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Seema mishra
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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'

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Seema mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय कबीर सर आदाब आपका बहुत बहुत शुक्रिया| जी बिलकुल|"
12 hours ago
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
" आदरणीय नादिर खान साहब आदाब बहुत शुक्रिया आपका सादर "
12 hours ago
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय योगराज जी गुणीजनों की प्रशंसा पाकर उत्साह दुगुना हो जाता है आपका बहुत धन्यवाद "
16 hours ago
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय निलेश जी आपने रचना को मान देकर प्रशंसा करके प्रोत्साहन बढ़ाया आपका बहुत शुक्रिया आगे भी मार्गदर्शन मिलता रहे तभी कोशिशें निरंतर रह पाएंगी| आपके संशोधनों से रचना निखर गई सादर धन्यवाद  आ गई फूलों की रुत शामें सुहानी हो गईंस्याह रातें अब…"
16 hours ago
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय गुरप्रीत जी ग़ज़ल आपको अच्छी लगी आपका बहुत शुक्रिया| इस विधा में यह एकदम पहला प्रयास है| गुनीजनों का मंच है हिम्मत बांध कर बहुत डरते हुए कदम रखा है, प्रोत्साहन मार्गदर्शन से ही आगे के लिए साहस मिलेगा सादर धन्यवाद!"
yesterday
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ गई फूलों की रुत शामें सुहानी हो गईं स्याह रातें अब महक कर रात रानी हो गईं तब हवेली के दरो दीवार सब गाने लगे जब हवेली की सभी बिटिया सयानी हो गईं बेबसी तो है मगर अब कब तलक चर्चा करें दास्तानें सब ग़मों की अब पुरानी हो गईं लाख कोशिश कर चुके हैं…"
yesterday
Seema mishra commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )
" आदरणीय गिरिराज जी शानदार ग़ज़ल, मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ| सादर "
Thursday
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
" आदरणीय मिथिलेश जी बहुत सुन्दर प्रेरक सार छंद गीत , आयोजन का शिरोमणि बन पड़ा गीत , बहुत बहुत बधाई दिल को छू गया पुनः सादर बधाई "
Mar 18
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मिथिलेश जी आपके प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद, पंक्तियों में आवश्यक संशोधन किया है मार्गदर्शन के लिए आभार सादर "
Mar 18
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी तीनों कुण्डलिया की   भाव  प्रस्तुति आपको अच्छी लगी हार्दिक धन्यवाद सादर "
Mar 18
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"aआदरणीय अरुण जी आपका हार्दिक धन्यवाद "
Mar 17
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"माता सबको सींचती, सबका रखती ध्यान  जैसा जिसका है समय, वैसा उसका मान  वैसा उसका मान, नहीं अनदेखा करती   सबका हो शृंगार , तभी सजती है धरती  टेसू झरते सूख, निखर गुलमोहर जाता  आती  सबकी बार, विभेद न करती…"
Mar 17
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"आदरणीय अरुण जी पर्यावरण के प्रति चिंता जताते कुण्डलिया अच्छे बन पड़े हैं आपको बहुत बधाई "
Mar 17
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"आदरणीय गिरिराज जी बहुत अच्छे छन्न्पकैया हुए हैं, एकदम सरल सहज प्रवाह बहुत बहुत बधाइयाँ "
Mar 17
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"आदरणीय अशोक जी बहुत अच्छे सार छंद आपको ह्रदय से बधाई सादर"
Mar 17
Seema mishra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक जी आदाब, रचना आपको अच्छी लगी बहुत बहुत शुक्रिया "
Mar 17

Profile Information

Gender
Female
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
A C in mp govt
About me
I m creative person

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स्टेचू-(लघुकथा)-सीमा पांडे मिश्रा "सुशी"

रमा छोटी बेटी को सुलाकर आई, बड़ी बेटी ने हाथ पकड़ लिया| "मम्मी, आज मेरे साथ स्टेचू- स्टेचू खेल लो न! शानू भी घूमने गयी है|"

"नहीं!" माताजी आग्नेय दृष्टि से देखते हुए गरजीं| "बहुत काम पड़ा है, तेरी माँ को| दिन भर बस खेल-खेल? ये नहीं कि कुछ काम ही सीख ले, बनेगी अपनी माँ की तरह, कामचोर!"

तभी मोबाइल की घंटी बजी, माताजी फोन लेकर झट से बाहर चली गई| रमा ने सोचा, जरूर ननद रानी का फोन होगा| दिन भर ताना देकर मन नहीं भरता, फोन पर भी निन्दारस घोलती हैं| मायके की विपन्नता, रंग-रूप, काम चोरी,…

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Posted on January 19, 2017 at 1:00pm — 7 Comments

प्रश्न चिन्ह-(लघुकथा)-सीमा पांडे मिश्रा "सुशी"

रीमा को जो दूसरी ट्रेन पकड़नी थी, काफी लेट थी| उसी शहर में कनेश दादा का घर था| शादी के बाद मनीष ने बताया था कि कनेश दादा पूरे परिवार में महाकंजूस के नाम से प्रसिद्ध हैं| उनके घर हर चीज पर नज़र रखी जाती है| दाल के दाने क्यों बहा दिए? प्याज़ के छिलके इतने क्यों उतार दिए? गोभी के नर्म डंठल क्यों फेंक दिए| वगैरह-वगैरह| मनीष ने चलते समय मजाक किया था, चली जाना कनेश दादा के घर, तुम्हे भी तो पता चले|

रीमा दरवाजे पर खड़ी सोचने लगी कि आखिर उसे दादा के घर आना ही पडा|  

दादा ने मुस्कराते हुए…

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Posted on January 11, 2017 at 4:41pm — 4 Comments

आशा के मोती - (लघुकथा) - सीमा पांडे मिश्रा "सुशी"



मई का महीना और दूर तक वीरान सड़कें| वह कार से जा रही थी| रास्ते में पेड़, पहाड़, खेत, नाले टीले देखते-देखते यात्रा आसान हो जाती है| कुछ पेड़ टेढ़े कुछ सीधे, कुछ छायादार घने बीच-बीच में टीले, मंदिर वाली पहाडी और उस पर उकेरा हुआ रास्ता| मंजिल तक पहुँचने से ज़्यादा रास्ते पर चलने में सुख होता है लेकिन यह रास्ता बिल्कुल नीरस जान पड़ता था| दूर-दूर तक कहीं हरेपन का नामोनिशान नहीं! चिलकती धूप में तन के साथ-साथ उसका मन भी…

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Posted on January 7, 2017 at 11:30am — 10 Comments

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At 2:11am on January 1, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

At 6:31pm on December 31, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीया सीमा मिश्रा जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है। सादर
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

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भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"सभी अशआर बस मन को भा गए. और बाबा जुकर वाले शेर का तो बस... बधाई हो आदरणीय..."
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वर्तमान के प्रति आपकी चिन्ता इस ग़ज़ल में बखूबी झलक रही है आ० राजेश दीदी. कृप्या दाद कबूल करें ."
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बहुत आभार नादिर भाई !!!"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Like.... bhaai !!!  "
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी, सर.... आप सामने आये, मैं होश में आ गया.... अत्यन्त आभार आपका आदरणीय समर साहब.... बरसी में…"
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Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. मिथिलेश बहुत अच्छी ग़ज़ल है बधाई हो."
5 hours ago

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