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amod shrivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय अमोद जी..."
yesterday
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"आ तेजवीर दादा सादर नमन ..प्रोत्साहन का बहुत बहुत आभार , आ समर दादा सादर नमन  दादा रचना मार्गदर्शन के लिए दिल से आभार "
Friday
amod shrivastav (bindouri) posted blog posts
Friday
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है ,बधाई स्वीकार करें । ' अवाज़ आज मेरी महफिलों से आती है' इस मिसरे में 'अवाज़' ग़लत शब्द है,इसकी वजह से मिसरा गड़बड़ हो रहा है,इसे यूँ कर सकते हैं:- 'सदा ये आज मेरी महफिलों से…"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"हार्दिक बधाई आदरणीय आमोद श्रीवास्तव जी।बेहतरीन गज़ल। कदम रुके हैं मुहब्बत की राह में जबसे।है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है।।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले
"आ. भाई आमोद जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का ऊला कुछ और कसावत चाहता है ।"
Sep 10
babitagupta commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले
"बेहतरीन रचना ,आखिरी दो पंक्तियाँ बहुत सटीक,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय आमोद सरजी."
Sep 8
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले

बह्र - 2122-1221-22इतना उलझा है आदम बसर में।। खुद से पूछे वो है किस सफर में ।।क्या समझ पाएगे रात भर में।। फर्क है इस नजर उस नजर में।।ना बदल पाऊं बिलकुल न बदले। पर है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर में।।अपनी मंजिल से है लापता जो । चीखता फिर रहा, रह-गुजर में।।हर मुसाफिर की कोशिस यही बस।सब सलामत रहे मेरे घर में।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक- अप्रकाशितSee More
Sep 8
amod shrivastav (bindouri) commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल बह्र -फऊलुन -फऊलुन -फऊलुन -फऊलुन
"आ मोहम्मद आरिफ भाई सा बेहतरीन गजल कही है । सादर अभिवादन "
Sep 7
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।
"आ समर दादा , आ नवीन भाई सा ,आ मोहम्मद आरिफ साहब  मार्गदर्शन प्रोत्साहन के लिए सादर आभार नमन"
Sep 7
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ शिल्पगत कमज़ोरियों पर क़ाबू पाना होगा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । ' मेरा लहजा है कोई कहे न कहे' ये मिसरा लय में नहीं,यूँ कर लें :- 'मेरा लहजा है कोई कहे कुछ…"
Aug 20
Naveen Mani Tripathi commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।
"आ0 बिंदौरी साहब ग़ज़ल का सुन्दर प्रयास हुआ है । मुबारकवाद ।"
Aug 20
Mohammed Arif commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।
"आदरणीय आमोद जी आदाब,                  अच्छी ग़ज़ल का प्रयास । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Aug 19
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।

बह्र-212-212-212-212 घर पे अपने बुरा या भला ठीक हूँ।। गुमशुदा हूँ अगर गुमशुदा ठीक हूँ।।पर्त धू की चढ़ी,दीमकों का बसर। हो लगी चाहे सीलन पता ठीक हूँ।।मेरा लहजा है कोई कहे न कहे। मैं रदीफ़ ए ग़ज़ल काफिया ठीक हूँ।।ठाठ की टोकरी या तुअर झाड़ की । घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।शान ओ शौक़त न कोई बसर चाहिए। बस है चादर फटी अध-ढका ठीक हूँ।।.आमोद बिन्दौरी ,मौलिक /अप्रकाशितSee More
Aug 19
Mohammed Arif commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post खुशबुएँ ज़ेहनी अभी भी कर रहे गुलजार क्यों??
"प्रिय आमोद जी आदाब,                   बेहतरीन ग़ज़ल का प्रयास । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 8

Profile Information

Gender
Male
City State
fatehpur
Native Place
Bindour
Profession
writing ,& job
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog

है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है

बहर

 1212-1122-1212-22

मेरे खयाल में अब फासलों से आती है।।

तुम्हारी याद भी अब दूसरों से आती है।।

कदम रुके हैं मुहब्बत की राह में जबसे।

है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है।।

की जर्रा जर्रा कही टूट कर है बिखरा यूँ।

सदा ये आज मेरी महफिलों से आती है।।

मसल चुका हुँ सभी कुछ मैं जह्न के भीतर।

अभी भी तेरी कसक , हौसलों से आती है।।

गुजर रही है मुहब्बत की तिश्नगी दे कर।

जो…

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Posted on September 13, 2018 at 9:30pm — 4 Comments

बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले

बह्र - 2122-1221-22

इतना उलझा है आदम बसर में।।
खुद से पूछे वो है किस सफर में ।।

क्या समझ पाएगे रात भर में।।
फर्क है इस नजर उस नजर में।।

ना बदल पाऊं बिलकुल न बदले।
पर है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर में।।

अपनी मंजिल से है लापता जो ।
चीखता फिर रहा, रह-गुजर में।।

हर मुसाफिर की कोशिस यही बस।
सब सलामत रहे मेरे घर में।।

आमोद बिन्दौरी /मौलिक- अप्रकाशित

Posted on September 7, 2018 at 8:30pm — 3 Comments

घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।

बह्र-212-212-212-212



घर पे अपने बुरा या भला ठीक हूँ।।

गुमशुदा हूँ अगर गुमशुदा ठीक हूँ।।

पर्त धू की चढ़ी,दीमकों का बसर।

हो लगी चाहे सीलन पता ठीक हूँ।।

मेरा लहजा है कोई कहे न कहे।

मैं रदीफ़ ए ग़ज़ल काफिया ठीक हूँ।।

ठाठ की टोकरी या तुअर झाड़ की ।

घर के सपने संजो अधभरा ठीक हूँ।।

शान ओ शौक़त न कोई बसर चाहिए।

बस है चादर फटी अध-ढका ठीक हूँ।।

.

आमोद बिन्दौरी…

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Posted on August 18, 2018 at 5:00pm — 4 Comments

खुशबुएँ ज़ेहनी अभी भी कर रहे गुलजार क्यों??

2122-2122-2122-212

आप को जाना ही है तो आज कल इतवार क्यों।

तोडना गर दिल ही है तो प्यार और मनुहार क्यों।।

आप की नजरें बयाँ क्यों कर बहाना है नया ।

आप की यह भीगती पलकों में ये उपहार क्यों।।

शौख था गर भूलना ही भूल जाते बे -शबब।

खुशबुएँ ज़ेहनी , अभी भी कर रहे गुलजार क्यों।।

रोक लो यह छटपटाती रूह का एहसास है ।

जल चुका है आशियाँ जो खोज इसमें प्यार क्यों।।

देखना गर चाहते हो मेरे चेहरे में ख़ुशी।

हाथ में लेकर खड़े हो आप…

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Posted on August 5, 2018 at 1:01pm — 4 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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At 5:43am on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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