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Kalipad Prasad Mandal commented on रामबली गुप्ता's blog post मुख-शशि उज्ज्वल औ' धनु-भौहें
"आ रामबली गुप्ता जी, सरसी छंद में बहुत खुबसूरत रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आद आलोक रावत जी ,आदाब बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हुई| बधाई स्वीकार करें | आ समीर कबीर साब की टिप्पणी से मुझे भी शिक्षा मिली  "
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"आ प्रदीप कुमार पाण्डेय जी , बहुत बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें "
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल, इस ब्लाग सभी के सदस्यों कि दुआएँ चाहता हूँ - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा रेवा साहिब, आदाब आपका प्रयास काबिले तारीफ है | दिली मुबारक बाद स्वीकार करे |"
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आ समर कबीर साहिब ,आदाब, आपका इन्तिज़ार रहेगा"
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय सलीम रज़ा साहिब आदाब , हौला अफ्जाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय सुशील सरना जी हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया | सादर नमन"
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय महम्मद आरिफ साहिब हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया | आदाब"
Wednesday
Samar kabeer commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें,समय मिलते ही पुनः ग़ज़ल पर आता हूँ ।"
Wednesday
SALIM RAZA REWA commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आ. काली प्रसाद जी, ग़ज़ल नज़्म और वो किस्से लिखे जो भी अभी तक वे महफ़िल में अब सभी माहिर सुखन की आजमाइश है | ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय कालीपद जी इस शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई। "
Wednesday
Mohammed Arif commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन कटाक्षपूर्ण और सामयिक ग़ज़ल । हर शे'र दर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Wednesday
Kalipad Prasad Mandal posted a blog post

ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : अन ; रफिफ ; की आजमाइश हैबहर : १२२२  १२२२  १२२२  १२२२चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश हैइसी में रहनुमा के मन वचन की आजमाइश है |सभी नेता किये दावा कि उनकी टोली’ जीतेगी   अदालत में अभी तो अभिपतन की आजमाइश है |खड़े हैं रहनुमा जनता के’ आँगन जोड़कर दो हाथचुने किसको, चुनावी अंजुमन की आजमाइश है |लगे हैं आग भड़काने में’ स्वार्थी लोग दिन रात औरसरल मासूम जनता की सहन की आजमाइश है |लिया है जन्म इस भारत में’,यह है माँ समान आराध्यविवेकी कठघरा में हमवतन की आजमाइश है | ग़ज़ल नज़्म और वो किस्से लिखे जो भी…See More
Tuesday
Kalipad Prasad Mandal commented on rajesh kumari's blog post इश्क इससे क्यूँ दुबारा हो गया (ग़ज़ल 'राज')
"आद राजेश कुमारी जी खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद पेश करता हूँ |"
Tuesday
Kalipad Prasad Mandal commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आ विजय शंकर जी ,आदाब , सामयिक एवं करारा तंज लिए रचना के लिए हार्दिक बधाई |"
Tuesday
Kalipad Prasad Mandal commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा
"इस खुबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद स्वीकार कीजिये आसलिम रज़ा साहिब |"
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Pune
Native Place
Pune
Profession
Retired Principal, Writer, Poet
About me
Writer of "Value Based Education" published in 2000, two kavita sangrah Published ,!. Kavya saurabh" 2. "Andhere se ujaale ki or" writer of Haiku and Tanka (Japaani vidha),Write tukant ,atukant poem , ,dohe,muktak, learning gaza writingt

ओ बी ओ तरही ....-----71

सारी सारी रात जग जिन के लिए 

पूछते वे जागरण किन के लिए |1|

चाँद तारों तो  झुले  हैं  रात में 

एक सूरज को रखा दिन के लिए |२|

आसान नहीं भूलना यूँ भूत को 

आज तक तो मोह है इन के लिए |३|

रात भर आँसू कभी थमती नहीं  

अश्रु जल यूँ लुडकते किन के लिए|४ |

वो सुखी हैं या दुखी किस को पता

फूल जंगल में खिले किन के लिए |५|

जानते थे हम जुदा होंगे कभी 

क्या जतन करते कभी इन के लिए |६|

अब इन्हें संसार में आना नहीं 

कौन रोये इस जहाँ इन के लिए |७|

वो कभी पीड़ा समझना चाहती 

क्लेश हम पीते गए जिनके लिए |८|

मौलिक और अप्रकाशित 

 

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ग़ज़ल-चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है- कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : अन ; रफिफ ; की आजमाइश है

बहर : १२२२  १२२२  १२२२  १२२२

चनावी दंगलों में स्याह धन की आजमाइश है

इसी में रहनुमा के मन वचन की आजमाइश है |

सभी नेता किये दावा कि उनकी टोली’ जीतेगी   

अदालत में अभी तो अभिपतन की आजमाइश है |

खड़े हैं रहनुमा जनता के’ आँगन जोड़कर दो हाथ

चुने किसको, चुनावी अंजुमन की आजमाइश है |

लगे हैं आग भड़काने में’ स्वार्थी लोग दिन रात और

सरल मासूम जनता की सहन की आजमाइश है…

Continue

Posted on November 14, 2017 at 7:30am — 8 Comments

ग़ज़ल -ये जिंदगी तो’ हो गयी’ दूभर कहे बगैर-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया :अर ; रदीफ़ : कहे बगैर 

बह्र :२२१  २१२१  १२२१  २१२ (१)

ये जिंदगी तो’ हो गयी’ दूभर कहे बग़ैर 

आता सदा वही बुरा’ अवसर कहे बग़ैर |

बलमा नहीं गया कभी’ बाहर कहे बग़ैर

आता कभी नहीं यहाँ’, जाकर कहे बग़ैर |

है धर्म कर्म शील सभी व्यक्ति जागरूक

दिन रात परिक्रमा करे’ दिनकर कहे बग़ैर | 

दुर्बल के  क़र्ज़  मुक्ति  सभी होनी  चाहिए

क्यों ले ज़मीनदार सभी कर कहे बग़ैर |

सब धर्म पालते मे’रे’ साजन, मगर…

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Posted on November 9, 2017 at 9:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल-रहनुमा का’ मन काला, शक्ल पर उजाला है |

काफिया : आला . रदीफ़ : है

बह्र : २१२  १२२२  २१२  १२२२

हाथ में वही अंगूरी सुरा,पियाला है

रहनुमा का’ मन काला, शक्ल पर उजाला है |

छीन ली गई है आजीविका, दिवाला है

ढूंढ़ते रहे हैं सब, स्रोत को खँगाला है ||

आसमान पर जुगनू, चाँद सूर्य धरती पर

धर्म कर्म सब कुछ, भगवान का निराला है |

सब गड़े हुए मुर्दों को, उखाड़ते नेता

अब चुनाव क्या आया, भूत को उछाला है |

राज नीति में रिश्तेदार ही, अहम है सब

वो…

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Posted on November 6, 2017 at 7:30am — 2 Comments

गज़ल -अक्सीर दवा भी अभी’ नाकाम बहुत है

काफिया आम, रदीफ़ : बहुत है

बह्र : २२१  १२२१  १२२१  १२२ (१)

अकसीर  दवा भी अभी’ नाकाम बहुत है

बेहोश मुझे करने’ मय-ए-जाम बहुत है |

वादा किया’ देंगे सभी’ को घर, नहीं’ आशा

टूटी है’ कुटी पर मुझे’ आराम बहुत है |

प्रासाद विशाल और सुभीता सभी’ भरपूर   

इंसान हैं’ दागी सभी’, बदनाम बहुत हैं |

है राजनयिक दंड से’ ऊपर, यही’ अभिमान

शासन करे स्वीकार, कि इलज़ाम बहुत है |

साकी की’ इनायत क्या’ कहे,दिल का…

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Posted on November 2, 2017 at 8:24am — 2 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 10:57pm on September 27, 2016, Samar kabeer said…
जनाब कालीपद प्रसाद जी आदाब,इस बह्र के अरकान होते हैं :-

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

आप इसलिये अटक रहे हैं कि आपने मात्रा नहीं गिराई है,मात्रा गिराकर देखेंगे तो सही नतीजे पर पहुँच जाऐंगे ।
At 11:32pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

कालीपद प्रसाद मंडल जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 7:27pm on July 8, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएँ .. 

At 3:45pm on June 22, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री काली प्रसाद मंडल जी आपको कविता पसंद आई हार्दिक धन्यवाद।
At 8:05pm on June 21, 2016, Sheikh Shahzad Usmani said…
सादर हार्दिक आभार अवसर प्रदान करने के लिए। सभी विधाओं सहित जापानी काव्य विधाओं में मेरे लेखन अभ्यास में आपसे भी कुछ सीखने को मिलता रहेगा।
At 11:46pm on May 21, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

स्वागत के लिए धन्यवाद मिथिलेश जी ! जन्म दिन की बधाई आपने दी उसे भी सधन्यवाद स्वीकार करता हूँ क्योकि जन्मदिन मेरा भाई का है मेरा नहीं | सुबह मैंने दोहा पोस्ट किया था वो मुझे कहां दिखाई देगा ?

At 11:55am on May 16, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 1:11pm on May 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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