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Mohit mukt
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Mohit mukt added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
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मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो ,मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ना मुख चंद्र दिखायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।बहुत सुनिन्ह है तोरे बतिया ,तुम बिन गुजरे ना दिन रतिया ,राधा के ओ मोहन प्यारे -२मोको बहुत सतायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।साँवले मुख पै दधि लपटाए,ग्वालिन तुमहुँ माँ पहिं लाये ,ओ घड़ी जैसी तुम्हरी सूरत -२मोके वैसी ही दिखायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।मौलिक और अप्रकाशितSee More
Mar 29
Mohit mukt joined Admin's group
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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,See More
Mar 29
Mohit mukt commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जब हवा बदली हुई है)
"आदरणीय मनन कुमार जी बेहतरीन ग़ज़ल, मुबारकबाद पेश करता हूँ"
Mar 29
Mohit mukt commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post निकलना एक दिन है इस मकाँ से
"आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है , मुबारकवाद कुबूल फरमाएं "
Mar 29
Mohit mukt commented on Dr.Prachi Singh's blog post मन में रोंपा है हमने तो केवल केसर ..... नवगीत //प्राची
"आदरणीया प्राची सिंह जी प्रेम भावों के साथ बढ़िया प्रयास। मन प्रसन्न हो गया "
Mar 29
Mohit mukt commented on Hemant kumar's blog post ग़ज़ल
"जनाब हेमन्त कुमार जी आदाब, शेर दर शेर जबरजस्त ग़ज़ल "
Mar 29
Mohit mukt commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  बहुत बहुत धन्यवाद "
Mar 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"आदरणीय मोहित मुक्त जी सादर अभिवादन, बहुत अच्छी ऐतिहासिक घटनाओं का आधार लेकर सरल शब्दों में उमड़ा सृजन, बधाई।"
Mar 29
Samar kabeer commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"ये मंच सीखने सिखाने में अपना सानी नहीं रखता,मुतमइन रहिये ।"
Mar 28
Mohit mukt commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"मैं तो अभी सीख रहा हूँ आप जैसों का मार्गदर्शन मिलता रहे तो बड़ी कृपा होगी। "
Mar 28
Samar kabeer commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"बहुत ख़ूब है भाई ।"
Mar 28
Mohit mukt commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"आदरणीय  Samar kabeer जी आपका स्नेह प्राप्त हुआ मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है। यह रचना रामधारी जी की काब्य शैली पर आधारित है, मैं उनका प्रशंसक भी हूं "
Mar 28
Samar kabeer commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"जनाब मोहित मुक्त जी आदाब,इतिहास के पन्नों से बहुत उम्दा सिलसिला है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । ये रचना किस विधा में है ?"
Mar 28
Mohit mukt commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"आदरणीय  Sushil Sarna  जी उत्साहवर्धन के लिए सहृदय धन्यवाद "
Mar 28
Sushil Sarna commented on Mohit mukt's blog post रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त
"आ.मोहित मुक्त जी इस ऐताहिसिक सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। "
Mar 28
Mohit mukt shared their blog post on Facebook
Mar 28

Profile Information

Gender
Male
City State
allahabad
Native Place
allahabad univercity
Profession
student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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Mohit mukt's Blog

रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त

अँधेरी रात थी पंक्षी चहककर निवीणो मे सुप्त थे।

पर बुन्देल की दो नारियों के नयन निंद्रा मुक्त थे।

अनिरुद्ध रानी शीतला के मांग सुहाग की लाली।

सारन्धा थी उस योद्धा की भोली बहन मतवाली।

था वक्त जब योद्धाओं को बाहुबल की आन थी।

रणक्षेत्र की शौर्यगाथाएं उनकी प्रखर पहचान थी।

तब युद्धभूमि से जीतकर हीं आना था तो आते थे।

वरना मस्तक रणदेवी को हँसते हंसते चढ़ाते थे।

अनिरुद्ध था बुंदेलों की आँखों का चमकता तारा।

दोस्तों का परम दोस्त…

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Posted on March 28, 2017 at 9:30am — 9 Comments

क्या कभी अरमानो को ,सीने में कुचला है आपने (कविता):-मोहित मुक्त

क्या कभी अरमानो को, सीने में कुचला है आपने ?

जब मन उड़ता रहे आकाश में ,

जब उमंग हो हर साँस में ,

जब दिल मल्हार गाता रहे ,

जब स्वप्न पटल पर छाता रहे ,

क्या जज्बातों को तब , पैरों तले मसला है आपने ?

क्या कभी अरमानो को, सीने में कुचला है आपने ?

प्रजा के ब्यङ्ग बाणों से आहत ,

कुचल स्वामी के संग की चाहत ,

जैसे राजरानी बन को चले ,

जैसे श्रीराम को मर्यादा छले ,

क्या कभी खुद को खुद से, वैसे हीं छला है आपने ?

क्या कभी…

Continue

Posted on March 21, 2017 at 12:00am — 4 Comments

अरे पगली (याचना} (कविता ):- मोहित मुक्त

अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

लौट के आज न बहो में , तड़पती है क्यूँ|

अब रूठ के मुझसे ,सताती है क्यूँ |

पहले मेरे उदासी पर रो देती थी तू,

आज मुह फेर के मुझको रुलाती है क्यूँ |

आज भी तुझे खोने से डरता हूं मैं |

अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

मेरी शैतानी भरी बातों पर मुझको डाँटेगा कौन,

अपना सुख दुःख मेरे साथ बांटेगा कौन,

गम के झंझावातो में किसके पास जाऊंगा मैं,

ख़ुशी में भर बांहो में किसे उठाऊंगा…

Continue

Posted on March 19, 2017 at 9:22am — 3 Comments

ना जाने दिल क्यों खोजता है (कविता):- मोहित मुक्त

ना जाने दिल क्यों ढूंढता है|

वो खुशबु तेरे बालों की,

वो लाली तेरे गालों की,

दृग कजरारे तेज कटार से ,

लब पगे है जो रसधार से,

चंचल मीठी मुस्कान को ,

ज्यो साधु खोजे भगवन को ,

तुम ईष्ट हो या प्रेयसी,

मन दो पल रुक से सोचता है|

ना जाने दिल क्यों ढूंढता है|

वो लम्हे कितने प्यारे थे,

आप जो साथ हमारे थे,

थोड़ी बहुत ख़ामोशी थी,

बस पत्तों की सरगोशी थी,

जब सांसे अपनी टकराती थी,

क्या अदा से तुम शर्माती…

Continue

Posted on March 18, 2017 at 9:36am — 8 Comments

 
 
 

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