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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
 

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Saurabh Pandey commented on SudhenduOjha's blog post रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
"आदरणीय सुधेन्दु जी, ओबीओ के पटल पर रचनाएँ ही सम्मानित होती हैं। जैसी और जिस स्तर की प्रस्तुत हुई रचना होगी, उसी अनुरूप उस रचना का रचनाकार समादृत होगा। इस कारण, किसी प्रस्तुति का विधान आपरूप महती हो जाता है। इससे पटल के पाठकों को कोई  अंतर नहीं…"
Sep 11
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।
"//2. मंच के रचनाकार मुझ से वरिष्ठ हैं और अपनी-अपनी विधा में अच्छी रचना कर रहे हैं, इसीलिए नौसिखिया टिप्पणी से बचता हूँ// ये सीखने सिखाने का मंच है, यहाँ सब सीखने के लिये ही आते हैं,सब आपकी तरह सोचने लगें तो मंच कैसे चलेगा? अगर आप किसी की त्रुटि नहीं…"
Sep 11
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।
"आदरणीय समर कबीर जी, 1. विधा के नाम पर मुझे इतना इल्म है कि मैंने पद्य रचना की है। मैंने कभी खुद को कवि लिखा ही नहीं। इसीलिए मैं रचना की विधा नहीं लिखता।  2. मंच के रचनाकार मुझ से वरिष्ठ हैं और अपनी-अपनी विधा में अच्छी रचना कर रहे हैं, इसीलिए…"
Sep 11
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।
"पहली बात ये कि आप रचना के साथ विधा नहीं लिखते हैं,इससे भी कुछ कहने में मुश्किल होती है,अगर आप अपनी रचना के साथ विधा लिखेंगे तो मंच के सदस्य अवश्य अपनी समीक्षा देंगे,दूसरी बात ये कि आपको मंच पर मौजूद अन्य रचनाकारों की रचनाओं पर अपनी अमूल्य टिप्पणी…"
Sep 11
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी, आपका धन्यवाद। ओपेन बुक ऑनलाइन पर रचना डालने का उद्देश्य यह रहता कि रचना की कमियों और उसके गुण पर समीक्षात्मक दृष्टि पड़े। आप लोग इस मंच के पुरोधा हैं। आपसे यह उम्मीद रहती है। दूसरे, मुझे यह स्वीकार करने में उज्र नहीं होता है…"
Sep 11
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।
"आदरणीय समर कबीर जी, आपका धन्यवाद। ओपेन बुक ऑनलाइन पर रचना डालने का उद्देश्य यह रहता कि रचना की कमियों और उसके गुण पर समीक्षात्मक दृष्टि पड़े। आप लोग इस मंच के पुरोधा हैं। आपसे यह उम्मीद रहती है। दूसरे, मुझे यह स्वीकार करने में उज्र नहीं होता है कि…"
Sep 11
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 11
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
"अदरणीय सौरभ पाण्डेय जी, आपने रचना पर अपना बहुमूल्य समय और राय दी उसकेलिए धन्यवाद। मुझे हिन्दी पद्य, छंद की मात्राओं की थोड़ी समझ है किन्तु 'फ़ाइलतुन' से अनभिज्ञ हूँ। "कविताई" मैं नहीं करता हूँ। बल्कि इस शब्द के प्रयोग को ही मैं…"
Sep 10
SudhenduOjha posted a blog post

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है। भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।तुम न कोलाहल सुनो, ना ही करतल ध्वनि बिको। सत्य के आधार पर सुंदरम बन कर टिको।।दृष्टिहीनों के समक्ष, अति नर्तना ही व्यर्थ है। पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।। भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।मेनका की कामना और उसीकी उपासना। व्यर्थ शालिग्रामों में है फिर सत्य को तलाशना।।जब वर्जना ही लक्ष्य हो तो, वर्जना ही व्यर्थ है। पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है। भाव जिसमें…See More
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on SudhenduOjha's blog post रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
"आदरणीय सुधेन्दु जी,  आपकी प्रस्तुति पर उत्तर छायावाद की प्रच्छाया है. भाव, शब्द और प्रस्तुतीकरण, इन तीनों का प्रभाव व्यापक रूप से हावी है. साथ ही, भौतिक भाव पर आध्यात्मिक भाव की परत भी आकर्षक दिख रही है. इन कारणों से रचना रोचक तो हो गयी…"
Sep 7
SudhenduOjha posted a blog post

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।सिंधु तट की रेत मैं, प्रिय है मेरा उच्छृंखल लहर।।यामिनी कह चंद्रिका से, मधु पात्र को वो ढाल दे।आज श्लथ भू पर गिरूं, कुछ इस तरह का गात्र दे।।चांदनी की शीतल छुवनहो प्रेम पगता वक्ष पररात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।सिंधु तट की रेत मैं, प्रिय है मेरा उच्छृंखल लहर।।देवालयों के भव्य प्रस्तरउत्कीर्ण मूर्तियों से उतरसत्चिदानंद सर्व-व्यापीइस क्षण मुझे कर दे अमरतुझ से बिछड़ा हुआ अणु यहले चल मुझे भी बांध कररात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार…See More
Sep 6
babitagupta commented on SudhenduOjha's blog post चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।
"बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सुधांशु सरजी।"
Sep 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SudhenduOjha's blog post चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।
"आ. सुधेंदु जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 2
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।
"जनाब सुधेन्दु ओझा साहिब आदाब,अच्छी कविता है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 2
SudhenduOjha posted a blog post

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

यूँ ही.......... चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी। तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।। **************************************चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी। तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।।मैं मुदित था पक्षियों को नभ में विचरता देख कर। तुमने आकर आंख में क्यूँ नीड़ उनके रख दिये।।चंद्रमा हो साथ मेरे यह कभी सोचा नहीं था। सूर्य पथ में साथ होगा यह कभी सोचा नहीं था।।साथ मेरे द्वंद्व के संघर्ष के ही बस मीत थे। गीत अधरों पर बसेगा, यह कभी सोचा नहीं था।।हर अमावस ठोकरों की…See More
Sep 2

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Saurabh Pandey commented on SudhenduOjha's blog post सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है
"// उपरोक्त के विषय में यह कहना है कि यदि ऐसा सम्बोधन अनिवार्य है तो इसकी सूचना साइट पर फ्लैश की जाय।  हिन्दी में यदि आप नाम के साथ "जी" का प्रयोग करते हैं तो स्वतः आदरणीय हो जाता है, उसमें आयु भेद न रह कर वह वरिष्ठ एवं सम्मानित…"
Aug 28

Profile Information

Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Pratapgarh (UP)
Profession
Service

SudhenduOjha's Blog

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।

तुम न कोलाहल सुनो,

ना ही करतल ध्वनि बिको।

सत्य के आधार पर

सुंदरम बन कर टिको।।

दृष्टिहीनों के समक्ष, अति नर्तना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।।

भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।

मेनका की कामना

और उसीकी उपासना।

व्यर्थ शालिग्रामों में है

फिर सत्य को…

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Posted on September 10, 2018 at 11:00am

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
सिंधु तट की रेत मैं, प्रिय है मेरा उच्छृंखल लहर।।
यामिनी कह चंद्रिका से, 
मधु पात्र को वो ढाल दे।
आज श्लथ भू पर गिरूं, 
कुछ इस तरह का गात्र दे।।
चांदनी की शीतल छुवन
हो प्रेम पगता वक्ष पर
रात का सुन-सान पल मैं,…
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Posted on September 4, 2018 at 5:00pm — 1 Comment

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

यूँ ही..........

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।।

**************************************

चाहता मैं नहीं था

गीत गाना कोई भी।

तुमने मेरे अधर पर क्यों

शब्द लाकर रख दिये।।

मैं मुदित था पक्षियों को

नभ में विचरता देख कर।

तुमने आकर आंख में क्यूँ

नीड़ उनके रख दिये।।

चंद्रमा हो साथ मेरे

यह कभी सोचा नहीं था।

सूर्य पथ में साथ होगा…

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Posted on September 2, 2018 at 7:30am

सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है

सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है

और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है

नारी कभी नग्न नहीं होती

नग्न होती हैं ;

हमारी मातायें,

हमारी बहनें,

हमारी पत्नी,

हमारी बेटियां,

हमारी पुत्र-वधुयें,

हमारी विवशताएं

नारी कभी नहीं रोती है-

रोती हैं ;

हमारी मातायें,

हमारी बहनें,

हमारी पत्नी,

हमारी बेटियां,

हमारी पुत्र-वधुयें,

हमारी विवशताएं

फिर…

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Posted on August 24, 2018 at 6:30pm — 9 Comments

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At 6:00pm on June 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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