Started this discussion. Last reply by CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' Jul 11, 2012. 22 Replies 1 Like
मेरी पुस्तक "प्रेम के पथ पर" का विमोचन…Continue
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' commented on रविकर's blog post जागे आर्यावर्त, गर्त में जाय दुश्मनी -
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post इक प्रयोग "पञ्च चामर ग़ज़ल"
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' commented on CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU''s blog post राजी कैसे मन को कर लूं मैं गणतंत्र मनाने को?
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१Posted on January 26, 2013 at 2:30pm 2 Comments 0 Likes
आओ मिल गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रगान का गान करें,
संकल्पित सपनों की आओ फिर से नयी उड़ान भरें.
नये जोश से ओत प्रोत हो हम गणतंत्र मनाते हैं,
लोकतंत्र में हो स्वतंत्र हम राष्ट्र गीत को गाते हैं..
किन्तु चाहता प्रश्न पूंछना लोकतंत्र रखवारों से,
सार्थकता क्या बची रहेगी इन ओजस्वी नारों से.
क्या तुमको भूंखे बच्चों की चीख सुनाई देती है,
क्या तुमको कोई अबला की पीर दिखाई देती है.
क्या तुमने बेबस माँओं की गोद उजड़ते देखा है.
कितनी मांगों…
ContinuePosted on January 12, 2013 at 9:30am 12 Comments 1 Like
घटना ऐसी घटित हो गयी सुनकर भारत रोया है,
वीर सपूतो को फिर से इस मात्रभूमि ने खोया है.
छल कर गया पड़ोसी उसने अपनी जात दिखा डाली,
सोते सिंहो पर हमला अपनी औकात दिखा डाली.
खून हमारा उबल उठा है पाक तेरी नादानी से,
दिल्ली कैसे सहन कर गयी सोंचू मै हैरानी से.
आज हमारी सहनशक्ति का बाँध तोड़ डाला तूने,
सोये सिंह जगाकर अपना भाग्य फोड़ डाला तूने.
अरे भेंड़िये कायरपन पर बार-बार धिक्कार तुझे,
हिन्दुस्तानी बच्चा-बच्चा देता है ललकार तुझे.
कूटनीति अपनाने वाले…
Posted on January 10, 2013 at 8:00pm 10 Comments 0 Likes
अफ़सोस है दुनिया में दीवाने कहाँ जायें.
शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ जायें.
यातना वंचना असह्य हो,
सहचरी वेदना बनी सदा.
निर्जन पथ निर्मम मीत मिला,
व्याकुल करती मदहोश अदा.
उलझन में पड़ा जीवन सुलझाने कहाँ जायें.
शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ जायें.
पल में विचलित कर देती हैं,
ये प्यार मुहब्बत की बातें.
नयनों मे कोष अश्रुओं का,
क्यूँ काटे नहीं कटती रातें.
राँझा की तरह बोलो मिट जाने कहाँ जायें..
शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ…
Posted on December 12, 2012 at 5:30pm 4 Comments 0 Likes
समरसता की पले भावना सबका हो यह नारा
यह मानव धर्म हमारा शुभ मानव धर्म हमारा..
जन-जन में फैले विश्व शांति आपस में भाईचारे
मंदिर बांटा मस्जिद बांटी अब बांटों ना गुरूद्वारे.
राम नाम भव तारेगा सदगुरू का एक इशारा..
यह मानव धर्म हमारा................
सुख दुःख आपस में बांटों बन व्योम,चन्द्र औ तारे
लहर दौड़ समता की जाये बचें कहर से सारे .
अमन शांति और विश्व एकता यह शुभ कर्म हमारा ..
यह मानव धर्म…
सूबे सिंह सुजान said… बहुत खूब ....आपकी वीर रस की कवितायें बेहद सराहनीय हैं

Thank u mridu ji
वीनस केसरी said… मृदु जी जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
ARVIND KUMAR TIWARI said… आदरणीय शैलेन्द्र सिंह "मृदु" जी जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. आपका ये चमत्कृत व्यक्तित्व हमेशा सूर्य की आभा लेकर साहित्य जगत में एक उदीयमान रूप लेकर निखरे.
इस मंगलकारी दिवस की आपको सहस्त्र बधाइयाँ

बहुत बहुत आभार शैलेन्द्र मृदु जी |
Mukesh Kumar Saxena said… धन्य बाद मृदु जी । दोस्त तो वहुत मुश्किल से मिलते है
MANISHI SINGH said… aadarniya mridu ji, sadar abhivadan
thanks.
Mukesh Kumar Saxena said… भाई शैलेंदर जी मै आपका आभारी हूँ जो आपने मेरी भावनाओ की फर्क और पात्रता के माध्यम से कद्र की ।
खुश हूँ उसकी ख़ुशी से कि खुश वो रहे
प्यारी सी प्रस्तुति.........प्रेम सी भरी हुई...बधाई
मृदु जी, नमस्कार ,
आभारी..हु,.....धन्यवाद्..उत्साह बढ़ने के लिए...
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा,रचना शीघ्र अनुमोदित कराने हेतु रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिख दें । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
धर्मेन्द्र कुमार सिंह liked Abhinav Arun's blog post ग़ज़ल - मछलियाँ तय्यार हैं जारों में पलने के लिए !
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post ग़ज़ल "बह रही गंगा अजल से पापियों के वास्ते"
धर्मेन्द्र कुमार सिंह liked SANDEEP KUMAR PATEL's blog post ग़ज़ल "बह रही गंगा अजल से पापियों के वास्ते"
Jitendra Pastariya commented on Sonam Saini's blog post आज हमे दोनों वक़्त खाना मिल जायेगा
वीनस केसरी commented on Kewal Prasad's blog post !!! गजल !!!
Raj Kumar Jindal commented on Raj Kumar Jindal's blog post अतुलनीय माँ।
Jitendra Pastariya commented on Neeraj Mishra's blog post जब दर्द गुजरता हो दिल से [नज़्म]
Raj Kumar Jindal commented on Raj Kumar Jindal's blog post अतुलनीय माँ।
Neeraj Mishra commented on Neeraj Mishra's blog post जब दर्द गुजरता हो दिल से [नज़्म]© 2013 Created by Admin.
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |

