For any Query/Feedback/Suggestion relating to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गनेश जी "बागी")

Rakesh gupta's Friends

  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"
  • AK Rajput
  • mohinichordia
  • Shashi Mehra
  • alpana bhattacharya
  • Shyam Bihari Shyamal
  • vishnukantmisra
  • mayur garg
  • Rajesh Sharma राजेश शर्मा
  • कमल वर्मा "गुरु जी"
  • अर्श
  • गौतम राजरिशी
  • R. K. PANDEY "RAJ"
  • jaspal
  • Ambarish Srivastava

rakesh gupta's Discussions

मुंबई बम धमाकों पर विशेष : आखिर कब तक ?

Started this discussion. Last reply by shalini kaushik Jul 17, 2011. 12 Replies

मुंबई धमाकों में 15 की मौत, 110 घायल…Continue

अब क्या होना चाहिए हमारा अगला कदम ?

Started this discussion. Last reply by Tapan Dubey Jun 6, 2011. 3 Replies

वन्दे मातरम बंधुओं,निहायत ही नीचता की हद पार कर गई है कांग्रेस सरकार. यह साबित करने के लिए काफी है की सरकार खुद भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और भ्रष्टाचार पर कोई भी कार्यवाही करने की बात केवल जनता और…Continue

आखिर कब तक होता रहेगा हिन्दू देवी देवताओं हिन्दू आस्थाओं का अपमान ???

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 17, 2011. 6 Replies

वन्दे मातरम दोस्तों,आखिर कब तक होता रहेगा हिन्दू देवी देवताओं हिन्दू आस्थाओं का अपमान ???रमेश पब्लिशिंग हाउस अपनी पापुलर मास्टर गाइड राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय प्रवेश परीक्षा वर्ग 6 नामक पुस्तक के…Continue

बड़ा सवाल ये है कि आखिर कब मुजरिमों के दिल में क़ानून का डर पैदा होगा ?

Started this discussion. Last reply by rakesh gupta Jan 30, 2011. 4 Replies

वन्दे मातरम बंधुओं, 25 जनवरी को जबकि पूरा देश गणतन्त्र दिवस की खुशियों को मनाने के लिए व्यस्त था तब मालेगांव में एक ईमानदार जज को तेल माफियाओं ने जिन्दा जलाकर मार दिया, आज प्रशासन, नेता व गुंडा…Continue

 

rakesh gupta's Page

Latest Activity

UMASHANKER MISHRA commented on rakesh gupta's blog post ये कैसी आग है लगी, जल रही है जिन्दगी,
"करारा व्यंग नहीं, करारा तमाचा भरी रचना सत्ता का स्वाद चखा, खून मुंह को लगा, संसद में घूमते, नरभक्षी बदमाश से................आपकी हिम्मत को दाद रचना बहुत खूब है"
22 hours ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"ठीक है आदरणीय बागी जी आपकी बात आत्मसात करने का प्रयास जरूर करूंगा सादर"
yesterday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम आदरणीय, "लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नहीं" आदरणीय गजल का कोई खास ज्ञान मुझे नही है, ये मैं हर बार मानता हूँ, मगर मुझे लगा यहाँ "दीवार हम नहीं" में काफिया आर है, शायद सादर"
yesterday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम दोस्तों, दिल से क्षमा प्रार्थी हूँ की मैं आप में से किसी की भी गजल पर कोई टिप्पणी नही कर पाया हूँ, मेरी व्यस्तता को ध्यान रखते हुए आशा है आप मुझे माफ़ कर देंगे सादर"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम दुष्यंत जी हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम अरुण निगम जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम वीनस जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
""वन्दे मातरम अविनाश जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार""
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम आदरणीय बागी जी, सच ही तो है इंसान सूली पर एक ही बार चढ़ता है मगर मैं और आप रोजाना ही किसी ना किसी सूली पर चढाये जा रहे हैं, कभी धर्म या जाति के नाम पर, कभी महंगाई के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर तो कभी रंग, क्षेत्र , नारी और नर के भेद को…"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम दुष्यंत जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार हूँ सादर"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम अरुण भाई जी, चाहता तो बहुत हूँ की कट्टरवादियों को कहीं गहराई में दफना दूं मगर .......... बहरहाल हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार हूँ सादर"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम अरुण निगम जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार हूँ सादर"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम विन्स भाई जी, शिल्पगत कमियों का एहसास तो मुझे हर बार होता है, उन्हें दूर भी करने का प्रयास भी करना चाहता हूँ, मगर समय की कमी मुझे इतना वक्त नही दे पा रही है की में गुनीजनो की संगत में जाकर मेहनत कर सकूं, मेरी कमियों को नजर अंदाज करके…"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम राजेश कुमारी जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम अविनाश जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Tuesday
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"वन्दे मातरम आदरणीय धर्मेन्द्र जी, हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Monday

Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
dehli
Profession
ngo worker
About me
एक सीधा सादा मगर धुन का पक्का, सभी को प्रेम करने वाला इन्सान

rakesh gupta's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

Rakesh gupta's Blog

ये कैसी आग है लगी, जल रही है जिन्दगी,

Posted on May 26, 2012 at 8:32pm 7 Comments

वन्दे मातरम दोस्तों



ये कैसी आग है लगी, जल रही है जिन्दगी,

भूख से प्यास से, अपने ही विश्वास से...............



खो गया है आदमी , रो रहा है आदमी,

चाह कर भी छुटकारा, नही अपनी लाश से.............



खादी को पहन कर, पड़े पत्थर ज़हन पर,

कल के मवाली, आज आदमी हुए खास से...............



सत्ता का स्वाद चखा, खून मुंह को लगा,

संसद में घूमते, नरभक्षी बदमाश से................



कोई भी सरकार हो, मंहगाई की मार हो,…

Continue

जाति, भाषा, मजहब की, शहर में आग लगाते हैं.........

Posted on December 24, 2011 at 9:26pm 5 Comments

वन्दे मातरम दोस्तों,



चली चुनावी हवा, जनता को मूर्ख बनाते हैं,

चलो कुछ मानते नही, चलो कुछ भूल जाते हैं.........



जहर का कारोबार किया, माना की हमने अब तक,

शराब जाम में मिला, चलो अमृत बरसाते हैं...........



फूट का विष हमने बोया,अपना राज चलाने को,

दिखावे को ही सही, अमन के पेड़ लगाते हैं..........



मौत की मानिंद, सब कुछ बेहद सस्ता होगा,

अब की भूख से नही मरोगे, गरीबों को बतलाते है...........



हमसे गर कुछ गलत हुआ, माफ़ी…

Continue

*****होड़ लगी एक बार गधो में*****

Posted on December 24, 2011 at 8:00pm 4 Comments

वन्दे मातरम दोस्तों,



होड़ लगी एक बार,

गधो में सत्ता पाने की,

चुनाव जीत बाकायदा,

संसद जाने की.........



आपस में कर बैठकें,

चुना गया प्रत्याशी एक,

काम चोर, महा आलसी,

हर तरह से सत्यानाशी एक........



बहुमत से तब मिल जुल कर,

एजेंडा एक पास हुआ,

जनता हमसे बड़ी गधी है,

जीतेंगे विश्वाश हुआ .............



चुनाव में जनता ने देखे,

गधे एक से एक बड़े,

एक मगर चुनना था जरूरी,

जितने थे चुनाव…

Continue

कह मुकरियाँ

Posted on October 22, 2011 at 7:41pm 14 Comments

वन्दे मातरम बंधुओं,



मेरी कोख से जन्म लिया जिन,

सीना मेरा छलनी किया तिन,

निज औकत का नही है भान,

क्यों सखी बेटा? नही सखी पकिस्तान !!1!!



मैंने ही जिसको है बनाया,

सुख यश और सम्मान दिलाया,

मेरे ही दम से जो दमदार,

क्यों सखी साजन? नही सखी सरकार !!2!!



वो करता हमपे वार पे वार,

फिर भी हम करते सत्कार,

आसमान पर जिसके भाव,

क्यों सखी दामाद? नही सखी कसाब !!3!!



जीवन भर जो मांगे खाए,

मांगने ही जो दर पे आये,

सदा…

Continue

Comment Wall (15 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:16pm on October 2, 2011, Ganesh Jee "Bagi" said…

At 10:16pm on September 7, 2011, mohinichordia said…

 आपकी कविताओं में देशभक्ति  का जज्बा हे  

At 6:51pm on February 16, 2011, ratnesh said…

prabhu ji rachna aap ki hain mia to aap ki rachchna ko apne paper main ek stahan de kar aapne aap ko danya  samjhunga 

aap ek bar hamara news paper jaroor dekh lan  jiska link mai aapko de raha hoon

www.hamarametro.com 

At 12:59am on February 8, 2011, प्रमोद वाजपेयी said…
स्वागत है आपका राकेशजी ....
At 10:06pm on December 17, 2010, Nemichand Puniya said…

sir, I am much obelijed to u . many thanks

At 11:24pm on December 9, 2010, Lata R.Ojha said…
धन्यवाद राकेश जी :)
At 8:16pm on October 30, 2010, Admin said…
राकेश जी, एडमिन टीम का सदैव यह प्रयास रहता है कि हम आप सबको शिकायत का मौका ना दे | आप से निवेदन है कि आप इन सब बातों को ध्यान मे ना ले, आइये हम सब मिलकर साहित्य और ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार दोनों को समृद्ध करे |
At 8:16pm on October 30, 2010, Admin said…
आदरणीय राकेश जी,
सादर अभिवादन,
मैं आप के सभी प्रश्नों का उत्तर सिलसिलेवार दे रहा हूँ ................
आप ने कहा कि "एक फनकार के लिए उसकी कला को मिली प्रशंसा उसका सम्मान सबसे बड़ी पूँजी होती है"
राकेश जी सोलह आने सत्य, OBO एक परिवार है और परिवार के मंच पर आये सभी कृतियों पर प्रसंशा अथवा आलोचना परिवार के सदस्यों को ही करनी है, परिवार के बाहर के लोग आपकी कृतियों को पढ़ तो सकते है पर टिप्पणी नहीं दे सकते, अतः हम सबकी यह अपेक्षा रहती है कि सभी सदस्य एक दुसरे की रचनाओं पर अवश्य टिप्पणी दे, ताकि OBO का उद्देश्य पूरा हो |
आपने कहा "आपके मंच पर मुझे लगता है की केवल चंद लोगों को ही आपके द्वारा फीचर होने का अधिकार दिया गया है, या फिर ये है की अन्य रचनाये निम्न कोटि की हैं जो उन्हें फीचर नही किया जाता है"
राकेश जी ऐसी बात नहीं है, सबसे पहले तो मैं यह बता दूँ कि OBO मेरा मंच नहीं है बल्कि यह हम सबका है, मैं भी केवल सेवा भाव से ही OBO से जुड़ा हूँ , OBO एक नॉन प्रोफिट साईट है, उल्टे इसके संचालन मे प्रति महीने US डोलर मे भुगतान करना होता है, अतः हम सब को सेवा भाव से ही OBO को प्रगति पथ पर चलते देना है, जिसमे आपकी भी सहयोग कि जरूरत है |
OBO पर किसी को विशेष की दर्जा नहीं मिला हुआ है, सभी की रचनाओं को एक समान रूप से देखा जाता है, किसी रचना को फीचर करने का अधिकार OBO के प्रधान संपादक को है जो अपने विवेक के अनुसार समय समय पर करते है | आप की पहले आई रचना को भी फीचर किया जा चूका है |
आपने कहा "यदि मैं एक निम्न कोटि का रचनाकार हूँ तो सम्भवत इतने उत्क्रष्ट ग्रुप मैं बने रहने का मुझे कोई अधिकार नही है, या फिर आपको चाहिए की आप मुझे बताये की मेरी रचनाये मोलिक नही है, चोरी की है या फिर फीचर होने लायक क्यों नही हैं ?"
OBO साहित्यकारों का एक साझा मंच है जो सभी के लिये ओपन है, OBO परिवार के सभी साहित्यकार हमारे नजर मे उत्क्रष्ट ही है, OBO को आज यदि आप सब उत्क्रष्ट मानते है तो इसे उत्क्रष्ट आप के द्वारा बनाया गया है | जो रचनायें फीचर नहीं होती उसका यह अर्थ नहीं है कि वो मौलिक नहीं है, चोरी की है | किन्तु हम सभी रचनाओं को फीचर तो नहीं कर सकते ना |
At 10:20pm on October 25, 2010, कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said…
HELLO..RAKESH JI SWAGAT HAI...
At 3:39pm on October 21, 2010, Admin said…
आदरणीय राकेश जी,
सादर अभिवादन,
कोई भी ब्लॉग अनुमोदन तथा feature होने के उपरांत मुख्य पृष्ठ पर आता है, अनुमोदन और feature करने का विशेषाधिकार ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रधान संपादक के पास सुरक्षित है |
अधिक जानकारी नीचे दिये लिंक पर भी देखी जा सकती है ........
http://www.openbooksonline.com/page/notice-1

साथ ही निवेदन है कि यदि ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रगति के सम्बन्ध मे कोई सुझाव हो तो अवश्य दीजियेगा |
धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिककर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करेऔर फिर रन करा दे |

4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँक्लिक करे |

Latest Activity

UMASHANKER MISHRA commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
"बहेतरीन  प्रस्तुति- बेहतरीन कार्टून के साथ कटु सत्य, साथ शिक्षाप्रद बधाई .."
6 minutes ago
MAHIMA SHREE commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
"ज़र्दा चबा चबा के मुँह को सन्त कर दिया अब स्वाद और मसालों की पसन्दगी गई अलबेलाजी दिन रात खोहों…"
12 minutes ago
Saurabh Pandey commented on arunendra mishra's blog post जीवन तुझसे एक वर माँगू
"भाई अरुणेंद्र जी, आपकी वैचारिकता सनातन पारंपरिक सोच का परावर्तन है. रचना पाठक का ध्यान खींचने में…"
13 minutes ago
MAHIMA SHREE commented on MAHIMA SHREE's blog post दो कवितायेँ किसान भाईयों के लिए
"ओह तब तो आपकी प्रतिक्रिया बहुत मायने रखती है ... अपने जिए गए अनुभव से कुछ आप भी लिखिए अरुण जी…"
17 minutes ago
Albela Khatri commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
"अरुण जी, कम नहीं तो ग़म नहीं..............हा हा हा प्यार बनाए रखिये........"
23 minutes ago
Arun Srivastava commented on MAHIMA SHREE's blog post दो कवितायेँ किसान भाईयों के लिए
"आपका प्रयास सफल रहा महिमा जी ! मैं खुद भी किसान परिवार से हूँ ! हर दर्द को महसूस किया है मैंने उसे…"
30 minutes ago
MAHIMA SHREE commented on MAHIMA SHREE's blog post दो कवितायेँ किसान भाईयों के लिए
"पसंद करने के लिए धन्यवाद हिमांशु पटेल जी"
33 minutes ago
MAHIMA SHREE commented on MAHIMA SHREE's blog post दो कवितायेँ किसान भाईयों के लिए
"अरुण जी नमस्कार , आपकी प्रतिक्रिया का इन्तजार रहता है /…"
35 minutes ago
Arun Srivastava commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
"वाह खत्री सर गजल तो गज़ल प्रतिक्रिया भी कम नही है ! :-)) :-))"
36 minutes ago
Albela Khatri commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
"खत्री ने तो कही सो कही ...पर आपने भी  ख़ूब  दाद दी.....इस सराहना के लिए लाख लाख …"
45 minutes ago
Albela Khatri commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
"आदरणीय अरुण श्रीवास्तव जी, आपने वास्तव में  मुझे बल दे दिया है इतनी बड़ी बात कह कर..........आशा…"
49 minutes ago
Albela Khatri posted a photo

Albela Khatris book in San Jose CL

लेउवा पाटीदार समाज ऑफ़ यू.एस.ए. द्वारा केलिफोर्निया के सेन होज़े में आयोजित मेगा कन्वेंशन में…
53 minutes ago

© 2012   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service