात मेरे घर के तारे ..

बह्र:-1222-1222-1222-1222

अमासी रात मेरे घर के तारे छीन लेती है।।

तूफानी रात आये तो गुजारे छीन लेती है।।



मैं आँखें बन्द रखता हूँ मेरी यादें छुपा कर के।

खुला पाती है जब भी वो नज़ारे छीन लेती है।।



मेरी किस्मत को ऐ मालिक कभी उम्दा भी लिख्खा कर।

ये हसरत जिन्दगानी के सहारे छीन लेती है।।



नशा जिनको है दौलत का उन्हें कोई ये समझाए।

ये लत हमसे जरुरत में हमारे छीन लेती है।।



नहीं है हमजुबां कोई मेरा इस दौर हाजिर में।

कसक इतनी मेरे… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 27, 2016 at 3:58pm — 10 Comments

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