मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी
रोते रोते आये जैसे दुनिया में
वैसे ही तुम घर जाओगे बाबाजी
बाइक पर मोबाइल से मत बात करो…
Added by Albela Khatri on July 22, 2012 at 10:30am — 18 Comments
नीयत हो यदि साफ़ हमारी बाबाजी
नियति भी तब लगेगी प्यारी बाबाजी
पुस्तक, सी डी और दवायें बेच रहे
सन्त नहीं, वे हैं व्यापारी बाबाजी
कोई किसी का सगा नहीं है दुनिया में…
Added by Albela Khatri on July 21, 2012 at 11:00am — 19 Comments
हमारे प्यारे काका राजेश खन्ना के देहावसान पर अलबेला खत्री की शब्दांजलि
छन्न पकैया - छन्न पकैया, कहाँ चले तुम काका
छोड़ के अपना देश आपने रुख ये किया कहाँ का
छन्न पकैया - छन्न पकैया, मुमताज़ रो पड़ेगी
दो दो हीरो एक साथ गये, दुःखड़ा किसे कहेगी…
Added by Albela Khatri on July 19, 2012 at 12:40am — 18 Comments
क्या बतलाऊं हाल देश का बाबाजी
झगड़ा, टंटा, हठ, क्लेश का बाबाजी
माल स्वदेशी कौन ख़रीदे भारत में
सबको चस्का है विदेश का बाबाजी
कालिख भ्रष्टाचार की किस दिन जायेगी
धोला हो गया रंग केश का बाबाजी
पाखंडियों ने इतना…
Added by Albela Khatri on July 10, 2012 at 12:15pm — 18 Comments
प्यारे मित्रो हमारे लाड़ले बाबाजी आज चार दिन की विदेश यात्रा पर जा रहे हैं इसलिए अगली मुलाक़ात 25 जून को ही होगी, परन्तु जाते जाते भी बाबाजी से रहा नहीं गया . ये आपके समक्ष अपनी नई रचना परोसने के लिए मरे जा रहे हैं . इसलिए ओ बी ओ के मंच पर प्रस्तुत है यह नूतन तुकबंदी :
बड़े…
Added by Albela Khatri on June 21, 2012 at 8:12am — 15 Comments
तुम भी खाओ, हम भी खायें बाबाजी
आओ, मिल कर देश चबायें बाबाजी
राजनीति में किसी तरह घुस जाएँ तो
जीवन भर आनन्द मनायें बाबाजी
चोर - चोर मौसेरे भाई हैं तो फिर…
Added by Albela Khatri on June 15, 2012 at 10:22pm — 18 Comments
ओ बी ओ परिवार के समस्त स्वजनों को अलबेला खत्री का विनम्र प्रणाम .
एक शो और एक शूटिंग के चलते मैं तीन दिन सूरत से बाहर रहा . इसलिए यहाँ हाज़िरी नहीं दे पाया . परन्तु अच्छा ये रहा कि महा उत्सव में एक कुंडलिया और एक घनाक्षरी मैंने टी वी पर भी सुनाई तो लोगों ने ख़ूब सराहा . बाबाजी वाली एक ग़ज़ल भी …
Added by Albela Khatri on June 13, 2012 at 7:27pm — 24 Comments
जिधर देखिये, जल ही जल है बाबाजी
यहाँ सभी की आँख सजल है बाबाजी
लोग जिसे गंगाजल कह कर पीते हैं
वह गंगा का अश्रुजल है …
Added by Albela Khatri on June 8, 2012 at 8:50pm — 16 Comments
आज 31 मई विश्व तम्बाकू विरोधी दिवस पर एक विशेष रचना
सुट्टों ने सोखा जिस्म, सेहतमन्दगी गई
धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
छुप छुप के पीना छोड़, खुल्लेआम पी रहे
माँ की लिहाज़, बाप से शरमिन्दगी गई
गुटखा चबाने वाले की…
Added by Albela Khatri on May 31, 2012 at 4:30pm — 40 Comments
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