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dandpani nahak
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा हुआ है । हार्दिक बधाई । मेरे हिसाब से इसे इस प्रकार बाँधते तो और बेहतर हो सकता था २१२१/१२१२/१२इश्क़ से नहीं राब्ता कोईज़िन्दगी है कि हादसा कोईवो पुराने ज़माने की बात है शेष गुणीजनों के विचारों का…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आ दण्डपाणी जी, ग़ज़ल के प्रयास हेतु बधाई। कुछ जगह बह्र टूट रही है। एक टिप है कि सिर्फ मात्राएं गिनने की जगह रचना को लय और ताल पर गुनगुनाएं।  सादर"
12 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"बहुत उम्दा शे'र हुए है, आ. नाहक साहिब ,    "इश्क़ से ना हो राब्ता कोई"  यहा  "ना "  ज़ियादा  उचित  होगा की "न "  का  इस्तिमाल   रौशनी  डाले इस पर सादर |"
yesterday
dandpani nahak posted a blog post

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ से ना हो राब्ता कोईज़िन्दगी है की हादसा कोईवो पुराने ज़माने की बात हैअब नहीं करता है वफ़ा कोईज़िन्दगी के जद्दोजहद अपनेमौत का है न फ़लसफ़ा कोईयहाँ सब बे अदब हैं मेरी जांअब करे क्या मुलाहिज़ा कोईदिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'था सलामत मुआहिदा कोईमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Sunday
dandpani nahak commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Sunday
dandpani nahak commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"आदरणीय नीलेश 'नूर' जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला क्या ख़ूब हुआ है दूसरा शैर लाज़वाब तीसरा शैर भी बहुत अच्छा ! वाह क्या कहने ! बहुत बधाई"
Sunday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय निलेश 'नूर' जी सादर अभिवादन ! बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब ! बहुत बहुत शुक्रिया ग़ज़ल तक आने और हौसला बढ़ाने का "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अजेय जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ! हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय मुनीश 'तन्हा ' नादौन जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! दूसरा, तीसरा, और छठा शैर ख़ास तौर पर  बहुत पसंद आया बहुत बधाई "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय नादिर ख़ान साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई  स्वीकार करें चौथा शैर क्या ख़ूब हुआ है बहुत बधाई "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय नाकाम जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अमित कुमार 'अमित ' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला ख़ूब हुआ है और पाँचवा शैर  लाज़वाब वाह ! बहुत ख़ूब ! "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीया राजेश कुमारी दी जी प्रणाम बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें तीसरा शैर ख़ास तौर  पे बहुत पसंद आया ! बहुत बहुत बधाई "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"मुआफ़ी चाहता हूँ जनाब टंकण त्रुटि से 'ग़ज़ल' गगल हो गया है ! बहुत शर्मिंदा हूँ "
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई
ज़िन्दगी है की हादसा कोई

वो पुराने ज़माने की बात है
अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का है न फ़लसफ़ा कोई

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 27, 2020 at 6:02pm — 3 Comments

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

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At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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