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Mohit mishra (mukt)
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JAWAHAR LAL SINGH commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा
"बहुत ही सुन्दर गीत बना है, आदरणीय मोहित मिश्र जी. मेरी पसंद की पंक्तियाँ  उम्र भर आधार देकर है विरह का ऋण चुकाना, अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।"
Feb 6
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बहुत शुक्रिया "
Feb 5
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा
"आदरणीय समर sir तारीफ़ का हृदय से आभार "
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा
"आ. भाई मोहित जी, सुंदर गीत हुआ है हार्दिक बधाई ।"
Feb 5
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा
"जनाब मोहित जी आदाब,अच्छा गीत लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा

चिर अखण्डित वेदना को कर समर्पित प्राण अपने-ध्वंस के अवशेष पर नित नेह का दीपक जलाना,अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।मौन अधरों पर तरंगितहै व्यथा का पूर्ण सागर,शून्य पथ पर हेरती हैदृष्टि तुमको छल-छलाकर,है असम्भव आगमन इस तज्य मंदिर से हृदय में-पर प्रणय की पूजिता की याद में ख़ुद को भुलाना,अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।श्वास में क्रंदन छुपाएचढ़ रहे  संताप-रथ पर,मोम के दुकूल पहनेबढ़ रहे अंगार-पथ पर,ज्ञात है दुष्चक्र नियति का नहीं है मेरे बस में-मेरे बस में बस सिसकना और तड़पकर…See More
Feb 3
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post मानव पंछी संवाद (अतुकांत )
"वाह। ग़ज़ब। बेहतरीन व उम्दा सार्थक उद्देश्यपूर्ण सृजन के लिए हार्दिक बधाइयां आदरणीय मोहित मिश्रा 'मुक्त' साहिब।"
Oct 22, 2018
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

मानव पंछी संवाद (अतुकांत )

अचानक से,आकर मुझसे,इठलाता सा पंछी बोला।ईश्वर से मानव ने तो,उत्तम ज्ञान-दान था मोला।ऊपर हो तुम सब जीवों में,एक अकेली जात अनोखी,ऐसी क्या मजबूरी तुमको-ओट रहे होंठों की शोख़ी?और सताकर कमज़ोरों को-अंग तुम्हारा खिल जाता है,अ: तुम्हें क्या मिल जाता है?मैंने कहा:-कहो-खगगर्व से, किघर तुम्हारा-चल रहा है,छोटी सी-जगह में, पर-झगड़े का,टकराव का,ठौर नहीं है उसमें।डाली से दूर,ढलता सूरज,तरावट देता है-थकावट नहीं! क्योंकि-दम्भ नहीं है तुममेंधन-धर्म-सामर्थ्य का।नहीं तो देखो,प्रगतिशील मानव,फ़रेब का पुतला-बना बैठा…See More
Oct 22, 2018
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

मानव पंछी संवाद (अतुकांत )

अचानक से,आकर मुझसे,इठलाता सा पंछी बोला।ईश्वर से मानव ने तो,उत्तम ज्ञान-दान था मोला।ऊपर हो तुम सब जीवों में,एक अकेली जात अनोखी,ऐसी क्या मजबूरी तुमको-ओट रहे होंठों की शोख़ी?और सताकर कमज़ोरों को-अंग तुम्हारा खिल जाता है,अ: तुम्हें क्या मिल जाता है?मैंने कहा:-कहो-खगगर्व से, किघर तुम्हारा-चल रहा है,छोटी सी-जगह में, पर-झगड़े का,टकराव का,ठौर नहीं है उसमें।डाली से दूर,ढलता सूरज,तरावट देता है-थकावट नहीं! क्योंकि-दम्भ नहीं है तुममेंधन-धर्म-सामर्थ्य का।नहीं तो देखो,प्रगतिशील मानव,फ़रेब का पुतला-बना बैठा…See More
Oct 20, 2018
Mohit mishra (mukt) commented on V.M.''vrishty'''s blog post कविता का जीवन
"प्रिय वृष्टि, ख़ूबसूरत और प्रभावशाली रचना के लिए बधाई"
Oct 11, 2018
Mohit mishra (mukt) and V.M.''vrishty'' are now friends
Oct 11, 2018
V.M.''vrishty'' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post मेरे प्यार!
"मोहित जी! बहुत ही हृदयस्पर्शी प्रस्तुति। जान पड़ता है कि ये महज़ एक कविता नहीं,, स्वानुभव है आपका। पीड़ा की गहराई साफ झलक रही। "
Oct 10, 2018
V.M.''vrishty'' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आत्मकेंद्रण या अभिव्यक्ति:-(छंदमुक्त कविता)
"मित्र मोहित जी! आत्मकेन्द्रण या अभिव्यक्ति,,,इस माध्यम से प्रेम की गहराइयों को बहुत ही सुंदर पंक्तियों में पिरोया है आपने। बहुत बहुत बधाई!"
Oct 10, 2018
Mohit mishra (mukt) commented on V.M.''vrishty'''s blog post शहीदों के नाम....
"बहुत ख़ूब ........बेमिसाल "
Oct 10, 2018
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post श्री अटल-मृत्यु संवाद:- कविता
"जनाब मोहित मिश्रा जी आदाब,अच्छी कविता हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 18, 2018
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post श्री अटल-मृत्यु संवाद:- कविता
"श्रद्धांजलि स्वरूप समसामयिक बढ़िया सृजन। इस मंच के काव्य-विधा/छंद संबंधित आलेख व आयोजनों के अध्ययन कर आप इसे बढ़िया छंदबद्ध भी कर सकते हैं। हार्दिक बधाइयां आदरणीय  मोहित मिश्र 'मुक्त' साहिब।"
Aug 18, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
allahabad
Native Place
allahabad univercity
Profession
student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

Mohit mishra (mukt)'s Blog

वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा

चिर अखण्डित वेदना को कर समर्पित प्राण अपने-

ध्वंस के अवशेष पर नित नेह का दीपक जलाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर…

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Posted on February 3, 2019 at 7:23am — 5 Comments

मानव पंछी संवाद (अतुकांत )

चानक से,

कर मुझसे,

ठलाता सा पंछी बोला।

श्वर से मानव ने तो,

त्तम ज्ञान-दान था मोला।

पर हो तुम सब जीवों में,

क अकेली जात अनोखी,

सी क्या मजबूरी तुमको-

ट रहे होंठों की शोख़ी?

र सताकर कमज़ोरों को-

अंग तुम्हारा खिल जाता…

Continue

Posted on October 22, 2018 at 8:30am — 1 Comment

श्री अटल-मृत्यु संवाद:- कविता

कहा मौत ने श्री अटल से, वक़्त गया जाने का,

स्वर्ग से आदेश मुझे है, आपको वहाँ लिवाने का।

पर साधारण नर नहीं…

Continue

Posted on August 16, 2018 at 10:00pm — 2 Comments

आत्मकेंद्रण या अभिव्यक्ति:-(छंदमुक्त कविता)

प्रेम का स्वरूप क्या है?

आत्मकेंद्रण या अभिव्यक्ति ?

असंभव सा है, इस प्रश्न का-

निष्कर्षतः एक समुचित उत्तर। 

प्रकृति और पुरुष ब्रह्म,

युग प्रेम के आदि प्रवर्तक,

आकाश सा उन्मुक्त-

स्वछंद पवन सा-

धरा से भी गंभीर उनका प्यार,

अभिव्यक्ति की अभिव्यंजना से दूर-

एकात्म में ही लीन दोनों तत्व ,

हो पृथक जिनका नहीं है अर्थ कोई,

चिर-मौन में हैं साधते वे सत्व ,

इसलिए मन को कभी आभास होता,

स्वरबद्ध करने की जरूरत है नहीं-

अपने…

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Posted on August 5, 2018 at 2:12pm — 7 Comments

 
 
 

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