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Navin C. Chaturvedi
  • 43, Male
  • Mumbai, Maharashtra
  • India
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Navin C. Chaturvedi's Discussions

"OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४-(Closed Now)

Started this discussion. Last reply by Ganesh Jee "Bagi" Feb 3, 2011. 585 Replies

सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन |एक नहीं दो नहीं छह-छह ऋतुओं वाले इस देश की प्रकृति का सौंदर्य है ही सबसे निराला| शायद ही कोई साहित्यकार रहा होगा जिसकी कलम ने प्रकृति के इस अनुपम सौंदर्य पर कुछ…Continue

"OBO लाइव महा इवेंट" अंक-३

Started this discussion. Last reply by Shesh Dhar Tiwari Jan 6, 2011. 518 Replies

शीत ऋतु के आगमन के साथ ही प्रेम और फिर मुहब्बत के सागर में खूब  गोते लगाए हमने आपने | बड़ा ही आनंद आया दोस्तो, और अब बारी है नव-वर्ष से एक और नयी शुरुआत करने की |सीखने / सिखाने की पहल से जुड़ा हुआ…Continue

तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर

Started this discussion. Last reply by वीनस केसरी Feb 23, 2011. 91 Replies

कुछ मित्रों ने मुझे संपर्क किया तरही मुशायरे के बारे में जानने के लिए| तो मैने सोचा कुछ और मित्र भी होंगे जो इस बारे में जानना चाहते हों| खुद मुझे भी कुछ बातें पता नहीं हैं| इसलिए सोचा क्यूँ न एक…Continue

"OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

Started this discussion. Last reply by Navin C. Chaturvedi Dec 6, 2010. 1524 Replies

दोस्तो, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार आप सभी के स्नेह के लिए सदा अभारी है | "ओबिओ लाइव महा इवेंट" अंक-1 को मिली अपार ऐतिहासिक सफलता ( दर्जनों रचनाकारों की अनवरत २०० से अधिक रचनाओं सहित १२००+ रिप्लाई ) से…Continue

 

Navin C. Chaturvedi's Page

Latest Activity

prabhat kumar roy commented on Navin C. Chaturvedi's blog post कोई लेखक किसी भी क़ौम का चेहरा नहीं होता
"नवीन सी.चतुर्वेदी ने अर्थपूर्ण गज़ल पेश की। कविता की गहरी समझ न होने के बावजूद मैं इसकी सराहना करता हूँ।"
May 3
asha pandey ojha commented on Navin C. Chaturvedi's blog post कोई लेखक किसी भी क़ौम का चेहरा नहीं होता
"bilkul naye w tarotaza bhawon  ko samete huve behad umda Gzal "
Feb 16
Anupama and Navin C. Chaturvedi are now friends
Feb 8
Ravi Kumar Giri (Guru Jee) left a comment for Navin C. Chaturvedi
"janamdin mubarak ho"
Oct 27, 2011
nemichandpuniyachandan commented on Navin C. Chaturvedi's blog post कोई लेखक किसी भी क़ौम का चेहरा नहीं होता
"adab se pesh aanaa chahiye,sahity me sabko,koi lekhak kisi koum ka chehra nahi hota|vaah.. zara samjho ki ab to corporet bhi maanta hain ye,grahsth se juda Insan laparvaah nahi hota.vaah... bhaaee ji aapne to meri munh ki baat chin li.aabhaar"
Apr 3, 2011
वीनस केसरी replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"तिवारी जी मेरे कमेन्ट को देखने के लिए आप यह लिंक खोलें  मैंने अंतिम पेज में नहीं बीच के कमेन्ट में में रिकामेंट किया था और उसे वही देखा जा सकता है  शायद अभिनव जी के साथ भी यही हुआ होगा    मैं खुद यह बात भूल गया था नहीं तो पहले ही…"
Feb 23, 2011
Ganesh Jee "Bagi" replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"आदरणीय शेषधर सर और प्रिय अरुण भाई, फोरम का माडरेशन सामान्यतः नहीं होता है हा यदि कोई आपतिजनक पोस्ट आ जाये तो उसे प्रवंधन टीम या फोरम प्रारंभ कर्ता द्वारा हटा दिया जाता है |  यदि कोई सदस्य रिप्लाई लिख कर फिर डिलीट कर दे तो उसका notification तो…"
Feb 22, 2011
Arun Kumar Pandey 'Abhinav' replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"shesh jee कल मेरे एक फोरम पर एक सदस्य का विचार दिखा नहीं जबकी मेरे मोबाईल पर दिख रहा था | मैंने वहाँ भी लिखा है | संभवतः कुछ थ्रेड छूट जा रहे हैं |  "
Feb 20, 2011
arvind pathak left a comment for Navin C. Chaturvedi
"बंधु नवीन जी...नमस्कार...मुझको बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है इस चर्चा को पढ्कर....धन्यवाद और आभार..आपका मित्र...अरविंद पाठकअटलांटा, जॉर्जिया,अमेरिका"
Feb 11, 2011
वीनस केसरी replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"दोनों गुरु भाईयों से कान पकड़ कर माफी मांगता हूँ    यहाँ पर छोटी इता का दोष है  लगा जला में "लग" "जल" दोनों के अर्थ निकल रहे हैं और दोनों अतुकांत हैं और दोनों का वही अर्थ मिल रहा है जिस पर काफियाबंदी की गई…"
Feb 10, 2011
वीनस केसरी replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"लगा जला कफियाबंदी में  इता दोष कहाँ से घुस गया भाईयों ?"
Feb 10, 2011
Rana Pratap Singh replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"राजीव जी आप बिलकुल सही कह रहे है| यहाँ पर इता का दोष बनता है| ये एक बड़े शायर का शेर मैंने केवल काफिया समझाने के उद्देश्य से लिखा था|"
Feb 10, 2011
Rajeev Bharol replied to Navin C. Chaturvedi's discussion तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर
"तूने ये फूल जो ज़ुल्फ़ों में लगा रखा है इक दिया है जो अँधेरों में जला रखा है   क्या इस मतले में ईता दोष नहीं हुआ? मुझे तो लग रहा है इसमें ईता दोष है."
Feb 10, 2011
Ganesh Jee "Bagi" replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"महा इवेंट के समापन के समय आई इस रचना हेतु साधुवाद |"
Feb 3, 2011
GOPAL BAGHEL 'MADHU' replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"सहम क्या घास गयी है हिम से (मधु गीति सं. १५३९, रचना दि. २६ नवम्बर, २०१०)     सहम क्या घास गयी है हिम से, बढ़ नहीं पा रही खुले दिल से; शिशिर   की आहटों की श्रंखल  से, सिमट क्या वह गयी हे धरती से.    बड़े उत्साह से थी वह…"
Feb 3, 2011
वीनस केसरी replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"नवीन जी  मैंने तो आपसे भी कहा था कि नियम का उल्लंघन हो रहा हो तो पोस्ट हटा दीजियेगा  पोस्ट को प्रकाशित करने से पहले मैंने गणेश जी से चैट पर इस विषय में नियम पूछे थे मगर गणेश जी व्यस्तता कि वजह से तुरंत जवाब नहीं दे पाए अगर उन्होंने पोस्ट…"
Feb 3, 2011
Ganesh Jee "Bagi" replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"बहुत बढ़िया कस्तूरिया जी, आपके पहले पोस्ट का स्वागत है OBO महा इवेंट मे,  अमवा की हर डाली पर बौर आई !! बाग- बगीचे....अमवा कहना बिलकुल आम जन की भाषा मे बात करती यह रचना है , बधाई भाई, इस खुबसूरत रचना हेतु |"
Feb 3, 2011
Ganesh Jee "Bagi" replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"waah वाह बेहद खुबसूरत नज्म प्रस्तुत किया है आपने .... सुलगते हैं रातों को बेवफ़ा से ये पल मुहब्बत ने रांझे को आवाज़ लगाई है क्या बात है , मुहब्बत ने रांझे को आवाज लगाई, बहुत बढ़िया ,   न धुआं , न आग , न राख़ है  कहीं बसंत ने यूँ…"
Feb 3, 2011
वीनस केसरी replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"बेहतरीन हाईकू    बहुत पसंद आये "
Feb 3, 2011
Navin C. Chaturvedi replied to Navin C. Chaturvedi's discussion "OBO लाइव महा इवेंट" अंक- ४
"आप सभी साहित्य प्रेमियों ने इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया| अपनी अनुपम रचनाओं से इस आयोजन को गरिमा प्रदान की, उस के लिए मैं आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ|"
Feb 3, 2011

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Mathura
Profession
Security system consultants
About me
an average indian

Navin C. Chaturvedi's Blog

कोई लेखक किसी भी क़ौम का चेहरा नहीं होता

Posted on January 30, 2011 at 8:17am 9 Comments

हमें इक दूसरे से गर गिला शिकवा नहीं होता|

तो फिर गैरों ने हम को इस तरह बाँटा नहीं होता|१|



नयों को हौसला भी दो, फकत ग़लती ही ना ढूँढो|

बड़े शाइर का भी हर इक शिअर आला नहीं होता|२|



हज़ारों साल पहले… Continue

परतन्तर की हार हुई, हमने परजातन्तर पाया|

Posted on January 26, 2011 at 9:32am 6 Comments

गणतंत्र दिवस की शुभ कामनाएँ

हर इक हिन्दुस्तानी जब खुल कर अपनी ज़िद पर आया|
परतन्तर की हार हुई, हमने परजातन्तर पाया|१|

जिनके नाम पता उनको तो दिल्ली याद करेगी ही|
हम उनको भी याद करें दिल्ली ने जिनको बिसराया|२|

वंदे मा$तरम को गा कर अजब सुकूँ सा मिलता है|
उस का रौब अलग होता जिसने कि तिरंगा फहराया|३|

छुट्टी का कारण बन के रह जाए ना गणतंत्र दिवस|
इसीलिए मैने बच्चों सँग राष्ट्र-गान तन कर गाया|४|

छंद - अमृत-ध्वनि - मकर संक्रांति

Posted on January 15, 2011 at 12:10pm 2 Comments

जीवन हिल मिल कर जियो, दूर करो हर भ्रांति|

सब से ये ही कह रहा, पर्व मकर संक्रांति||

पर्व मकर संक्रांति, सु-लायक, शांति प्रदायक|

नीति विधायक, प्रीति सु-भायक, रीति निभायक|

शुभ वरदायक, मंगल गायक, नायक जन-मन|

सदगुणदायक, दोष नशायक, दायक… Continue

बंद रास्ता

Posted on January 11, 2011 at 12:53pm 11 Comments

ये शोरगुल बेइन्तेहा, दम घोंटता धुँआ|

अब छोड़ कर जाएँ इसे तो जाएँ भी कहाँ?



उस गाँव की मिट्टी में कीटाणु घने दिखे|

इस वास्ते हमने शहर के फ़ैसले लिखे|

अब शहर भी मिट्टी बना उड़ता यहाँ वहाँ!

अब छोड़ कर जाएँ इसे तो जाएँ भी कहाँ?



उफ़ भूख थी कितनी, वनों को भी पचा गये|

कुछ घास बच गयी थी, हम उस को भी खा गये|

अब सामने 'ओज़ोन' है, और सहमता जहाँ!

अब छोड़ कर जाएँ इसे तो जाएँ भी कहाँ?



लागत बने थे कौन और कीमत किन्हें मिलीं?

किनने बनाए महल, और किनकी… Continue

Comment Wall (40 comments)

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At 1:39pm on October 27, 2011, Ravi Kumar Giri (Guru Jee) said…

janamdin mubarak ho

At 4:59am on February 11, 2011, arvind pathak said…
बंधु नवीन जी...
नमस्कार...
मुझको बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है इस चर्चा को पढ्कर....
धन्यवाद और आभार..
आपका मित्र...
अरविंद पाठक
अटलांटा, जॉर्जिया,
अमेरिका
At 11:17am on February 3, 2011, कवि - राज बुन्दॆली said…
बारहमासी,,,,,,,,,,,,
_________________________
अमुआ जामुन महुआ बौराने, बौराने साधू संत !
सखी री,आवन लग्यॊ बसंत, सखी री आवन,,,,,,

चैत मास मॊहि चैन न आवॆ,
बैसाखी मॊरॆ मन नहि भावॆ,
यॆ जॆठ दुपहरी जिया जरावॆ,
हैं परदॆश बसॆ मॊरॆ कंत,सखी री आवन लग्यॊ बसंत !!
सखी री आवन लग्यॊ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जियरा मॊरॆ चढ़ी आसाढ़ी,
सावन मन बॆचैनी बाढ़ी,
निशदिन द्वारॆ ठाढ़ी ठाढ़ी,
शाकुन्तल दॆख रही दुश्यंत, सखी री आवन लग्यॊ बसंत !!
सखी री आवन लग्यॊ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

भादॊं रैन घटा अंधियारी,
क्वांर कलॆजॆ चलॆ कटारी,
अगहन यौवन की फुलवारी,
अब मन भय़ॊ निराला पंत, सखी री आवन लग्यॊ बसंत !!
सखी री आवन लग्यॊ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

पौष मास जाड़ॆ की रात,
माघ सजन की मीठी बात,
फागुन सूखॊ बीतॊ जात ,
है कहां बिरह कॊ अंत , सखी री आवन लग्यॊ बसंत !!
सखी री,आवन लग्यॊ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

       कवि-राजबुँदॆली
At 10:42am on February 3, 2011, vandana gupta said…
शुक्रिया नवीन जी।
At 1:26pm on January 26, 2011, Rajendra Swarnkar said…
********************************
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं !
********************************

राजेन्द्र स्वर्णकार
swarnkarrajendra@gmail.com
http://shabdswarrang.blogspot.com

जयहिंद
At 2:04am on January 1, 2011, धर्मेन्द्र कुमार सिंह said…
नवीन भाई आपसे तरही मुशायरे के बारे में सुनकर ही मैं ओबीओ पर आया था इसलिए आप विशेष धन्यवाद के पात्र हैं। यहीं पर आकर मुझे ग़ज़ल के बारे में थोड़ा बहुत ज्ञान हुआ। इसके लिए भी मैं आपका आभारी हूँ। सादर
At 8:35am on December 16, 2010, shyama singh said…

dhanywad chaturvedi ji

At 12:26am on December 2, 2010, Azeez Belgaumi said…
Dhanyavad chaturvedi ji...
Shayad aap ke saath khub guzare gi... Hindi meiN jald hazir ho jaaunga....AZEEZ BELGAUMI
At 1:04pm on November 30, 2010, DEEPAK SHARMA KULUVI said…
NAVIN JI
KAHE KE LIYE AAPKI HONSLA AFZAI KE LIYE AAPKA AUR BAGI SAHIB JI SHUKRIYA
DEEPAK KULUVI
At 1:25pm on November 28, 2010, Lata R.Ojha said…
पढ़ने के लिए और सराहने के लिए धन्यवाद नवीन जी :)
 
 
 

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