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Rakshita Singh commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय सार्थक जी नमस्कार सुन्दर पंक्तियों पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।।"
Jun 27
Mahendra Kumar commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय सार्थक जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। "
Jun 26
Samar kabeer commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"जनाब सार्थक जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मैं भी भीगे रहता हूँ' इस मिसरे पर कुछ विचार करें।"
Jun 25
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"बहुत ख़ूब"
Jun 24
Mohammed Arif commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"प्रिय सार्थक जी आदाब,                   बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान  लेंं ।"
Jun 23
gumnaam pithoragarhi commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है....... छोटी बह्र में खूब कहा है।।"
Jun 23
Ravi Shukla commented on Sarthak's blog post ग़ज़ल
"आदरणाीय साथर्क जी यद्यपि अापने गजल के अरकान नहीं  लिखें है  फिर भी बहरे मीर पर आपकी इस गजल के लिए बधाई स्वीकार करें । अच्छी गजल कही अापने ।"
Jun 23
Sarthak posted a blog post

ग़ज़ल

तन्हा तन्हा रहता हूँ,मैं भी साये जैसा हूँ।खाली मौसम होता है,तुम बिन जब मैं होता हूँ।मैंने तुमको अपना मानामैं भी देखो कैसा हूँ।उसकी आंखें बादल हैमैं भी भीगे रहता हूँ।चुपके से सुन लेना तुमजो भी तुमसे कहता हूँ।जाने वालों जाओ तुमअब थोड़ी मैं रोता हूँ।अपनी सूखी आंखों मेंअब भी सपने बोता हूँ।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jun 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जी शुक्रिया आपका ।पहला प्रयास है कोशिश रहेगी सीखने में ज्यादा से ज्यादा ध्यान लगाऊं। आप भी मार्गदर्शन करें तो मदद मिलेगी  ।"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आपका तहे दिल से शुक्रिया आरिफ साहब ओर हार्दिक आभार ।ये पहली ग़ज़ल की कोशिश है।आपका साथ रहेगा तो ओर भी अच्छा कर पाऊंगा।पुनः तहे दिल से शुक्रिया।।"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"शुक्रिया नादिर खान जी ,मैं सीखने में यकीन करता हु मैं आपकी ओर गुणी जनों की मदद से अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश करूंगा ।"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"समर कबीर आपका आशीर्वाद मिला खुशी हुई ।पहली ग़ज़ल की कोशिश की है ।मार्गदर्शन करें।बहुत बहुत आभारी।"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"धन्यवाद लक्मन जी। बिल्कुल गुणी जनों की सलाह से से परिपक्वता आती है।"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"खूबसूरत रचना"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"बहुत बहुत शुक्रिया रक्षिता जी मगर अभी ग़ज़ल में दोष है उम्मीद करता हु धीरे धीरे कमी दूर होगी ।पुनः शुक्रिया"
Feb 23
Sarthak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आशीष जी पहली बार बहर में कुछ लिखने की कोशिश की है आपका मार्गदर्शन काम आएगा ।मैं।सीखने में यकीन करता हुँ ओर आगे भी इसपर ही काम करूंगा।"
Feb 23

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Gender
Male
City State
Haryana
Native Place
Haryana
Profession
Student
About me
Hard working dedicated

Sarthak's Blog

ग़ज़ल

तन्हा तन्हा रहता हूँ,
मैं भी साये जैसा हूँ।

खाली मौसम होता है,
तुम बिन जब मैं होता हूँ।

मैंने तुमको अपना माना
मैं भी देखो कैसा हूँ।

उसकी आंखें बादल है
मैं भी भीगे रहता हूँ।

चुपके से सुन लेना तुम
जो भी तुमसे कहता हूँ।

जाने वालों जाओ तुम
अब थोड़ी मैं रोता हूँ।

अपनी सूखी आंखों में
अब भी सपने बोता हूँ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 22, 2018 at 11:19pm — 7 Comments

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