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Gul Sarika Thakur
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Gul Sarika Thakur's Page

Latest Activity

Ravi Prabhakar commented on Gul Sarika Thakur's blog post सुनने वाली मशीन
"बहुत प्रभावशाली लघुकथा लिखी है आदरणीय सारिका जी । अत्‍यंत प्रभावशाली कथानक और उससे सी बढ़ीया प्रस्‍तुतिकरण । बुज़ुर्गों की उपेक्षा जैसी सामाजिक समस्‍या को बाखूबी उभारती इस लघुकथा में जो दृश्‍य निर्माण किया है वह काबिले तारीफ है । और…"
Aug 15
vijay nikore commented on Gul Sarika Thakur's blog post सुनने वाली मशीन
"अच्छी लघु कथा के लिए बधाई"
Aug 15
Samar kabeer commented on Gul Sarika Thakur's blog post सुनने वाली मशीन
"सारिका जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 13
Mohammed Arif commented on Gul Sarika Thakur's blog post सुनने वाली मशीन
"आदरणीया गुल सारिका जी आदाब,ओबीओ मंच पर पहली बार आपकी लघुकथा से संवाद कर रहा हूँ। बुजुर्गों की समस्या , उपेक्षा भाव पर प्रभावशाली प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 13
KALPANA BHATT commented on Gul Sarika Thakur's blog post धीरे-धीरे समझे हम
"बहुत सुंदर प्रस्तुति |"
Aug 11
KALPANA BHATT commented on Gul Sarika Thakur's blog post पूछना उनसे
"आपकी लेखनी को नमन आदरणीय | गज़ब का चिंतन किया है यहाँ आपने | "
Aug 11
KALPANA BHATT commented on Gul Sarika Thakur's blog post सुनने वाली मशीन
"घर के बुजुर्गों की पीड़ा को बहुत अच्छे से चित्रित किया है आपने आदरणीया | हार्दिक बधाई |"
Aug 11
Sheikh Shahzad Usmani commented on Gul Sarika Thakur's blog post सुनने वाली मशीन
"बेहतरीन शिल्पबद्ध प्रवाहमय सशक्त भावपूर्ण यथार्थपूर्ण प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय Gul Sarika Thakur जी। इशारों में अतीत व वर्तमान परिदृश्य को बाख़ूबी शाब्दिक करती रचना। मशीन/मफ़लर//गाना/मुस्कान/ताने/तानों की उपेक्षा/फिर…"
Aug 11
Gul Sarika Thakur posted a blog post

सुनने वाली मशीन

अस्सी वर्षीय बाबू केदार नाथ ने अपने कानों में सुनने वाली मशीन लगाकर मफ़लर लपेट लिया| आईने में खुद को देखकर आश्वस्त हुए| मशीन पूरी तरह मफ़लर के नीचे छिप गया था| अब उन्होने पुराना टेप रिकार्डर निकाला और प्रिय गाना बजा दिया|बरेली के बाज़ार में झुमका गिरा रे-कमरे में आशा भोसले की नखरीली आवाज़ गूंज उठी|बाबू केदारनाथ के होंठो पर एक प्यारी सी मुस्कान खेल गई|अजी सुनते हो! उनके कानो से एक तेज कटार सी आवाज टकराई|अपने बाउजी को समझाते क्यों नहीं, जब से दीदी के यहाँ से लौटे हैं, अजीब हरकते हो गईं हैं इनकी…See More
Aug 11

सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji commented on Gul Sarika Thakur's blog post पूछना उनसे
"आदरणीया गुल सारिका जी, आपकी लेखनी की सशक्तता और चिंतन की स्वतंत्रता से उत्पन्न इस रचना की गहराई ने झकझोर दिया. आपकी रचनाओं की व्यग्र प्रतीक्षा रहेगी."
May 1, 2014
vijay nikore commented on Gul Sarika Thakur's blog post पूछना उनसे
"अति संवेदनशील अभिव्यक्ति। हम सब मिल कर प्रार्थना कर लें।"
Apr 17, 2014

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Gul Sarika Thakur's blog post पूछना उनसे
"प्रश्न ही प्रतिप्रश्न बन कर प्रश्न करता हम-आप से !  आपकी लेखिनी के साहस को नमन, आदरणीया.."
Apr 17, 2014
Shyam Narain Verma commented on Gul Sarika Thakur's blog post पूछना उनसे
"इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई..............."
Apr 4, 2014
Gul Sarika Thakur posted a blog post

पूछना उनसे

आँख कान और जुबान की सांकल खुले तोपूछना उनसेजिंदाबाद का नारा लगानेवालों मेंकितने ज़िंदा थे यकीनन|  पूछना आँखे खुल जाने के बादरोज निगली जाने वाली मक्खियों का स्वादपूछना वर्तनी उन गालियों काजिसके एक छोर पर माँ तो दूसरे छोर परअक्सर बहने हुआ करती है|  मगर मत पूछना जुबान सेउस मांसल देह का स्वादजिसकी कन्दराओं में ना जानेकितनी माँए और बहने दुबकी होती हैमगर एक बार पूछना जरुरइन सांकलों के खुल जाने के बाद खुदा बनकर वे  खामोश क्यों रह गए?  Gul sarika (मौलिक एवं अप्रकाशित) See More
Apr 4, 2014
Gul Sarika Thakur commented on Gul Sarika Thakur's blog post धीरे-धीरे समझे हम
"प्रबुद्ध सुधीजनो के इस मार्ग दर्शन से अभिभूत हूँ, लम्बे समय तक मुक्त छ्न्द में लिखने के उपरांत अनुभव हुआ कि काव्य में छ्न्द भी अति महत्वपूर्ण है, सहमत हूँ शिल्प दोष अवश्य होंगे... बहुत ही आभारी रहूँगी अगर सुधीजन भूल सुधार भी कर दें... . आभार"
Feb 1, 2014

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Gul Sarika Thakur's blog post धीरे-धीरे समझे हम
"बहुत दिनों पर आपकी रचना से गुजर रहा हूँ. आपके भावशब्दों में रुहानी ताकत है लेकिन रचनाकर्म प्रस्तुति के अलावे एक साधना भी है जिसमें कुछ कहने का ढंग यानि शिल्प भी अर्थ रखता है. तब तो और, जब रचनाकार शाब्दिक प्रवाह के व्यामोह में दिखे. अरुन अनन्तभाई के…"
Feb 1, 2014

Profile Information

Gender
Female
City State
Bhopal
Native Place
Bihar
Profession
Freelance writer
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सुनने वाली मशीन

अस्सी वर्षीय बाबू केदार नाथ ने अपने कानों में सुनने वाली मशीन लगाकर मफ़लर लपेट लिया| आईने में खुद को देखकर आश्वस्त हुए| मशीन पूरी तरह मफ़लर के नीचे छिप गया था| अब उन्होने पुराना टेप रिकार्डर निकाला और प्रिय गाना बजा दिया|

बरेली के बाज़ार में झुमका गिरा रे-कमरे में आशा भोसले की नखरीली आवाज़ गूंज उठी|

बाबू केदारनाथ के होंठो पर एक प्यारी सी मुस्कान खेल गई|

अजी सुनते हो! उनके कानो से एक तेज कटार सी आवाज टकराई|

अपने बाउजी को…

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Posted on August 11, 2017 at 11:47am — 6 Comments

पूछना उनसे

आँख कान और जुबान की सांकल खुले तो

पूछना उनसे

जिंदाबाद का नारा लगानेवालों में

कितने ज़िंदा थे यकीनन|  

पूछना आँखे खुल जाने के बाद

रोज निगली जाने वाली मक्खियों का स्वाद

पूछना वर्तनी उन गालियों का

जिसके एक छोर पर माँ तो दूसरे छोर पर

अक्सर बहने हुआ करती है|  

मगर मत पूछना जुबान से

उस मांसल देह का स्वाद

जिसकी कन्दराओं में ना जाने

कितनी माँए और बहने दुबकी होती है

मगर एक बार पूछना जरुर

इन सांकलों के खुल…

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Posted on April 4, 2014 at 2:00pm — 6 Comments

धीरे-धीरे समझे हम

इस दुनिया के तौर तरीके

धीरे धीरे समझे हम

गुलदस्तों की ओट में खंजर

धीरे-धीरे समझे हम|  …

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Posted on January 23, 2014 at 3:30pm — 12 Comments

सुनो ऋतुराज- 15

सुनो ऋतुराज- 15 

सुनो ऋतुराज!!

वह एक अन्धी दौड थी 

हांफती हुई 

हदें फलांगती हुई 

परिभाषाओं के सहश्र बाड़ो को 

तोडती हुई

फिर भी वह भ्रम नही टूटा 

जिसे तोडने के लिये संकल्पित थे हम 

ऋतुओं का मौन यूँ ही बना रहा 

सावन बरस् बरस कर सूख गया 

हम अन्धड़ के वेग मे भी तने रहे 

और आसक्ति का वृक्ष सूख गया 

सुनो ऋतुराज 

लमहों का बही खाता 

जब भी खोलोगे 

दग्ध ह्रदय पर लिखा 

शुभलाभ अवश्य दिखेगा …

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Posted on November 5, 2013 at 11:30am — 11 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 9:19am on May 18, 2013, pawan amba said…
Dil se dhanywaad mujhe is kaabil samjhne kaa
At 12:52pm on May 17, 2013, विजय मिश्र said…
सरिकाजी ! नमस्कार , मित्रता के आमंत्रण हेतु आत्मीय अभिवादन एवं अभिनंदन .
At 12:49pm on May 17, 2013, विजय मिश्र said…
सरिकजी ! नमस्कार , मित्रता के आमंत्रण हेतु आत्मीय अभिवादन एवं अभिनंदन .
At 8:03am on May 16, 2013, vijay nikore said…

आदरणीया गुल सारिका जी:

मित्रता का हाथ बढ़ा कर आपने मुझको सम्मानित किया है।

साहित्यिक आनन्द की प्रत्याशा लिए।

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर

At 2:51am on May 16, 2013, vijay nikore said…

आपकी कविता आखरी निवेश के संदर्भ में निम्न स्मृति उमड़ आई...प्रतिक्रिया तो लिखी है, पर फिर भी अलग से लिख रहा हूँ, क्योंकि समय के संग प्रतिक्रिया ढेर में चली जाती है, comments अधिक जीवित रहते हैं।

 

एक बार अमृता प्रीतम जी ने मुझको Paul Potts की कविता का

अनुवाद कर के सुनाया था ... कुछ इस तरह था ...

 

"अगर तुम उस औरत से प्यार करते हो,

जो तुमसे प्यार न करती हो,

उस समय एक ही बात (ठीक) हो सकती है,

कि तुम उस से दूर चले जाओ, बहुत दूर,

वह तुम्हें भिखारी बना क्यूँ देखे,

वह जो तुममें

बादशाह देख सकती थी।"

 

सादर,

विजय निकोर

At 11:02pm on December 12, 2012, Pankaj Trivedi said…

स्वागत है

At 11:57am on September 22, 2012, Satish Agnihotri said…

Welcome Sarika ji..

 
 
 

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