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Sunil Verma
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Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"न जाने क्यूँ मुझे उम्मीद थी कि आपके द्वारा मुझसे यह सवाल पूछा जायेगा| इसका अर्थ है कि मैं सही दिशा में हूँ, मुझे भी वह बात खटकी जो आपको भी कथा में महसूस हुई | सच कहूँ तो मैनें काफी परिश्रम किया था यह 'कनेक्शन' बनाने में..मगर यह फिर भी बन…"
Oct 30
Mohammed Arif commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"आदरणीय सुनील वर्मा जी आदाब, सशक्त और बेहतरीन कथानक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 19
अलका 'कृष्णांशी' commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"आदरणीय सुनील  वर्मा  जी, सुन्दर प्रस्तुति  बहुत बधाई ! सादर "
Sep 18
Samar kabeer commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"जनाब सुनील वर्मा साहिब आदाब,हमेशा की तरह बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 18
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"बढ़िया लघुकथा कही है आपने आदरणीय सुनील भैया | विषय भी नया है बहुत बहुत बधाई |"
Sep 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"चालक ने 'रियर व्यू मिरर' को सही करते हुए कहा "भाई, इस गाड़ी में इसका 'विश्वास' लेटा है| मुझे डर है कि कहीं बिना जरूरत के सायरन बजाया तो वह न मर जाये|" वाह वाह भाई सुनील जी,वाह बढ़िया लघुकथा कहीं।बहुत उम्दा।बधाई लीजिये"
Sep 18
Sunil Verma posted a blog post

जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा

"सुन न यार..क्यूँ इस ट्रेफिक जाम में पसीने बहा रहा है? सायरन ऑन कर और जगह बनाता चल.." खाली एंबुलेस में चालक के पास वाली सीट पर बैठे उसके दोस्त ने समझाया|"नही भाई..पाँच दस मिनिट देर से ही सही| हमें किस बात की जल्दबाजी है..? गाड़ी में कोई मरीज थोड़े ही लेटा हुआ है, खाली ही तो है|" चालक ने अपने दोस्त से कहा|"अररे तो बाहर लोगों को थोड़े ही पता है कि पीछे मरीज लेटा है या नही" दोस्त ने उसे अपना अतिरिक्त ज्ञान दिया|असर हुआ और सामने रेंगते हुए ट्रेफिक को देखकर चालक का हाथ सायरन ऑन करने के लिए आगे बढ़ा…See More
Sep 18

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जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा

"सुन न यार..क्यूँ इस ट्रेफिक जाम में पसीने बहा रहा है? सायरन ऑन कर और जगह बनाता चल.." खाली एंबुलेस में चालक के पास वाली सीट पर बैठे उसके दोस्त ने समझाया|



"नही भाई..पाँच दस मिनिट देर से ही सही| हमें किस बात की जल्दबाजी है..? गाड़ी में कोई मरीज थोड़े ही लेटा हुआ है, खाली ही तो है|" चालक ने अपने दोस्त से कहा|



"अररे तो बाहर लोगों को थोड़े ही पता है कि पीछे मरीज लेटा है या नही" दोस्त ने उसे अपना अतिरिक्त ज्ञान दिया|



असर हुआ और सामने रेंगते हुए ट्रेफिक को देखकर चालक… Continue

Posted on September 17, 2017 at 9:50pm — 8 Comments

भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा

टूटी सड़क| भारी यातायात| साफ सुथरे कपड़े पहने हुए एक युवक बार बार अपने गले में बँधी टाई सही कर रहा था| तभी सामने ने ऑटो आता देख उसने हाथ देकर उसे रोका|

ऑटो में बैठते ही युवक ने चालक को अपने गंतव्य स्थान के बारे में बताया और ज़ेब से फोन निकालकर किसी से बातें करनी शुरू कर दी| देश में बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और धार्मिक अराजकता पर बातें करता हुआ वह सरकार को कोस ही रहा था कि ऑटो चालक ने अब तक लगभग दो सौ मीटर की दूरी तय करने के बाद आगे बने एक पेट्रोल पंप पर अपना ऑटो रोका|

"साहब पेट्रोल… Continue

Posted on July 19, 2017 at 9:20am — 5 Comments

कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा

बेहद कमजोरी के बावजूद सुगणा ने कंधो के सहारे जोर लगाकर नीचे सरक आये अपने सिर को तकिये पर टिकाया| अधखुली आँखों से खुद को देखा| रक्तस्राव की अधिकता के कारण हर बार वह पहले से ज्यादा अशक्त होती जा रही थी| तीन बार की ज़चगी के बाद अब उसमें और हिम्मत नही बची थी| बात करने पर उसके पति ने उसकी बात मान भी ली थी, मगर शर्त थी की आवश्यक ऑपरेशन वह ही करवायेगी| आज उसी ऑपरेशन के बाद वह बिस्तर पर पड़ी थी| शरीर पहले से ही सुन्न था, अब दिमाग भी सुन्न हो चुका था|

गहरी फूँक छोड़ते हुए उसने…

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Posted on July 15, 2017 at 8:00am — 6 Comments

ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा

रविवार का दिन था| अखबार पढ़ने के बाद कमलेश जी बरामदे में बैठे रेडियो पर गानें सुन रहे थे| एकाएक उनके कानों में इकतारे की धुन के साथ साथ लोक संगीत के बोल घुल गये|

आँखे खोलकर उन्होने आवाज की दिशा में देखा| दरवाजे पर खड़ा एक बूढ़ा याचक कुछ गाते हुए इकतारा बजा रहा था| वह दरवाजे तक गये और उसे वहीं बाहर बने चबूतरे पर बैठने के लिए कहा|

"बहुत अच्छा गाते हो| कहाँ से हो?" उसके बैठते ही उन्होनें सवाल किया|

"बहुत दूर से…

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Posted on July 11, 2017 at 11:43am — 11 Comments

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At 8:06pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुनील वर्मा जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "तृप्ति" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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