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Mohit mishra (mukt)
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Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते:-मोहित मुक्त
"आदरणीय विजय सर , तारीफ का शुक्रिया"
Wednesday
vijay nikore commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते:-मोहित मुक्त
"रचना अच्छी लिखी है। बधाई।"
Tuesday
Mohit mishra (mukt) commented on Sushil Sarna's blog post यौवन रुत ...
"उत्तम रचना आदरणीय  हार्दिक बधाई "
May 14
Mohit mishra (mukt) commented on vijay nikore's blog post विरह रो रहा है... मिलन गा रहा है
"बहुत ख़ूब आदरणीय विजय सर  प्यार के अनुभूति की बेहतरीन अभिव्यक्ति  बधाई ।"
May 14
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते:-मोहित मुक्त
"आदरणीय समर सर , नमस्कार  आपकी रचना पर उपस्थिति और उत्साह बढ़ाने का बहुत बहुत आभार "
May 13
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते:-मोहित मुक्त
"जनाब मोहित मिश्रा मुक्त जी आदाब, उम्दा रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते:-मोहित मुक्त

जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।आंखे गातीं अनुराग राग ,जी से मिट जाता विराग ,उन्माद भरे किसलय दोनों ,अधरों पर ढुल-ढुल जाते ,जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।अनुकंपित होता प्राण सखी ,स्पंदन युत निर्वाण सखी ,विप्लव, विषाद सूनी रातें ,सब लम्हों में धुल-धुल जाते ,जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।मदमाते पुष्प नवीन विशद ,उमड़ा आता मधुभावित नद ,पलकों के अज्ञात-ज्ञात ,अवगुंठन सब खुल-खुल जाते,जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।मौलिक और अप्रकाशितSee More
May 13
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"उत्साह वर्धन का बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय डॉ जी"
May 9
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"आदरणीय मोहित जी आपने मोहित कर लिया विल्कुल छायावादी रचनाओं की तरह लिखा आपने…"
May 8
Mohit mishra (mukt) commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post श्रमिकों के जीवन पर आधारित मेरे 21 दोहे
"बहुत ही अच्छे दोहे आदरणीय , हार्दिक-बधाई"
May 8
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"आदरणीय सुरेंद्र जी , उत्साह वर्धन का शुक्रिया। अगली रचना उनकी बातों को ध्यान में रखकर लिखूंगा"
May 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"आद0 मोहित मिश्र जी सादर अभिवादन। बढिया सृजन पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये। आरिफ भाई जी के बातों का संज्ञान लीजियेगा"
May 8
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"आदरणीय सोमेश जी बहुत बहुत आभार ।"
May 8
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"आदरणीय आरिफ़ जी आदाब, रचना पर अमूल्य विचार देने और त्रुटि अवलोकन का आभार। आपकी बातें वाकई सही है।"
May 8
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"आदरणीय समर सर आदाब, रचना अवलोकन का तहे दिल से शुक्रिया"
May 8
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post वियोग (कविता):- मोहित मुक्त
"जनाब मोहित मुक्त जी आदाब,बहुत उम्दा कविता,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 7

Profile Information

Gender
Male
City State
allahabad
Native Place
allahabad univercity
Profession
student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते:-मोहित मुक्त

जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।

आंखे गातीं अनुराग राग ,

जी से मिट जाता विराग ,

उन्माद भरे किसलय दोनों ,

अधरों पर ढुल-ढुल जाते ,

जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।

अनुकंपित होता प्राण सखी ,

स्पंदन युत निर्वाण सखी ,

विप्लव, विषाद सूनी रातें ,

सब लम्हों में धुल-धुल जाते ,

जो तुम मुझमे घुल-घुल जाते।

मदमाते पुष्प नवीन विशद ,

उमड़ा आता मधुभावित नद ,

पलकों के अज्ञात-ज्ञात ,

अवगुंठन सब खुल-खुल…

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Posted on May 12, 2018 at 10:22pm — 4 Comments

वियोग (कविता):- मोहित मुक्त

नीरव निशा, निःशब्द दिशा में ,

तारे-विहीन अंबर के निचे ,

प्रेम-अनल की हिमशिखा से,

जल-जल अपना अंतस सींचे।

मर्म लक्ष्य कर व्यंग विशिख को ,

निष्ठुर ने ब्याल सरीखे छोडे ,

मैं विकल तड़पता रहा अकिंचन ,

सहला-सहला दिल के फोड़े।

दृग में आँसू की माला टूटी ,

बिखरे मुक्ताहल गालों पर ,

ब्यथा-उर्मि करुणा-सिंधु की ,

देती दस्तक उर-छालों पर |

एक शून्य उतर सा आया ,

इस जीवन के आंगन में ,

और पर्व मना है इसका ,

किसी निर्दय…

Continue

Posted on May 6, 2018 at 12:32pm — 10 Comments

सीता वनवास (प्रथम भाग):-1 (छंदमुक्त )

लौटे राघव, जनपद भ्रमण कर, हतोत्साहित उदास ,

स्कंध निचे, द्रवित हृदय, उद्वेलित मन, कम्पित श्वास,

चिंतित मन, बार-बार करते हृदय कठोर,

पर कानों में पुनः-पुनः गुञ्जित होता वहीं शोर,

हाय निष्कपट प्रजा यह, पर बुद्धिहीन ,

अंतः विषाद से हो उठा श्याम-मुख-मलिन,

यह कैसा विकट शत्रु बन खड़ा राजधर्म ,

प्रजा बेध रही ब्यंग-विशिख से राम मर्म ,

और राम ! प्रत्युत्तर में विकल, ठगे से मौन ,

सोच रहे मुझसे हतभागा है धरा पर कौन?

हाय माता का ही नहीं…

Continue

Posted on April 5, 2018 at 7:00am — 4 Comments

होली और यादें :-मोहित मुक्त

फिर से होली आ गयी है ,

यादें मन में छा गयीं हैं ,

यादों का है क्या ठिकाना ,

इनका तो है आना जाना।

पर वो होली और थी जब ,

घर की घर में साथ थे सब ,

माँ के हाथों की मिठाई ,

मानो अमृत में डुबाई।

पिताजी का प्यार देना,

स्नेह से यूँ निहार देना ,

उनकी आँखों का मैं तारा ,

उनके प्राणों का सहारा।

आज घर से दूर हूँ मैं ,

दूर क्या मजबूर हूँ मैं ,

रंग होली के मुझे अब,

चुभते हैं काँटों से सब।

फिर से…

Continue

Posted on March 1, 2018 at 8:34am — 10 Comments

 
 
 

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