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dandpani nahak
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dandpani nahak left a comment for Er. Ganesh Jee "Bagi"
"आदरणीय गणेश जी 'बागी' जी आदाब और बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ आपने समय दिया"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"ग़ज़ल 1212 1122 1212 22 जुनूँ गज़ब का मगर ये अज़ब कहानी है तलाश जारी है क्या चाँद में भी पानी है इधर क्या सूख गया सब ये नीर आँखों का उधर क्यूँ हमको सुनो दाँव आजमानी है मेरे बयान पे कहता है चाँद खुद भी ये हुज़ूर ये तो सरासर गलतबयानी है ये छत पे रोज…"
Saturday
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम ! जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं आपको! आप हमेशा स्वस्थ रहें आनन्द से रहें ,और सक्रीय रहे यही ऊपरवाले से दुआ करता हूँ! आपके मार्गदर्शन के लिए ह्रदय से आभारी हूँ ! मतला और मक़्ता छोड़ बाकि ठीक करने की कोशिश करता हूँ!"
Sep 8
Samar kabeer commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, मतला ठीक है,दूसरे और तीसरे शैर में क़ाफ़िया काम नहीं कर रहा है । 4थे शैर के सानी में शिल्प कमज़ोर है । मक़्ता ठीक है । इस प्रस्तुति पर बधाई ।"
Sep 7
dandpani nahak posted a blog post

ग़ज़ल 2122 1212 22

मर भले जाना पर नहीं देनातुम कभी आयकर नहीं देनाखुद से हम सब का बस ये वादा होमुल्क अब बेहतर नहीं देनाराह हम ने भली चुनी है येसब को एक सा अवसर नहीं देनाहैं सवा सौ करोड़ हम हर करदे सके हैं मगर नहीं देनायाद रखना कभी भी तुम 'नाहक'मशवरा कारगर नहीं देनादण्डपाणि नाहकमौलिक एवम् अप्रकाशितSee More
Sep 3
dandpani nahak left a comment for TEJ VEER SINGH
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी नमस्कार ! बहुत धन्यवाद् आपका आपने समय निकाला मेरी पहली ही लघुकथा के लिए और मेरा हौसला बढ़ाया आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ"
Aug 31
dandpani nahak left a comment for विनय कुमार
"आदरणीय विनय कुमार जी नमस्कार! बहुत बहुत धन्यवाद् आपने अपना अमूल्य समय निकाला और मेरी कोशिश को सराहा | आपने सही कहा की रचना अधूरी है और शीर्षकवीहीन भी | हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गयी है इसीलिए मैं रचना का आखिरी शब्द ' थे' भूल गया और शीर्षक तो…"
Aug 31
dandpani nahak left a comment for Dr. Vijai Shanker
"आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी प्रणाम! बहुत बहुत शुक्रिया आपको मेरी प्रथम लघुकथा अच्छी लगी आपने अपना अमूल्य समय निकाला और जो हौसला बढ़ाया उसका ह्रदय से आभार आपका स्नेहभाव सदा यूँ ही बना रहे!"
Aug 31
dandpani nahak left a comment for अजय गुप्ता
"बहुत बहुत धन्यवाद् भाई साहब अजय गुप्ता जी समय निकाल कर आपने जो मेरा हौसला बढ़ाया है बहुत शुक्रगुज़ार हूँ"
Aug 31
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब बहुत धन्यवाद! मेरी पहली लघुकथा है इसलिए हड़बड़ी में आखरी शब्द ' थे' लिखना छूट गया ! आपके कहे अनुसार फिर से पोस्ट करने की कोशिश करता हूँ"
Aug 31
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"महानगर के व्यस्ततम सड़क पर सिर झुकाये कतारबद्ध,वे लगातार चले जा रहे थे|उनको भीड़ कहना नामुनासिब होगा,क्योंकि वे अनुशासित एक के पीछे एक चुपचाप चले जा रहे थे|सब मूक थे किसी से कोई कुछ नहीं बोल रहा था,हाँ अलबत्ता सबके गले पर एक-एक पट्टी लटकी हुई थी, और…"
Aug 31
dandpani nahak commented on Usha Awasthi's blog post कहें किससे व्यथा ?
"आदरणीया उषा अवस्थी जी प्रणाम, बहुत अच्छी रचना है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Aug 27
dandpani nahak left a comment for नादिर ख़ान
"आदरणीय नादिर खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफजाई का"
Aug 24
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया रचना भाटिया जी आदाब , बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Aug 24
dandpani nahak left a comment for rajesh kumari
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब , बहुत शुक्रिया समय देने के लिए और हौसला बढ़ाने के लिए"
Aug 24
dandpani nahak left a comment for Md. anis sheikh
"आदरणीय अनीस शैख़ जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया! दण्डपाणि नाहक"
Aug 24

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

मर भले जाना पर नहीं देना
तुम कभी आयकर नहीं देना

खुद से हम सब का बस ये वादा हो
मुल्क अब बेहतर नहीं देना

राह हम ने भली चुनी है ये
सब को एक सा अवसर नहीं देना

हैं सवा सौ करोड़ हम हर कर
दे सके हैं मगर नहीं देना

याद रखना कभी भी तुम 'नाहक'
मशवरा कारगर नहीं देना

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on September 2, 2019 at 1:42pm — 2 Comments

ग़ज़ल

किनारे हो चाहे कि मझधार पे हो
नज़र तो हमेशा ही पतवार पे हो

पड़ी हो अगर दिल के बीच में ये
इक सुराख़ भी जरूर दीवार पे हो

मैं भी तो नहीं चाहता था कभी यूँ
बहस ख़त्म हो भी तो तकरार पे हो

चलो तेज दोस्त चलो कोई बात न
लगाम भी मगर लाज़मी रफ़्तार पे हो

मैं कब चाहता हूँ भला ये फुलों की
कभी बारिश भी मेरे अश्आर पे हो

जुदा हैं अगर राह अपने तो 'नाहक'
क्यूँ एतराज़ उसके सरोकार पे हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on July 30, 2019 at 8:46pm — 3 Comments

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो

1222 1222 1222

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो
अगर ख्वाब हो तो फिर कैसे मुलाकात हो

क़यामत भले हो जाये उस के बाद अच्छा
किनारा झील का औ चांदनी रात हो

तभी तो मैं तुम्हारा हूँ कहूँ खुद को
मेरी आँखों से निकले तेरे ज़ज़्बात हो

फिरूँ हूँ मैं तलाश में तेरी ख्वाब मेरे
कभी तो रु ब रु कोई करामात हो

दुआओं में मांगू मैं यही हर पल
ख़ुशी हो पास तेरे और इफरात हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on July 16, 2019 at 10:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल 122 122 122

हमें क्यों किसी से गिला हो
जिसे भी जो चाहे मिला हो

लूटा सा पिटा सा दिखा था
न रहमत का ही काफिला हो

न जाने ये कब तक यूँ ही बस
जिंदगी तिरा सिलसिला हो

उसे क्या खबर हो जहाँ की
इश्क में किसी मुबतिला हो

कहें क्या अगर सुन के सच भी
गया जो वही तिलमिला हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on May 3, 2019 at 10:46am — 1 Comment

Comment Wall (5 comments)

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At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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