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Rupam kumar -'मीत'
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  • Bihar
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Welcome, रुपम कुमार -'मीत'!

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Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]जब आँखों को दरिया करने का मन हो तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ [2]दिन से रात तलक मैं तुमको रोता हूँ तुम भी मुझको आठ-पहर रोना जानाँ [3]अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ [4]तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी सीखो ख़ुद से मिलकर ख़ुश होना जानाँ [5]आज जला दी वो वाली फ़ोटो जिसमें सूट तुम्हारे जिस्म पे था काला जानाँ [6]तुमसे पहले मैं ख़ुश रहता था लेकिन बाद तुम्हारे रंज-ओ-ग़म रहता जानाँ…See More
11 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"मोहतरमा उस्ताद समर कबीर साहिब जी, आपको मेरा प्रणाम, आपकी दाद मिल रही है, तो कोशिश सफल हुई, मैं कोशिश करता हूँ सुधारने की वो त्रुटि, आपका स्नेह बना रहे हम पर।"
23 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर बहुत उम्द: ग़ज़ल कही आपने, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'चार महीने खेल के दिल को थोड़ दिया' इस मिसरे में टंकण त्रुटि सुधार लें ।"
yesterday
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]जब आँखों को दरिया करने का मन हो तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ [2]दिन से रात तलक मैं तुमको रोता हूँ तुम भी मुझको आठ-पहर रोना जानाँ [3]अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ [4]तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी सीखो ख़ुद से मिलकर ख़ुश होना जानाँ [5]आज जला दी वो वाली फ़ोटो जिसमें सूट तुम्हारे जिस्म पे था काला जानाँ [6]तुमसे पहले मैं ख़ुश रहता था लेकिन बाद तुम्हारे रंज-ओ-ग़म रहता जानाँ…See More
Wednesday
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश कर रहा हूँ  थोड़ी-थोड़ी छा गई थी धुंध गम की,  है दुआ माँ बाप की अब छट रही है.        इस शेर को यूँ कहा जाए तो ?  थोड़ी-थोड़ी छा रही है धुंध…"
Sep 13
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"प्रिय रूपम कुमार बहुत उम्दा तरही ग़ज़ल के लिए दाद -ओ-मुबारकबाद क़ुबूल करो.तज़मीन लफ्ज़ का इस्तेमाल मुझे भी खटकता रहा है,आज संशय दूर हो गया. अमीरूद्दीन साहिब को मेरी ओर से भी धन्यवाद ज्ञापित करो."
Aug 30
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे घर की कमज़ोर हैं दीवार ख़ुदा ख़ैर करे [1]कर न दें मुफ़लिसों पे वार ख़ुदा ख़ैर करे चंद पैसों के तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे [2]लौटने का मेरा है ख़ुद में इरादा लेकिन "ये सफ़र है बड़ा दुश्वार ख़ुदा ख़ैर करे" [3]नौकरी भी नहीं है हाथ में उस पर मेरा हर समेस्टर गया बे-कार ख़ुदा ख़ैर करे [4]मुझको हर सम्त से घेरा हुआ है दुश्मन ने और गर्दन पे है तलवार ख़ुदा ख़ैर करे [5]किसका दीदार हुआ था मुझे आइने में उसकी आँखें थी चमकदार ख़ुदा ख़ैर करे [6]ये वबा कोई क़यामत से तो कम…See More
Aug 30
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"आदरणीय अमीररूद्दीन साहिब, आदब, आप ने जो मार्ग दर्शन किया उस से मेरे सभी दोउन्ट क्लियर हो गए, मुझे इस विषय में ज्ञान ही नहीं था, मैं समझता था किसी का मिस्रा ले कर ग़ज़ल कह ही तो वो ताज़मीन हो गई, लेकिन अब इल्म हुआ। बहुत शुक्रिया, और ग़ज़ल पर उपस्थित दिखा…"
Aug 29
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"उस्ताद मोहतरम समर कबीर साहिब जी प्रणाम, ग़ज़ल की उपस्थिति और हौसला अफजाई का हृदय तल से शुक्रिया साहिब, आपकी इस्लाह पर अलम गौर कर रहा हूँ, जी बात सहीह है जब लुट गया तो ख़ैर किस बात की, "कैसे भाएगी गुलाबों की महक यार को अब लुट रहा इश्क़ का गुलज़ार…"
Aug 29
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"अमीर जी ने सहीह जानकारी दी है आपको , तज़मीन के बारे में अधिक जानने के लिए मेरे ब्लॉग पर मेरी कुछ तज़मीन पढ़ सकते हैं ।"
Aug 29
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, आपने बताया है कि //तज़मीं की हुई ग़ज़ल है यह, मिस्रा -रवि भसीन 'शाहिद' साहिब जी की ग़ज़ल से लिया गया है।"ये सफ़र है बड़ा दुश्वार ख़ुदा ख़ैर करे"// मुहतरम आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि…"
Aug 29
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जु साहिब जी,"
Aug 28
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"जनाब अजय गुप्ता जी, बहुत शुक्रिया आपका हृदय तल से, आपका स्नेह बना रहे बालक पर।"
Aug 28
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"मोहतरम अमीररूद्दीन साहिब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई का  शुक्रिया हृदय तल से। मैं आपकी बात पर गौर करूँगा, आपका स्नेह बना रहे।।"
Aug 28
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'किसका चेहरा हुआ दीदार मुझे आइने में' इस मिसरे का शिल्प कमज़ोर है,यूँ कर सकते हैं:; 'किसका दीदार हुआ था मुझे आईने में' 'लुट गया इश्क़ का…"
Aug 28
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"उस्ताद जी बहुत शुक्रिया मैंने आपकी बात नोट कर ली, बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है यहा आज इतनी ग़ज़ल पढ़ी और सब में कुछ न कुछ सीखा आपका ममनून हूँ, आपका स्नेह बना रहे उस्ताद जी ,,,,"
Aug 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Motihari
Native Place
Bihar
Profession
Student
About me
मुझे तो सभी बोलते है कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है -'मीत'

Rupam kumar -'मीत''s Blog

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ

और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]

जब आँखों को दरिया करने का मन हो

तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ [2]

दिन से रात तलक मैं तुमको रोता हूँ

तुम भी मुझको आठ-पहर रोना जानाँ [3]

अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम

वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ [4]

तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी

सीखो ख़ुद से मिलकर ख़ुश होना जानाँ [5]

आज जला दी वो…

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Posted on September 16, 2020 at 5:30am — 2 Comments

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे

घर की कमज़ोर हैं दीवार ख़ुदा ख़ैर करे [1]

कर न दें मुफ़लिसों पे वार ख़ुदा ख़ैर करे

चंद पैसों के तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे [2]

लौटने का मेरा है ख़ुद में इरादा लेकिन

"ये सफ़र है बड़ा दुश्वार ख़ुदा ख़ैर करे" [3]

नौकरी भी नहीं है हाथ में उस पर मेरा

हर समेस्टर गया बे-कार ख़ुदा ख़ैर करे [4]

मुझको हर सम्त से घेरा हुआ है दुश्मन ने

और गर्दन पे है तलवार…

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Posted on August 27, 2020 at 8:00am — 6 Comments

सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता

बह्र- 1222×4

ज़मीं भाती नहीं और आसमाँ अच्छा नहीं लगता

कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता[1]

मेरा दम शहर में घुटता है  कुछ दुख गाँव में भी हैं

यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]

वो अपने हाथ से जुगनू  नहीं ऊपर उड़ाता तो

सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता [3]

हमारे घर में भी ख़ुशियाँ सभी मौजूद हैं लेकिन

हमें बरसात में अपना मकाँ अच्छा नहीं लगता [4]

नहीं हो हम-सफ़र जब साथ उस तन्हा…

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Posted on August 5, 2020 at 1:00pm — 16 Comments

किनारों ने इसे बाँधा हुआ है(ग़ज़ल)

बह्र-1222/1222/122

समंदर आज तक ठहरा हुआ है

किनारों ने इसे बाँधा हुआ है[1]

जुदा आँचल से मत करना अभी तो

परिंदा छाँव में बैठा हुआ है[2]

मियाँ तक़दीर में बस मुफ़लिसों की

ज़मीन-ओ-आसमाँ लिक्खा हुआ है[3]

हमारे जिस्म की क़ीमत वही जो

हमारे इल्म में ख़र्चा हुआ है[4]

उसे तोहफे में देना आइना जो

ग़ुरूर-ए-हुस्न में डूबा हुआ है[5]

हमें लगता था तारे हम-क़दम हैं

निगाहों को बड़ा धोखा हुआ…

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Posted on July 18, 2020 at 6:30am — 4 Comments

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At 5:49pm on July 3, 2020, Chetan Prakash said…

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