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Mohit mishra (mukt)
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"बहुत खूब, हार्दिक बधाई।"
Feb 11
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"आदरणीय सोमेश कुमार जी हौसलाअफजाई के लिए धन्यवाद"
Feb 8
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"आदरणीय सुरेंद्र जी नमस्कार , रचना अवलोकन और उत्साह-वर्धन का शुक्रिया"
Feb 8
somesh kumar commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"जो सपने मैने पाल लिए-अंतर-मन की आँखों में ,भर हौसला उड़ चला जो-बाजु की दो पाँखो में ,तब मत सोचो थककर के-पथ छोड़ अधूरा आउंगा,या तो मंजिल मिल जाएगी-या मृत्यु को गले लगाउंगा ,यह मन में शंका मत पालो-मैं नत होकर झुक जाऊंगा। ये मत सोचो रुक…"
Feb 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"आद0 मोहित जी सादर अभिवादन। बढिया रचना,इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये।"
Feb 7
Mohit mishra (mukt) commented on Mohammed Arif's blog post कविता--बहुत बेईमानी लगता है
"आदरणीय आरिफ जी आदाब ,अच्छी रचना के लिए बधाई। जहाँ कविता की नदी सूखकर रेत हो गई हैगर्म रेत पर सौंदर्यानुभूति तड़पती है... सत्य को प्रकट करती रचना"
Feb 6
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"सुश्री रक्षिता जी नमस्कार ,आपको रचना पसंद आयी , अहोभाग्य। हौसलाअफजाई का शुक्रिया"
Feb 6
Rakshita Singh commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"आदरणीय मोहित जी, आत्मविश्वाश से परिपूर्ण बहुत ही प्रेरणादायक  पंक्तियाँ....सुन्दर रचना। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 6
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त

ये मत सोचो रुक जाऊंगा।बेताब लहर के धक्कों से -नौका चूर हो जाएगी,नियति की वक्र नजर मुझपर -माना की क्रूर हो जाएगी ,तूफां हठ ठान भले ही ले-कर ले चाहे लाख जतन ,जीवन यज्ञ आहुति में -हो जाये मेरा सर्वस्व हवन,पर जबतक धड़कन जिन्दा है-ये मत सोचो झुक जाऊंगा। ये मत सोचो रुक जाऊंगा। ये मत सोचो रुक जाऊंगा।पग-पग पर शूल मिलें चाहे-राहों में तप्त अंगारे हों। पावों में छाले पड़ जाएं या-रोम-रोम प्यास के मारे हों। मार्ग कठिन कितना कर लें -मंजिल के जो हैं प्रहरी।भाग्य रेखाएं भी रच लें -खिलाफत में साजिश गहरी ,पर जबतक…See More
Feb 6
Mohit mishra (mukt) commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"आदरणीय रक्षिता सिंह जी नमस्कार, दिल के भावों को सरल शब्दों में बेहतरीन ढंग से व्यक्त करने के लिए हार्दिक बधाई।"
Feb 5
Mohit mishra (mukt) commented on Mohammed Arif's blog post देशभक्ति मुक्तक
"आदरणीय आरिफ जी आदाब , अच्छे मुक्तक रचे अपने , बधाई"
Jan 28
Mohit mishra (mukt) commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post देश भक्ति पर आधारित वीर रस की कविता (ताटंक छंद)
"आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब, कब तक किसी फ़टी चादर को, पूरा कुनबा ओढ़ेगा कब तक जेठ दुपहरी में भी, बूढ़ा पत्थर तोड़ेगा अच्छी रचना के लिए कोटिशः बधाई "
Jan 28
Mohit mishra (mukt) commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"आदरणीय सलीम जी उम्दा ग़ज़ल, बहुत बहुत मुबारकबाद "
Jan 22
Mohit mishra (mukt) commented on rajesh kumari's blog post मखमल के गद्दों पे गिरगिट सोए हैं (नवगीत 'राज')
"आदरणीय राजेश कुमारी जी आदाब,   वर्तमान समाज की दशा का परदाफ़ाश करती रचना के लिए हार्दिक बधाई। देशज शब्दों के प्रयोग ने रचना को आत्मीयता प्रदान की है - अच्छा प्रयोग।"
Jan 22
Mohit mishra (mukt) commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"आदरणीय आरिफ जी आदाब , साधारण शब्दों में बसंत की खूबसूरत अगवानी की , बधाई।"
Jan 22
Mohit mishra (mukt) commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज
"आदरणीय बृजेश जी बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई"
Jan 22

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Male
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allahabad
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allahabad univercity
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student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त

ये मत सोचो रुक जाऊंगा।

बेताब लहर के धक्कों से -

नौका चूर हो जाएगी,

नियति की वक्र नजर मुझपर -

माना की क्रूर हो जाएगी ,

तूफां हठ ठान भले ही ले-

कर ले चाहे लाख जतन ,

जीवन यज्ञ आहुति में -

हो जाये मेरा सर्वस्व हवन,

पर जबतक धड़कन जिन्दा है-

ये मत सोचो झुक जाऊंगा।

ये मत सोचो रुक जाऊंगा।

ये मत सोचो रुक जाऊंगा।

पग-पग पर शूल मिलें चाहे-

राहों में तप्त अंगारे हों।

पावों में छाले पड़ जाएं या-

रोम-रोम प्यास के मारे…

Continue

Posted on February 6, 2018 at 3:31pm — 7 Comments

आवाहन(कविता ):-मोहित मुक्त

अंगार भर लो लोचनों में, श्वांस में फुंफकार हो ,

नस-नस अनल से पूर्ण हो , पुरुष्त्व का संचार हो।

विश्वास जन का खोकर भी सत्तासीन हो जाते हैं।

जो हर चुनावी परिवेश में नए प्रपंच रचाते हैं।

वैसे दागी लोग न जाने क्यों हमारे नायक हैं ?

क्या वे लोग ही हमपर शासन करने लायक हैं ?

जैसे मृगेंद्र के पुत्रों पर भेड़ियों का बर्चस्व हो।

जैसे गर्दभ-दौड़ में कोई हारता सा अश्व हो।

वैसे ही आज अयोग्य हाथों में हमारा देश है।

फिर भी सुप्त…

Continue

Posted on January 6, 2018 at 9:30pm — 12 Comments

ऐ जाने वाले पल कह दे, इस आने वाले पल से:-मोहित मुक्त

उम्मीदें बहुत हैं, आने वाले कल से।

ऐ जाने वाले पल कह दे,

इस आने वाले पल से।

यह वर्ष भला हो मधुमय हो,

सत्पथ की राह पे तन्मय हो,

यह खुशियों का उजियाला लाये ,

यह शांति-प्रेम का भाव सिखाये ,

इस वर्ष खड़ें हों हटकर ,

कपट-द्वेष से, छल से।

ऐ जाने वाले पल कह दे, .

इस आने वाले पल से।

यह साल नए कुछ घाव न दे ,

असमय-अनुचित वर्ताव न दे ,

इस साल कोई अवसाद न हो ,

किसी से कुछ दुर्वाद न…

Continue

Posted on January 1, 2018 at 12:30am — 14 Comments

आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त

आज फिर दर्द छलका।

आँख फिर आज रोयी।

प्रिये, दिल ने फिर से-

स्मृतियाँ संजोई।

शिशिर रात में वह-

प्रणय के मधुर क्षण।

चांदनी की चादर पर -

हम और तुहिन-कण।

नर्म लबों पर-

पीयूष सा वो पानी।

हौले हवा में -

वो घुलती जवानी।

पल पास हैं सब-

तुम हीं हो खोयी।

आज फिर दर्द छलका।

आँख फिर आज रोयी।



शलभ बन जला मैं,

शिखा प्यार की थी।

बात इच्छाओं के,

बस सत्कार की थी।

जुदा मोड़ पर ,

आज दोनों खड़े…

Continue

Posted on November 20, 2017 at 8:30am — 13 Comments

 
 
 

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