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peeyush kumar
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peeyush kumar commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आदरणीय मो•आरिफ जी  नमस्कार आप ने रचना पसंद की,हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद। मैं और भी रचनाओं में यह प्रयास जारी रखाने की कोशिश करूंगा। आभार"
Jan 8
peeyush kumar commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आदरणीय मोहित मिश्रा जी नमस्कार आप ने रचना पसंद की,हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद।"
Jan 8
peeyush kumar commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आदरणीय समर कबीर जी प्रणाम आप ने रचना पसंद की,हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद।"
Jan 8
peeyush kumar commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आदरणीय सुरेंद्र जी प्रणाम आप के प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद,आगली रचना में उर्दू शब्दों का अर्थ अवश्य लिखदेंगे। आप का आभार"
Jan 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आद0 पीयूष जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना पर दिल खोल कर बधाई। कुछ कठिन उर्दू शब्दो के अर्थ भी लिख दें,तो रचना समझने में और आसानी हो। इस उत्तम प्रस्तुति पर कोटिश बधाइयाँ। सादर"
Jan 8
Samar kabeer commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"जनाब पीयूष जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 7
Mohit mishra (mukt) commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आदरणीय पियूष जी बेहतरीन रचना के लिए बधाई"
Jan 7
Mohammed Arif commented on peeyush kumar's blog post शान-ए-अवध
"आदरणीय पीयूष जी आदाब,                             शान-ए-अवध का बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया आपने । आज पूरे मुल्क में हवा ही कुछ ऐसी चल रही है जो हमारी तहजीब को ख़त्म करने पर…"
Jan 7
peeyush kumar posted a blog post

शान-ए-अवध

जल रहे चिराग हैं, जिंदा यहां तख़्त-ओ-ताज है बह रही गोमती, रोशन यहां के घाट हैं यह लखनऊ की धरतीयह लखनऊ की शाम हैतहजीब यहां अब्दो आब है,खिलते हर दिल में ख्वाब हैं दुश्मन को भी कहते आप हैं,दोस्त भी अमें यार हैं गंज की शाम है, बागों में भी बाग हैंयह लखनऊ की धरतीलखनऊ की शाम है।रूमी दरवाजा वो शान है, आज भी तहजीब उसकी आन है ।इमामबाड़ा हिंदू मुस्लिम एकता की पहचान है बेगम की कोठी में जलते चिरो चिराग,नक्खास पर सजती बाजार है,बादरी की अपनी ही पहचान है ,ये अवध की धरती है,ये अवध की शाम है।आरजू आराइश है, आलिम…See More
Jan 7
peeyush kumar updated their profile
Jan 5
peeyush kumar is now a member of Open Books Online
Jan 4

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Male
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उत्‍तर प्रदेश
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Fatehpur
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Engineer
About me
"i m as,as u want to see" / Find me on Facebook,Twitter and Instagram@peeyush umarav /And my FB page is #"one letter"

Peeyush kumar's Blog

शान-ए-अवध

जल रहे चिराग हैं, जिंदा यहां तख़्त-ओ-ताज है

बह रही गोमती, रोशन यहां के घाट हैं

यह लखनऊ की धरती

यह लखनऊ की शाम है

तहजीब यहां अब्दो आब है,खिलते हर दिल में ख्वाब हैं

दुश्मन को भी कहते आप हैं,दोस्त भी अमें यार हैं

गंज की शाम है, बागों में भी बाग हैं

यह लखनऊ की धरती

लखनऊ की शाम है।

रूमी दरवाजा वो शान है, आज भी तहजीब उसकी आन है ।

इमामबाड़ा हिंदू मुस्लिम एकता की पहचान है

बेगम की कोठी में जलते चिरो चिराग,नक्खास पर सजती बाजार…

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Posted on January 6, 2018 at 9:51pm — 8 Comments

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"मोहतरमा मंजीत कौर जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ और समय चाहती है,इस प्रस्तुति पर बधाई…"
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