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suresh jadav 'Binaganjvi'
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suresh jadav 'Binaganjvi''s Page

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post जिंदगी (कविता)
"आ० बहर जरूर लिखे . यह इस मंच की परम्परा है . सा दर."
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post किस्सा (कविता)
"आ० मीटर भी बताना चाहिए था , गजल के लिए  मुबारकवाद . "
Friday
suresh jadav 'Binaganjvi' commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post किस्सा (कविता)
"शुक्रिया जनाब नरेंद्र जी एवं जनाब मो. आरिफ जी."
Jun 19
narendrasinh chauhan commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post किस्सा (कविता)
"सुन्दर रचना "
Jun 19
suresh jadav 'Binaganjvi' commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post जिंदगी (कविता)
"शुक्रिया जनाब मो़ आरिफ जी"
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Mohammed Arif commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post जिंदगी (कविता)
"आदरणीय सुरेश जादव जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र लाजवाब । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 19
Mohammed Arif commented on suresh jadav 'Binaganjvi''s blog post किस्सा (कविता)
"आदरणीय सुरेश जादव जी आदाब,बहुत ही बेहतरीन रचना । प्यार का अहसास कराती और साथ ही सादगी का परिचय भी देती हुई । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आपकी यह रचना ग़ज़ल की श्रेणी में आती है और आपने कविता लिख रखा है । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Jun 19
suresh jadav 'Binaganjvi' posted blog posts
Jun 17
suresh jadav 'Binaganjvi' is now a member of Open Books Online
Sep 28, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
Binaganj
Native Place
Binaganj
Profession
deputy collector
About me
intrested in poems, gazals

Suresh jadav 'Binaganjvi''s Blog

किस्सा (कविता)

किस्सा
............

जिंदगी सपनों का संसार हुई.
आँखें जब से उन से चार हुई.
.
महकी इश्क की खुश्बू बहुत
दास्तानें सारी अखबार हुई.
.
याद करने का अंदाज देखो
हचकियाँ चिट्ठी पत्री तार हुई.
.
आफत में अब दिल आ गया
तेज धड़कनों की रफ्तार हुई.
.
सिलसिला कसमों का चला
रस्में ऊँची जब दीवार हुई.
.
हकीकत जमानें से बस यही
मुहब्बत किस्सों में साकार हुई.
.
(सुरेश बीनागंजवी)

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 17, 2017 at 2:00am — 4 Comments

जिंदगी (कविता)

जिंदगी

...........



वक्त की रेत हाथों से, कुछ यूं फिसल गई.

जिंदगी समझे जब तक, जिंदगी निकल गई.

.

किया था वादा ता-उम्र, इमदाद का उसने

मुश्किलों मे किस्मत की भी, नीयत बदल गई.

.

बेमन उदास बैठी थी, तन्हाई में जब शाम

आमद जो उसकी हुई तो, तबियत बहल गई.

.

दुनिया की बंदिशों का, हमें इल्म है मगर

उसे पाने की फिर भी, ख्वाहिश मचल गई.

.

तूफां का जुनून 'सुरेश', काबिले तारीफ था

हौंसलों की जद्दोजहद से, कश्ती संभल…

Posted on June 17, 2017 at 1:57am — 3 Comments

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At 8:01am on December 29, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
Happy birthday
At 5:37pm on November 22, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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