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amod srivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
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amod srivastav (bindouri) commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"आ तस्दीक साहब , बृजेश साहब नमन ,  मार्गदर्शन और प्यार के लिए आभार "
Feb 14
amod srivastav (bindouri) commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ
"आ तस्दीक साहब आप को नमन , सर मेरी जानकारी जहाँ तक है । गजल लहजे का दूसरा नाम है । शेर रफ्त की जो बात आप ने कही  , मैं न नही कह रहा ।पर मै अपने लहजे में लिखता हूँ । अपने भाव अंदाज में, हाँ अगर कोई दोश हो तो आप जरूर अवगत कराये , मैं आप के…"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ
"आ. भाई आमोद जी प्रयास के लिए बधाई । भाई तस्दीक अहमद जी की सलाह पर भी गौर कीजिए ।"
Feb 13
amod srivastav (bindouri) commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post इस नशेमन की मोहलत है तबतक...
"आ शोमेस जी आप का बहुत आभार की रचना आप को पसंद आयी ....आप से बिनती है कि आप अपनी लव स्टोरी में अपनी रचनाये ही डाले , ये वेब या कोई जगह से किसी का कॉपी पेस्ट न करें । ये सिर्फ मेरी भावनाये है गलत भी हो सकती हैं । समाज को एक नए सृजन की अवस्यकता है न की…"
Feb 12
somesh kumar commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post इस नशेमन की मोहलत है तबतक...
"ऐसा लगा की रंग-बिरंगे मोतियों को सजाकर एक प्यारी सी माला बना दी हो जब तपे हो आग में तो ये कुंदन बना है एक लव स्टोरी दिमाग में चल रही है अगर आप को आपत्ति न हो तो एकाध शेर वहां प्रयोग करना चाहूंगा"
Feb 12
amod srivastav (bindouri) commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर -- (गजल)-- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ मुसाफिर साहब ...बहुत ही खूब  सादर बधाई ....नमन "
Feb 12
amod srivastav (bindouri) posted a blog post

इस नशेमन की मोहलत है तबतक...

बह्र:-2122-1221-22वक्त बे वक्त का आसरा है।। घर का टुटा हुआ जो घड़ा है ।।1  जो  मुहब्बत में अपनी बिका है। उसको दौलत ओ शुहरत से क्या है ।।2जब समझलो की क्या माजरा है। बोल बोलो नही कुछ बुरा है।।3प्यास बुझ जाए हर सोच कर ये। जंग प्रतिदिन तपन की लड़ा  है।।4बोल बोलो नहीं कुछ बुरा है ।। माजरा पर समझ लो की क्या है ।।5किसकी किस्मत में क्या क्या लिखा है ।। जान पाना ये मुश्किल बड़ा हैं।।6कामयाबी में  तेरी हूँ हैरां। इतनी सिद्दत से रुख को पढ़ा है ।।7जिस में है हौसला जूझने का । दौरे हाजिर में अब भी खड़ा है…See More
Feb 12
Tasdiq Ahmed Khan commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ
"जनाब आमोद साहिब , ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है ,ग़ज़ल महनत चाहती है ,कोशिश बार बार कीजिये ,फिर रब्त क़ायम होने पर मिसरे को चुनिए । सही शब्द तज रि बा -है और  नज़र से वार दुश्मन करता है । ज़्यादा तर मिसरों में रब्त की कमी है  ।शेर में बदलाव करके लिख…"
Feb 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय..ज़नाब तस्दीक साहेब ने ठीक ही फ़रमाया है..बहुत लम्बी रचना में दिलचस्पी कम होने लगती है।"
Feb 11
Tasdiq Ahmed Khan commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"जनाब आमोद साहिब, टाइप पूरा पोस्ट नहीं हो पाया । शेर2 राबतकी कमी , शेर3रब्त की कमी ,मिसरे बह्र में नहीं , शेर5 रब्त की कमी, रब्त की कमी ,उला बह्र में नहीं ,शेर8 रब्त की कमी ,ऐब-रदीफैंन।"
Feb 10
Tasdiq Ahmed Khan commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"जनाब आमोद बिंदोरी साहिब , आपका ग़ज़ल पर कोशिश करते अच्छा लग रहा है । मेरी राय है कि सात शेर से ज़्यादा मत कहें ,और उन्हीं में बार बार बदलाव करें ।आपने 14 शेर लिख दिए ।  शेर1 मिसरों में रब्त की कमी ,शब्द ख़्वाम ख्वाह होता है । शेर10 रब्त की कमी ,…"
Feb 10
amod srivastav (bindouri) commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"आ वीरेंद्र साहब  , सादर आभार  , आपके प्रेम पूर्ण शब्दों ने मेरे दो शेर को जिन्दा क्र दिया ,"
Feb 10
VIRENDER VEER MEHTA commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"जो शख्स मेरी मुहब्बत की इक इबादत है। वो अब मुझे ही मेरे दरमियाँ नही मिलता।। उन्हें गजल से मेरी आज भी शिकायत है। की शेर इश्क में डूबा जवां नहीं मिलता।।..... बहुत उम्दा भाई आमोद श्रीवास्तव जी. मन को छु गये आपकी ये पंक्तियाँ. बधाई भाई जी"
Feb 10
amod srivastav (bindouri) posted a blog post

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ

मापनी :-1212-1122-1212-112शुरू कहाँ से करूँ ओऱ कहाँ से बात करूँ।।नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ।।मुझे तो इतना तज्ज्रिबा नहीं मुहब्बत की।फ़िसल वो जाएं शुरू मैं जहां से बात करूँ।।कोई हसीन सा किरदार जिंदगी से जुड़े।यही है चाह की उल्फत की हाँ से बात करूँ ।।समझ समझ के समझ को समझ न पाए हमीं।की किससे कौन अदा से जुबाँ से बात करुं।।मेरे हबीब मेरे रब मेरी अना में अभी।है इतनी चाह जमीं आसमाँ से बात करूँ।।आमोद बिंदौरीमौलिक/ अप्रकाशितSee More
Feb 10
amod srivastav (bindouri) commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"आदरणीया रक्षिता जी आभार"
Feb 9
amod srivastav (bindouri) commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने तुम्हारे वास्ते क्या क्या नहीं किया - सलीम रज़ा
"खूबसूरत वाहःहः "
Feb 9

Profile Information

Gender
Male
City State
fatehpur
Native Place
BINDOUR
Profession
writing,& job
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

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Amod srivastav (bindouri)'s Blog

इस नशेमन की मोहलत है तबतक...

बह्र:-2122-1221-22

वक्त बे वक्त का आसरा है।।

घर का टुटा हुआ जो घड़ा है ।।1

  जो  मुहब्बत में अपनी बिका है।

उसको दौलत ओ शुहरत से क्या है ।।2

जब समझलो की क्या माजरा है।

बोल बोलो नही कुछ बुरा है।।3…

Continue

Posted on February 11, 2018 at 8:30pm — 2 Comments

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ

मापनी :-

1212-1122-1212-112

शुरू कहाँ से करूँ ओऱ कहाँ से बात करूँ।।

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ।।

मुझे तो इतना तज्ज्रिबा नहीं मुहब्बत की।

फ़िसल वो जाएं शुरू मैं जहां से बात करूँ।।

कोई हसीन सा किरदार जिंदगी से जुड़े।

यही है चाह की उल्फत की हाँ से बात करूँ ।।

समझ समझ के समझ को समझ न पाए हमीं।

की किससे कौन अदा से जुबाँ से बात करुं।।

मेरे हबीब मेरे रब मेरी अना में अभी।

है इतनी चाह जमीं आसमाँ से बात…

Continue

Posted on February 9, 2018 at 6:22pm — 3 Comments

तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता

बहर :-1212-1122-1212-22

गरीब वो हैं कि जिनका मकां नहीं मिलता।।

अमीर वो जो कभी खामखां नहीं मिलता।।

कोई भी शख़्स मुझे खुश नुमां नहीं मिलता।।

मुझे तो दर्द भी हँस कर मियां नहीं मिलता।।

मैं ढूंढता हूँ खुद का निशाँ नहीं मिलता।।

शह्र में तेरे मिरा हम जुबाँ नहीं मिलता।।

मिले बहुत से मगर और बात है तुम में।।

तुम्हारे जैसा कोई खुशनुमां नहीं मिलता।।

कसम भी प्यार में खाई कसम को तोड़ा भी।

हाँ यार…

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Posted on February 8, 2018 at 5:55pm — 8 Comments

अरे हम कोई लेखक थोड़ी हैं


बह्र:- 1222-1221-22
अरे ! हम कोई लेखक थोड़ी हैं।।
समय हो पास , वो मुमफली हैं।।

कहाँ कहना हमें मंच-कविता।
बहल बस दिल ही जाएं ख़ुशी हैं।।

बड़े ओहदे ,रंगीं रात ,ना ना।
गरीबां का निवाला, सही हैं।।

मुहब्बत में हमारी भी दोस्त।
नशा भी वो ,वही मयकशी हैं।।

कोई रूठे तो रूठे मेरा क्या।
मेरी दौलत ओ शोहरत नही हैं।।


आमोद बिंदौरी /मौलिक अप्रकाशित

Posted on January 24, 2018 at 8:42pm — 2 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod srivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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At 5:43am on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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