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Rahila
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Rahila posted a blog post

***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला

"क्यों मिश्रा जी!आजकल किस क्षेत्र में सीजन चल रहा है।"मेज पर फ़ाइल रखने आये बाबू से उन्होंने पूछा ।साहब का आशय समझ, वह टेढ़ी मुस्कान के साथ बोला-"साहब!त्योहार तो बचे नहीं,लेकिन एक तहसील में कमलेश्वर भगवान के मंदिर चला जा सकता है।""अच्छा...! क्यों, वहाँ क्या हो रहा है ?""साहब!स्थानीय मेला लगा है।और कम से कम दस विद्यालय हैं उस क्षेत्र में ।""दस तो काफी हैं।"कहते हुए हरियाली की चकाचौंध उनकी आँखों में कौंध गयी।"नहीं साहब!दस में से सिर्फ चार पर ही जा पाएंगे,बाक़ी पर तो अपने ही लोग....हें..हें..…See More
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Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"प्रिय नीता दीदी!बहुत आभार रचना को वक़्त देने के लिए ।सादर"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"आदरणीय कबीर साहब!आदाब,आपसे तो हर रचना पर हौसला मिलता है।इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया।"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय अजय सर जी!आपकी इतनी सुंदर टिप्पणी ने मन हर्ष से भर दिया। सादर आभार"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सर जी!सादर नमन"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय विजय सर जी!सादर"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय गोपाल नारायण सर जी!सादर नमन"
Nov 11
Rahila commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post लाइलाज़ (लघुकथा)
"बहुत बढ़िया रचना हुई आदरणीय उस्मानी जी!ढेरों बधाई ।सादर"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय गजेंद्र सर जी!सादर"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय आरिफ़ सर जी!सादर"
Nov 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय मोहित जी!सादर"
Nov 11
Rahila commented on TEJ VEER SINGH's blog post लघुकथा - गिरगिट –
"बहुत सारगर्भित रचना आ.सर जी!आजकल तो गिरगिटों को भी अपनी काबिलियत पर शक़ होने लगा है नेताओं को देखकर।सादर"
Nov 11
Nita Kasar commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"बड़ी ही धीर गंभीर बात कही है।बुज़ुर्गों की दूरदर्शी नज़रें सब जानती है ।बधाई आद० राहिला जी ।"
Nov 9
Samar kabeer commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"मोहतरमा राहिला जी आदाब,उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 8
Ajay Tiwari commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"आदरणीया राहिला जी, इस कथा के मर्म में एक मार्मिक कविता है. लघुकथा के शिल्प जो कुछ बेहतर हो सकता है वह सब कुछ इसमें है. इसमें कहे हुए से जो अनकहा है वह ज्यादा असर छोड़ता है. सादर "
Nov 8
TEJ VEER SINGH commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला आसिफ़ जी।एक उत्तम लघुकथा के माध्यम से बहुत गहरी और गंभीर बात कही गयी है।"
Nov 7

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला

"क्यों मिश्रा जी!आजकल किस क्षेत्र में सीजन चल रहा है।"

मेज पर फ़ाइल रखने आये बाबू से उन्होंने पूछा ।साहब का आशय समझ, वह टेढ़ी मुस्कान के साथ बोला-

"साहब!त्योहार तो बचे नहीं,लेकिन एक तहसील में कमलेश्वर भगवान के मंदिर चला जा सकता है।"

"अच्छा...! क्यों, वहाँ क्या हो रहा है ?"

"साहब!स्थानीय मेला लगा है।और कम से कम दस विद्यालय हैं उस क्षेत्र में ।"

"दस तो काफी हैं।"

कहते हुए हरियाली की चकाचौंध उनकी आँखों में कौंध गयी।

"नहीं साहब!दस में से सिर्फ चार पर ही जा… Continue

Posted on November 16, 2017 at 12:30pm

***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)

"अरे अम्माँ ! आपको अहमदाबाद वाले सिद्दीक साहब याद हैं ?"

"आपको जानकर खुशी होगी कि हमने जो दो फ्लैट पसंद किए हैं, उनमें से एक उनके ही पड़ोस में है।इनको तो वही जम रहा है।"

"क्या कह रही हो..! सिद्दीक यहाँ है? बड़ी भली बहू थी उसकी बहुत ही मुहब्बती।"

उसका ज़िक्र आते ही उनकी आँखों में आज भी मुहब्बत उमड़ आयी।

" बस तो फिर डिसाइड हो गया। उसे ही फाइनल कर लेते हैं।क्यों अम्माँ ? सही है न..!"

"और दूसरा वाला फ्लैट कैसा है?"अम्माँ ने प्रतिप्रश्न किया।

"वह भी बहुत बढ़िया है ।कम तो कोई… Continue

Posted on November 6, 2017 at 2:00pm — 18 Comments

अपने-पराये(लघुकथा)राहिला

"तुम्हारी सारे फैसलों से मैं हमेशा सहमत रहा हूँ । लेकिन आज इस फैसले से मैं कतई सहमत नहीं।आख़िर मेरी गैरहाजिरी में ऐसा क्या हुआ कि अचानक तुमने वहां वापसी की ज़िद पकड़ ली?बड़ी भाभी या सुषमा ,किसी ने कुछ कहा क्या?"



"...."



" कुछ तो बोल बिट्टो! क्या तू भूल गयी उन लोगों ने तेरे साथ कितना गलत किया था?"

" नहीं ..,कुछ नहीं भूली, लेकिन ये भी याद है कि इन सब के बाद वह अपने व्यवहार पर शर्मिंदा भी हुए थे!"उसने सपाट भाव से उत्तर दिया।

"तू !पागल हो गयी है? कुत्ते की पूंछ कभी सीधी… Continue

Posted on October 10, 2017 at 2:29pm — 8 Comments

विकास का सफ़र (व्यंग्य)राहिला

छः पहियाँ की रेलगाड़ी ,

पब्लिक उसमें बैठी ,ठाड़ी।

आगे -पीछे ,ऊपर- नीचे,

भरे पड़े थे नर और नारी।।



दबा-दबा के ठसा -ठसा के ,

मुँह सुकोड़े नाक दबा के।

एक पे पांच, एक पे पाँच

कंडेक्टर ठूँसे बुला- बुला के।।



पसीना चू रहा ,आ रही बास,

बीड़ी जल रही आस -पास।।

उसपर चूरन कृपा हत्यारी,

दूभर हो गया लेना सांस।।



पंखा झल रहे, फूं-फूं कर रहे,

बच्चा बिलख कर कूं -कूं कर रहे।।

क्वार महीना,चटक पसीना

बस में सब अंडे से उबल… Continue

Posted on September 30, 2017 at 9:51pm — 10 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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