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Mohit mishra (mukt)
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  • India
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रवि भसीन 'शाहिद' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ग़ज़ल 2122 :- मोहित मिश्रा
"आदरणीय मोहित मिश्रा 'मुक्त' साहिब, आपको इस एक रुक्नी ग़ज़ल की रचना पर ढेरों बधाई। आपने कुछ अलग करने का प्रयास किया, ये देख कर बहुत ख़ुशी हुई।"
Jun 15
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ग़ज़ल 2122 :- मोहित मिश्रा
"जनाब मोहित मिश्रा जी, आदाब। एक रुकनी बह्र में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है पर मुकम्मिल नहीं है। प्रयास जारी रक्खें, सफलता ज़रूर मिलेगी।  दरअसल ग़ज़ल का मतलब बातचीत करने से है, और ये ज़रूरी है कि ग़ज़ल के हर एक शेअ'र में एक बात मुकम्मिल हो रही…"
Jun 11
Dimple Sharma commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ग़ज़ल 2122 :- मोहित मिश्रा
"आदरणीय मोहित मिश्रा जी नमस्कार , बहुत ख़ूब कुछ अलग सा नयापन है इस ग़ज़ल में बधाई स्वीकार करें।"
Jun 11
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ग़ज़ल 2122 :- मोहित मिश्रा
"जनाब मोहित मिश्रा जी आदाब, एक रुकनी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'भूल कर तुम, कदरदानी' इस शैर में रब्त नहीं है । 'जय भवानी, जय भवानी' इस शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ कुल्ली का दोष है ।"
Jun 10
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

ग़ज़ल 2122 :- मोहित मिश्रा

2122******क्या कहानी,जिन्दगानी!मर गया जबनयन पानी!मोह कैसा?देह फानी,हम नहीं हैं,आसमानी!वक्त की है,मांग जानी,आग पर रख,ये जवानी।धर दबोचोकंठ मानी,भूल कर तुम,कदरदानी।खड्ग पर धर,शांत बानी,रोर कर दो,आसमानी।जय भवानी,जय भवानी।:- मौलिक और अप्रकाशितSee More
Jun 8
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post मृत्यु और वर्तमान- लेख
"सादर प्रणाम सर"
Apr 1
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post मृत्यु और वर्तमान- लेख
"जनाब मोहित मिश्रा जी आदाब,अच्छा लेख लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 31
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

मृत्यु और वर्तमान- लेख

मृत्यु और वर्तमान*****************मृत्यु, जीवन की अहर्निश साधना का प्रांजल गंतव्य है और परमाकाश के उदात्त एकांत की प्राप्ति जीवात्मा के नैसर्गिक परिणति का एकमात्र सिद्ध परिणाम। शास्त्रीय सिद्धान्तों की सम्मति में, चाहे वे पुनर्जन्म के चक्र को मान्यता दें या न दें, अनेकानेक मार्ग अन्ततोगत्वा आत्मा को उस अनंत एकांत की ओर ले जाते हैं जहाँ निस्सीम शून्य के वर्तुल प्रभामंडल में जीवन-मृत्यु का चक्र लयबद्ध रूप से अनवरत चलता रहता है। अदम्य शांति का महान एकांत।हालाँकि प्रकृति का यह सिद्धांत अवश्यम्भावी…See More
Mar 31
केशव commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"वाह असाधारण रचना  बधाई स्वीकार हो मोहित जी "
May 27, 2019
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"मोहित जी,उत्तम रचना हुई"
May 27, 2019
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना

कभी गर ठान लो मन में,समर्पित हो ही जाना है।जगत कल्याण के हित में,जो अर्पित हो ही जाना है।तो बंधन मोह का चुन चुन के तुमको तोड़ना होगा..स्वजन की आँख में आँसू भी तुमको छोड़ना होगा ..सहज है स्वार्थ का जीवन, कठिन है त्याग कर जाना ।द्रवित होकर किसी के आँसुओं की धार से अविरल,कहीं ऐसा न करना लौटकर तुम फिर चले आना।तड़प कर तात ने तन को-विसर्जित कर दिया अपने।नयन में मर गए घुटकर,बिचारी माँ के भी सपने ।मगर जो लौट जाते राम तो वे राम न होते..अवध के भूप तो होते मगर भगवान न होते..लौटना मन की दुर्बलता, कर्म है…See More
May 27, 2019

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Male
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allahabad
Native Place
allahabad univercity
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student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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Mohit mishra (mukt)'s Blog

ग़ज़ल 2122 :- मोहित मिश्रा

2122

******

क्या कहानी,

जिन्दगानी!

मर गया जब

नयन पानी!

मोह कैसा?

देह फानी,

हम नहीं हैं,

आसमानी!

वक्त की है,

मांग जानी,

आग पर रख,

ये जवानी।

धर दबोचो

कंठ मानी,

भूल कर तुम,

कदरदानी।

खड्ग पर धर,

शांत बानी,

रोर कर दो,

आसमानी।

जय भवानी,

जय…

Continue

Posted on June 8, 2020 at 12:19pm — 4 Comments

मृत्यु और वर्तमान- लेख

मृत्यु और वर्तमान

*****************

मृत्यु, जीवन की अहर्निश साधना का प्रांजल गंतव्य है और परमाकाश के उदात्त एकांत की प्राप्ति जीवात्मा के नैसर्गिक परिणति का एकमात्र सिद्ध परिणाम। शास्त्रीय सिद्धान्तों की सम्मति में, चाहे वे पुनर्जन्म के चक्र को मान्यता दें या न दें, अनेकानेक मार्ग अन्ततोगत्वा आत्मा को उस अनंत एकांत की ओर ले जाते हैं जहाँ निस्सीम शून्य के वर्तुल प्रभामंडल में जीवन-मृत्यु का चक्र लयबद्ध रूप से अनवरत चलता रहता है। अदम्य शांति का महान…

Continue

Posted on March 31, 2020 at 8:00am — 2 Comments

ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना

कभी गर ठान लो मन में,

समर्पित हो ही जाना है।

जगत कल्याण के हित में,

जो अर्पित हो ही जाना है।

तो बंधन मोह का चुन चुन के तुमको तोड़ना होगा..

स्वजन की आँख में आँसू भी तुमको छोड़ना होगा ..

सहज है स्वार्थ का जीवन, कठिन है त्याग कर जाना ।

द्रवित होकर किसी के आँसुओं की धार से अविरल,

कहीं ऐसा न करना लौटकर तुम फिर चले आना।

तड़प कर तात ने तन को-

विसर्जित कर दिया अपने।

नयन में मर गए घुटकर,

बिचारी माँ के भी सपने ।

मगर जो लौट…

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Posted on May 26, 2019 at 8:32am — 2 Comments

रंगों का उपहार :- मोहित मुक्त

प्रकाश के तंतुओं से निर्मित,

हमें मिला है प्रकृति द्वारा,

रंगीनियों का उपहार। 

और हम, उसी का धन्यवाद देते हैं,

होली के त्यौहार में।

रंगों का महापर्व, होली !

सिर्फ उत्सव नहीं,

अपितु यह तो है,

दुनिया की प्राचीनतम -

और महानतम सभ्यता का विचार तत्व।

जीवन और प्रकाश से परे,

जब शून्य था ब्रह्मांड,

काले अँधेरे की शक्ल में-

रंग तब भी विद्यमान थे।

और फिर विधाता…

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Posted on March 20, 2019 at 6:01pm — 2 Comments

 
 
 

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