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कवि - राज बुन्दॆली
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Samar kabeer commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत (लावणी व कुकुभ मिश्रित)
"जनाव डॉ.राज़ बुन्देली जी आदाब,बढ़िया लगा आपका गीत,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत (लावणी व कुकुभ मिश्रित)
"आद0 राजा बुंदेली जी सादर अभिवादन, प्रातःकालीन बहुत ही खूबसूरत सा गीत आपके माध्यम से पढ़ने को मिला, इस प्रस्तूति पर बधाई निवेदित है।"
Jan 18

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत (लावणी व कुकुभ मिश्रित)
"आदरणीय राज बुन्देली जी, प्रभात-बेला पर बहुत अच्छा गीत लिखा है आपने. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. सादर "
Jan 18
कवि - राज बुन्दॆली posted a blog post

गीत (लावणी व कुकुभ मिश्रित)

आधार छन्द : 16+14 लावणी व कुकुभ मिश्रित,, कोयल कुहुकी मैना बोली,भौंरे गूँजे भोर हुई ।। आँख चुराये चन्दा भागा,रैन बिचारी चोर हुई ।। कोयल कुहुकी,,,, पूरब में ज्यों लाली निकली,सजा आरती धरा खड़ी, उत्तुंग हिमालय पर लगता,कंचन की हो रही झड़ी, बर्फ लजाकर लगी पिघलने,हिमनद रस की पोर हुई ।।(1) कोयल कुहकी मैना बोली,भौंरे,,,, सात अश्व के रथ पर चढ़कर,आ गए दिवाकर द्वारे, स्वागत में मुस्काई कलियाँ,भँवरों नें मन्त्र उचारे, सूर्यमुखी को देख कुमुदनी,मानो आज चकोर हुई ।।(2) कोयल कुहकी मैना बोली,भौंरे,,,, बाँह…See More
Jan 18
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post ग़ज़ल,,
"आदरणीय,,,, गिरिराज भंडारी जी बहुत बहुत धन्यवाद,,,,,"
Jan 17
बृजेश नीरज commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत,,,,,,
"वाह आदरणीय विरोधाभासों का भरपूर प्रयोग किया है आपने. विरोधाभासी कथ्य रचना का आकर्षण बढाते हैं बशर्ते उनमें सार्थकता हो. आख़िरी बंद की पहली दो पंक्तियों के अंत में 'सुनकर' शब्द के प्रयोग का उद्देश्य मुझे स्पष्ट न हो सका. कृपया मार्गदर्शन…"
Jan 16

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत,,,,,,
"आदरणीय राज बुन्देली जी, आपने बहुत सुन्दर गीत लिखा है. इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई. गीत का मुखड़ा बहुत आकर्षक है. पहला अन्तरा भी भाव स्तर पर प्रभावकारी है. पहला बंद पढ़ते हुए एक विचार आया कि सूर्य तो तप्त ही होता है. यही उसकी प्रकृति है. सूर्य कभी…"
Jan 16

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत,,,,,,
"आदरनीय राज भाई , बढ़िया गीत रचा है आपने हार्दिक , बधाइयाँ ।"
Jan 16
Samar kabeer commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत,,,,,,
"जनाब डॉ.राज़ बुन्देली जी आदाब,अच्छा लगा आपका गीत,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 16
Mohammed Arif commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत,,,,,,
"आदरणीय राज बुंदेलीजी, सुंदर गीत के लिए बधाई ।"
Jan 15

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post ग़ज़ल,,
"आदरणीय राज भाई , खूबसूरत ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।"
Jan 15
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post गीत,,,,,,
"आदरणीय़,,,, राम सहाय जी सादर आभार,,,,,,,"
Jan 14
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post ग़ज़ल,,
"आदरणीय,,,, Tasdiq Ahmed Khan जी बहुत बहुत धन्यवाद,,,,,"
Jan 14
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post ग़ज़ल,,
"आदरणीय Tasdiq Ahmed Khan जी सादर आभार,,,,"
Jan 14
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post ग़ज़ल,,
"आदरणीय,,, मिथिलेश वामनकर जी बहुत बहुत आभार,,,,इस स्नेहाशीष हेतु,,,,,"
Jan 14
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post ग़ज़ल,,
"आदरणीय,,,, Samar kabeer जी सादर आभार,,,,इस स्नेहाशीष हेतु,,,,,"
Jan 14

Profile Information

Gender
Male
City State
mumbai (india)
Native Place
panna (m.p.)
Profession
कवि / चिकित्सक
About me
i am hindi poet

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कवि - राज बुन्दॆली's Blog

गीत (लावणी व कुकुभ मिश्रित)

आधार छन्द : 16+14 लावणी व कुकुभ मिश्रित,,



कोयल कुहुकी मैना बोली,भौंरे गूँजे भोर हुई ।।

आँख चुराये चन्दा भागा,रैन बिचारी चोर हुई ।।

कोयल कुहुकी,,,,



पूरब में ज्यों लाली निकली,सजा आरती धरा खड़ी,

उत्तुंग हिमालय पर लगता,कंचन की हो रही झड़ी,

बर्फ लजाकर लगी पिघलने,हिमनद रस की पोर हुई ।।(1)

कोयल कुहकी मैना बोली,भौंरे,,,,



सात अश्व के रथ पर चढ़कर,आ गए दिवाकर द्वारे,

स्वागत में मुस्काई कलियाँ,भँवरों नें मन्त्र उचारे,

सूर्यमुखी को देख…

Continue

Posted on January 18, 2017 at 12:00am — 4 Comments

गीत,,,,,,

२१२२  २१२२  २१२२  २१२२

**************************



गुनगुनाकर देखिएगा आप भी यह गीत मेरा ।।

दोपहर की धूप में आभास होगा नव सवेरा ।।

गुनगुनाकर देखिएगा,,,,,,,



तप्त सूरज शीश पर जब अग्नि वर्षा कर रहा हो,

ऊष्णता के हृदविदारक तीर तरकस भर रहा हो,

तब प्रभाती गीत की तुम छाँव में करना बसेरा ।।(1)

दोपहर की धूप में,,,,,,,,,,,,,

गुनगुनाकर देखिएगा,,,,,,,



कोकिला के कण्ठ से माँ भारती का गान सुनना,

व्योम में प्रतिध्वनित होती सप्त सरगम…

Continue

Posted on January 13, 2017 at 7:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल,,

वज़्न : 1222 1222 1222 1222

मिलेंगी कुर्सियाँ लेकिन सियासी फ़न ज़रूरी है ।।

जुटाना है अगर बहुमत लचीलापन ज़रूरी है ।।(1)



कई पतझड़ यहाँ आके गये अफ़सोस मत करिये,

बहारों के लिए हर साल में सावन ज़रूरी है ।।(2)



हवाओं नें कसम खा ली जले दीपक बुझाने की,

उजाला ग़र बचाना है खुला दामन ज़रूरी है ।।(3)



वफ़ा की बात करते हो मियाँ इस दौर में तुम भी,

जहाँ शतरंज की बाज़ी बिछी हो धन ज़रूरी है ।।(4)



अगर कोई कहे तुमसे बताओ प्यार के मानी,…

Continue

Posted on January 11, 2017 at 11:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल,,,,

Posted on December 22, 2016 at 10:30pm — 8 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 4:44pm on December 5, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय कवि - राज बुन्दॆली जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:05am on April 6, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० बुन्देली जी

आपकी मित्रता मेरे लिए गौरव का विषय  है . मेरा मोबा . नं  9795518586  है . सादर .

At 8:28pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

        

          आदरणीय राज बुन्देली जी  बहुत बहुत धन्यवाद . मेरा हौसला बढाने के लिये  शुक्रिया .

At 1:29pm on December 19, 2012, sanjiv verma 'salil' said…

फ़िर भी क्या उसकॊ नाज़ है,खुदा जानॆ

नाज क्या है? के स्थान पर किस पर है? अधिक सटीक होगा.

रचना विडम्बनाओं और विसंगतियों को उद्घाटित करती है.

At 3:28pm on February 7, 2012, DEEPAK SHARMA 'KULUVI' said…

WAH JI WAH SUNDAR RACHNAYEN

At 10:23am on January 25, 2012, Admin said…

आदरणीय राज बुन्देली जी

पूर्व में आपके कमेंट्स बॉक्स पर ओ बी ओ नियमो का हवाला देते हुए पूर्व प्रकाशित रचनाओं को ओ बी ओ पर पोस्ट करने से मना किया गया था, किन्तु फिर भी लगातार पूर्व प्रकाशित रचनाएँ ओ बी ओ पर अनुमोदन हेतु आपके द्वारा पोस्ट किया जा रहा है |

ऐसा लग रहा है कि ओ बी ओ नियमों का पालन करने में आपकी रूचि नहीं है, आपसे पुनः नम्र निवेदन है कि ओ बी ओ नियमों का पालन करते हुए किसी भी वेब साईट / ब्लॉग स्पोट आदि पर पूर्व प्रकाशित रचनाओं को ओ बी ओ पर प्रकाशन हेतु न भेजे, यहाँ केवल अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार कि जाती है | कृपया सहयोग करे |

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 6:26pm on January 12, 2012, Admin said…

प्रिय सदस्य

आपकी रचना अनुमोदन हेतु प्राप्त है, किन्तु यह रचना पूर्व प्रकाशित होने के कारण अनुमोदित नहीं किया जा सकता, ओपन बुक्स ऑनलाइन के नियमानुसार केवल अप्रकाशित रचनाओं का ही अनुमोदन किया जाता है, अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर ओ बी ओ नियम देखे |

http://www.openbooksonline.com/page/5170231:Page:12658


आपका

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:47am on February 6, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी,

आपकी कविता को महीने का सर्वश्रेस्थ ब्लॉग चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई.....आशा है आयेज भी आपकी रचनाएँ ऐसे ही पढ़ने को मिलती रहेंगी....

 

आपका

प्रीतम तिवारी(प्रीत)

 

At 11:35am on February 6, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी,

प्रणाम !
आपकी कविता  को महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग (Best Blog of the Month) चुने जाने पर बधाई स्वीकार करे, उम्मीद है कि आगे भी आप कि रचनायें और अन्य रचनाओं पर आपकी बहुमूल्य टिप्पणियाँ पढ़ने को मिलती रहेगी,
आपका
गनेश जी "बागी"

At 11:15am on February 6, 2011, Admin said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी ,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की कविता "श्रृँगार नहीं अंगार लिखूंगा" को महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग (Best Blog of the Month) के रूप मे सम्मानित किया गया है तथा ओपन बुक्स ऑनलाइन के मुख्य पृष्ठ पर आपके छाया चित्र के साथ स्थान दिया गया है,
इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे,धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO

 
 
 

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