arunendra mishra commented on rajesh kumari's blog post मौज कोई सागर के किनारों से मिली
arunendra mishra commented on MAHIMA SHREE's blog post प्रवंचनाएं
Posted on May 30, 2012 at 9:30pm 18 Comments 0 Likes
जीवन तुझसे एक वर माँगू
पाप पुण्य से दूर
जीवन की समझ माँगू
एकाकी अगर सत्य हो तो
तथागत बनने का वर माँगू
आवेश ही एक मात्र मार्ग हो तो
दुर्योधन का आवेश पाऊँ
क्षमा ही ध्येय हो तो
युधिष्ठिर का मन पाऊँ
समर्पण ही अगर सत्य हो तो
समर्पण की धुरी पर जो कर्ण पिसा
मैं भी समर्पित हूँ
उपेक्षा अगर सत्य हो तो
एकलव्य सा ध्यान…
ContinuePosted on May 25, 2012 at 11:56pm 10 Comments 0 Likes
प्रियतम जब से मैंने प्रेम का आवाहन किया
करुण वेदना , विरह अश्रु , और मौन ने मेरा श्रृंगार किया
कितनी संवेदना ,कितनी आह
कितने अश्रु , कितनी चाह
कितने आलाप , कितने गान
मिल कर भी
संतॄप्त न कर पाती
उर अरमनों में छिपे स्पंदन को,
प्रियतम जब से मैंने प्रेम का आवाहन किया
सावन रिक्त , शशि सुप्त
सूरज न उग्र , रौद्र नयन हैं रुष्ट
प्रियतम जब से मैंने प्रेम का आवाहन किया
करुण वेदना , विरह अश्रु , और मौन ने मेरा…
ContinuePosted on April 18, 2012 at 12:30am 5 Comments 1 Like
पिता जी,
संघर्ष अभी जीवित है
वो मरा नहीं
अब भी आपके सपने
उसकी आँखों में ही है
वो आँसुयों में बहे नहीं
यद्यपि
वह टूटा नजर आ रहा
परंतु , पिता जी
अभी संघर्ष जीवित है
वो मरा नहीं
अभी भी उसमे अरमान है
अनंत आकाश में उड़ने की ख्वाहिश है
जो आप ने उसे दिखाये थे
यद्यपि
वह थक कर रुक गया…
ContinuePosted on April 13, 2012 at 1:00pm 10 Comments 0 Likes
ये कौन सा मोड़ है जीवन का
जहा सिर्फ अंतर्द्वंद है
यक़ीनन मै जनता हूँ
हर उस रास्ते को
जो मेरे चौराहे से गुजरता है
परन्तु फिर भी मै अविचल हूँ
यकीन मानो ,…
Continue
Admin said…
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