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dandpani nahak
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी नमस्कार ! बहुत बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला  ग़ज़ल तक आये, सराहा और मेरी हौसलाअफ़ज़ाई की !आपका बहुत बहुत आभार  मतले में ऐब ए तनाफ़ुर का दोष तो है सुधारने की कोशिश करता हुँ !बस डर है कहीं कमी न रह जाय "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"बहुत शुक्रिया भाई अजय गुप्ता जी आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आये होसलाअफज़ाई की !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीया राजेश कुमारी दी प्रणाम ! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अजय गुप्ता जी नमस्कार ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय आशीष यादव जी नमस्कार ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! चौथा शैर बहुत पसंद आया ! बहुत बहुत बधाई "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय सरफ़राज़ कुशालगढ़ी जी आदाब ! बेहतरीन ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें 'ये अब्र कह रहा है न बारिश करूँ अगर  दरिया को लुत्फ़ कैसे रवानी में आएगा ' वाह ! बहुत खूब ! बधाई आपको "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत ' जी नमस्कार ! बहुत अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें  चौथा शैर मुझे खास पसंद आया !वाह बहुत खूब ! बधाई आपको "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्ते ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  दूसरा शैर खास तौर पे बहुत पसंद आया ! बहुत बहुत बधाई "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय मो.  अनीस अरमान जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  छठा शैर खास पसंद आया ! बहुत बधाई "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब आदाब ! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला क्या खूब ! दूसरा,  तीसरा, चौथा, पाँचवा वाह  सभी शैर लाज़वाब ! बहुत बधाई हो !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय मुनीश 'तन्हा' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  दूसरा शैर बहुत पसंद आया ! बहुत बधाई "
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर ' जी आदाब ! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  मतला बहुत खूब हुआ है !और दूसरा शैर वाह क्या कहने ! सभी शैर बेहतरीन ! बहुत बहुत बधाई !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी प्रणाम ! बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  मतला क्या खूब हुआ है ! दूसरा और पाँचवा शैर खास तौर पर बहुत पसंद आया! सभी शैर  अपने आप में लाज़वाब ! वाह ! बहुत बहुत बधाई !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय शिज्जु "शकूर " जी आदाब ! बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें  'अब लगता है हमें, कि अबस ही बड़े हुए  तब सोचते थे लुत्फ़ जवानी में आएगा ' वाह !बहुत खूब ! सभी शैर लाज़वाब ! बहुत बहुत बधाई !"
Aug 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय डिम्पल शर्मा जी नमस्ते ! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें सभी शैर बहुत अच्छे हुए हैं  बहुत बहुत बधाई !"
Aug 29

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

ग़ज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
अगर सच भी जो बोलता हो

रहे गुण सभी आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता तो अच्छा
नहीं जानता क्या बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही बस दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 18, 2019 at 11:30am — 4 Comments

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At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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