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Baidyanath Saarthi
  • 33, Male
  • Patna, Bihar
  • India
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Mar 14, 2018
vijay nikore commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"बहुत ही उम्दा गज़ल। बधाई।"
Mar 12, 2018
surender insan commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"वाह ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास है ।हार्दिक बधाई स्वीकार करे जी।"
Mar 11, 2018
Baidyanath Saarthi commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || फूलों में नाज़ुकी कहाँ है अब ||
"जनाबे  Samar kabeer साहिब, आदाब ! आपका आशीर्वाद बना रहे , शुभेच्छा सहित ! "
Mar 9, 2018
Baidyanath Saarthi commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, बहुत बहुत धन्यवाद ! सादर नमन !"
Mar 9, 2018
Baidyanath Saarthi commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"श्री  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर प्रणाम स्वीकार करें ! स्नेह है !"
Mar 9, 2018
Baidyanath Saarthi commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"जनाब  Mohammed Arif साहिब, दिली शुक्रगुजार हूँ ! आपकी मुहब्बतें  हैं ! आदाब !"
Mar 9, 2018
Baidyanath Saarthi commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी, हृदयतल से आभार ! सादर प्रणाम व् धन्यवाद !"
Mar 9, 2018
Baidyanath Saarthi commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"मोहतरम Samar kabeer साहिब, तहे-दिल से शुक्रिया ! नवाज़िश ! सादर प्रणाम सहित !"
Mar 9, 2018
Samar kabeer commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || फूलों में नाज़ुकी कहाँ है अब ||
"जनाब सारथी जी आदाब,ये ग़ज़ल भी उम्दा है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Mar 8, 2018
Samar kabeer commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"जनाब सारथी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Mar 8, 2018
Nilesh Shevgaonkar commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"शानदार बैद्यनाथ सारती भाई...बड़ी रदीफ़ पर बहुत ख़ूब ग़ज़ल के लिए बधाई "
Mar 8, 2018
Mohammed Arif commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"आदरणीय बैद्यनाथ जी आदाब,                         बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Mar 8, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई .."
Mar 8, 2018
Mohammed Arif commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || फूलों में नाज़ुकी कहाँ है अब ||
"आदरणीय बैद्यनाथ जी आदाब,                      बहुत ही अच्छे अश'आरों से सजी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Mar 8, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Baidyanath Saarthi's blog post ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||
"वाह खूब ग़ज़ल कही..बधाई"
Mar 8, 2018

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Gender
Male
City State
Patna Bihar
Native Place
Koelwar, Ara
Profession
IT Professional
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ग़ज़ल- सारथी || फूलों में नाज़ुकी कहाँ है अब ||

फूलों में नाज़ुकी कहाँ है अब

थी कभी ताज़गी कहाँ है अब

आज कल इश्क़ तो दिखावा है

आशिक़ी आशिक़ी कहाँ है अब

शक्ल-सूरत तो पहले जैसी है

आदमी आदमी कहाँ है अब

अब नुमाइश है सिर्फ चेह्रों की

हुस्न में सादगी कहाँ है अब

चाँद अब दूधिया नहीं दिखता

रात भी शबनमी कहाँ है अब

लोग बाहर से मुस्कुराते हैं

यार सच्ची हँसी कहाँ है अब

जो समंदर को ढूंढ़ने निकले

ऐसी अल्हड़ नदी कहाँ है अब

छाँव भी बदली बदली लगती है

धूप भी धूप सी कहाँ है…

Continue

Posted on March 8, 2018 at 11:56am — 3 Comments

ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||

ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको

ये लहरें ही तुम्हारी चिठ्ठियाँ दे जाएँगी मुझको

लिखे थे जो दरख्तों पर अभी तक नाम हैं कायम 

ख़बर ये भी कभी पुरवाईयाँ दे जाएँगी मुझको

कभी तो बात मेरी मान जाया कर दिले-नादां

तेरी नादानियाँ दुश्वारियाँ दे जाएँगी मुझको

बिछुड़ जाने का डर मुझको नहीं डर है तो ये डर है 

न जाने क्या न क्या रुस्वाईयां दे जाएँगी मुझको

तुम्हीं को भूल जाऊं मैं अजी ये हो नहीं सकता 

तुम्हारी यादें आकर हिचकियाँ दे जाएँगी…

Continue

Posted on March 8, 2018 at 11:51am — 12 Comments

ग़ज़ल- सारथी || दोस्त कोई न मेह्रबाँ कोई ||

दोस्त कोई न मेह्रबाँ  कोई 

काश मिल जाए राज़दाँ कोई  /१

दिल की हालत कुछ आज ऐसी है 

जैसे लूट जाए कारवाँ कोई  /२ 

एक ही बार इश्क़ होता है 

रोज होता नहीं जवाँ कोई  /३  

तुम को वो सल्तनत मुबारक हो 

जिसकी धरती न आसमाँ कोई   /४ 

सारथी कह सके जिसे अपना 

सारथी के सिवा कहाँ कोई /५ 

...........................................
सर्वथा मौलिक व अप्रकाशित

अरकान: २१२२ १२१२ २२ 

Posted on December 14, 2015 at 3:14pm — 9 Comments

ग़ज़ल- सारथी || तलाशी ले रहीं आँखें हमारी ||

तलाशी ले रहीं आँखें हमारी 

न आँखें रोक दें साँसें हमारी  /१

गुजर तो जाता है दिन जैसे तैसे 

मगर कटती नहीं रातें हमारी /२ 

न जाने लग रहा है बारहा क्यूँ 

उन्हें मालूम हैं बातें हमारी  /३  

जो कहना है सो कह दो कौन जाने 

दुबारा हों मुलाकातें हमारी  /४ 

अगर तुम जा रहे हो याद रखना 

कि पल पल तरसेंगी बाँहें हमारी  /५ 

...........................................
सर्वथा मौलिक व अप्रकाशित

अरकान: १२२२ १२२२ १२२ 

Posted on December 14, 2015 at 3:00pm — 5 Comments

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