For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गनेश जी "बागी")

Arun Sri's Page

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"//मैंने लिखा है कि "एक समय तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ" ! ये किसी का नकार नहीं है बल्कि परिस्थिति विशेष में प्राथमिकताओं का निर्धारण मात्र कई किसी शासक के लिए ! //बहुत खूब ! ’एक समय’ के श्लेषात्मक प्रयोग ने मुग्ध…"
Aug 4
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"MAHIMA SHREE जी , दुआ कीजिए कि मैं इसी तरह प्रभावित करता रहूँ आपको , सबको ! धन्यवाद ! :-)))"
Aug 4
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी भाई , बहुत-बहुत धन्यवाद आपको ! "
Aug 4
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"Saurabh Pandey सर , आपके इस विस्तृत वार्तालाप ने मुझे ठीक वहीँ पहुंचा दिया जहाँ से मैंने इस कविता को लिखा था ! शायद इसी को कहते होंगे कविता का जी उठाना ! बाकी आपके एक प्रश्न पर कि "क्या कवि राष्ट्रधर्म के इतर चैतन्य होने की बात करता है ?"…"
Aug 4
MAHIMA SHREE commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"क्योकि - मैं कई बार शब्दों को चबाकर लहूलुहान कर देता हूँ ! खून टपकती कविताएँ कपड़े उतार ताल ठोकतीं हैं ! स्थापित देव मुझे ख़ारिज करने के नियोजित क्रम में - अपना सफ़ेद पहनावा सँभालते हैं पहले ! सतर्क होने की स्थान पर सहम जातीं हैं सभ्यताएँ ! पत्ते झड़ने…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"कोई कविता जब बतियाती है तो संवेदनशील कवि और जागरुक समाज दोनों एक साथ सुनते हैं. यही संवेदना तथा जागरुकता की कसौटी है. पारस्परिक अभिव्यक्तियों का सबसे सुगढ़ पक्ष श्रवण, मनन और तब संप्रेषण है. अन्यथा कविताएँ मात्र बोलती हुई इकाइयों की तरह सामने आती…"
Aug 3

सदस्य कार्यकारिणी
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण भाई जी! सुंदर रचना। आपके काव्य बिम्ब और उनकी अपील हृदय को छू रहे हैं। यही किसी रचना और रचनाकार की सफलता है। बधाई भाई।"
Aug 3
savitamishra commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"गूढता इतनी जल्दी समझ जाते तो कवियों की कतार में हम ना खड़े होते क्या भाई ...असफलता आपकी नहीं हमारी ही समझ कम है जरा"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"savitamishra जी , अगर कुछ समझ से परे रह गया तो ये संभवतः असफलता हो मेरी ! बहरहाल समय देने के धन्यवाद ! आगे .. प्रस्तुत हूँ ! :-)))))"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"coontee mukerji मैम , काश कि ये अपशकुन पहचाने भी जा सकें !!!!!!! धन्यवाद"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"rajesh kumari मैम , आपने हमेसा हौसला बढ़ाया है जो मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है ! सादर धन्यवाद ! "
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"दरअसल यही तो सार्थकता है कि  जितेन्द्र 'गीत'  जी कि कवि के भावों को शब्दों का साथ मिले और पाठकों का भी ! साथ बने रहे आप ! धन्यवाद !"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर , आपकी  सूक्ष्म दृष्टि है आदरणीय जो आप इतनी गहनता से महसूस कर पा रहे हैं कविता को ! सादर !"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"सराहने  के लिए धन्यवाद Laxman Prasad Ladiwala सर  !"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
" Dr Ashutosh Mishra  जी , कविता को गहनता से समझा आपने ! समय देने के लिए धन्यवाद !"
Jul 30
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"बहुत  धन्यवाद Dr. Vijai Shanker जी !"
Jul 30
savitamishra commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आपकी लेखनी कमाल है यह तो मालूम ही है हमे..कुछ समझे कुछ समझ से परे जबकि पढ़े कई बार"
Jul 30
coontee mukerji commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"बहुत ही सशक्त और गहन अर्थ लिये हुए आपकी रचना पढ़कर एकबारगी इंसान सोचने पर मज़बूर हो जाता है....कितने सारे प्रश्न बिल्ली की तरह दबे पाँव आती है और रास्ता काट जाती है.....और छोड़ जाती है एक अनदेखे अपशकुन......आपको  अनेक साधुवाद/ कुंती. "
Jul 30

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"युद्ध जीत कर लौटा राजा भूल जाता है - कि अनाथ और विधवाएँ भी हैं उसके युद्ध का परिणाम !------गंभीर चिंतन ...मद में चूर राजा को कहाँ इस बात का ख्याल होता है  मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ - विजय-यात्रा पर निकलते राजा का रास्ता काट…"
Jul 30
जितेन्द्र 'गीत' commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आप जो चाहते है कह  ही देते है. आपकी लेखनी कमाल है आदरणीय अरुण जी. बधाई स्वीकारें"
Jul 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Mughalsarai
Native Place
Kalani , Ramgarh(Kaimur)
Profession
Accountant
About me
रण में कुटिल काल सम क्रोधी .............. तप में महासूर्य जैसा !

Arun Sri's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

Arun Sri's Blog

बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !

मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ !

 

क्योकि -

युद्ध जीत कर लौटा राजा भूल जाता है -

कि अनाथ और विधवाएँ भी हैं उसके युद्ध का परिणाम !

लोहा गलाने वाली आग की जरुरत चूल्हों में है अब !

एक समय तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ !

 

क्योंकि -

नई माँ रसोई खुली छोड़ असमय सो जाती है अक्सर !

कहीं आदत न बन जाए दुधमुहें की भूख भूल जाना !

कच्ची नींद टूट सकती है बर्तनों की आवाज से भी ,

दाईत्वबोध पैदा कर सकता…

Continue

Posted on July 28, 2014 at 10:47am — 24 Comments

मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !

नहीं सामंत !

सम्मोहित प्रजा का आँकड़ा बढाती संख्या नहीं मैं !

मेरा वैचारिक खुरदरापन -

एक प्रखर विलोम है तुम्हारी जादुई भाषा का !

पट्टे की कीमत पर पकवान के सपने बेचते हो तुम !

मेरी जीभ का चिकना होना जरुरी है तुम्हारे लिए !

 

नहीं सामंत !

रोटी का विकल्प नहीं हो सकतीं चंद्रयान योजनाएं !

प्रस्तावित अच्छे दिनों की कीमत मेरी जीभ नहीं है !

 

नहीं सामंत !

तुम्हारे मुकुट का एक रत्न होना स्वीकार नहीं मुझे…

Continue

Posted on July 10, 2014 at 6:00pm — 22 Comments

अजन्मी उम्मीदें --- अरुण श्री

समय के पाँव भारी हैं इन दिनों !

 

संसद चाहती है -

कि अजन्मी उम्मीदों पर लगा दी जाय बंटवारे की कानूनी मुहर !

स्त्री-पुरुष अनुपात, मनुस्मृति और संविधान का विश्लेषण करते -

जीभ और जूते सा हो गया है समर्थन और विरोध के बीच का अंतर !

बढती जनसँख्या जहाँ वोट है , पेट नहीं !

पेट ,वोट ,लिंग, जाति का अंतिम हल आरक्षण ही निकलेगा अंततः !

 

हासिए पर पड़ा लोकतंत्र अपनी ऊब के लिए क्रांति खोजता है

अस्वीकार करता है -

कि मदारी की जादुई…

Continue

Posted on June 4, 2014 at 10:30am — 10 Comments

आखिर कैसा देश है ये ? --- अरुण श्री

आखिर कैसा देश है ये ?

- कि राजधानी का कवि संसद की ओर पीठ किए बैठा है ,

सोती हुई अदालतों की आँख में कोंच देना चाहता है अपनी कलम !

गैरकानूनी घोषित होने से ठीक पहले असामाजिक हुआ कवि -

कविताओं को खंखार सा मुँह में छुपाए उतर जाता है राजमार्ग की सीढियाँ ,

कि सरकारी सड़कों पर थूकना मना है ,कच्चे रास्तों पर तख्तियां नहीं होतीं !

पर साहित्यिक थूक से कच्ची, अनपढ़ गलियों को कोई फर्क नहीं पड़ता !

एक कवि के लिए गैरकानूनी होने से अधिक पीड़ादायक है गैरजरुरी होना…

Continue

Posted on June 1, 2014 at 1:00pm — 24 Comments

Comment Wall (13 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:57pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

शुक्रिया अरुन जी 

At 11:54pm on February 22, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
बृजेश नीरज
said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 1:18am on July 5, 2012, deepti sharma said…
shukriya Arun ji
At 11:18am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

jaankaari ke liye dhnyvaad Arun ji 

At 10:44am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

thanks Arun ji ,I am new to this site and have to learn a lot ,please guide me 

At 8:17pm on May 14, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आपका स्वागत है मित्रवर ..................

At 12:58pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री अरुण जी.

सादर अभिवादन.
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 5:52am on January 9, 2012, Shanno Aggarwal said…

अजय, आपकी रचनायें बहुत खूबसूरत हैं. बधाई व शुभकामनायें. 

At 1:02pm on January 8, 2012, deepak kumar said…

mujhe ek mitr mila !

At 7:20am on January 6, 2012, आशीष यादव said…
Congrats. Ur creation is month's best creation.
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Pawan Kumar replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की मासिक कवि-गोष्ठी माह अगस्त 2014 की संक्षिप्त प्रस्तुति – डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"मासिक कवि गोष्ठी की संक्षिप्त प्रस्तुति से लग रहा है कि मैं भी वहां रहता तो कितना अच्छा रहता, बहुत…"
5 minutes ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की मासिक कवि-गोष्ठी माह अगस्त 2014 की संक्षिप्त प्रस्तुति – डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

       ओ बी ओ द्वारा मनोनीत संयोजक आदरणीय डा0 शरदिंदु मुखर्जी एवं आदरणीय कुंती जी तथा कतिपय सदस्यों…See More
55 minutes ago
dhananjay tiwari is now a member of Open Books Online
57 minutes ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सिहावलोकन सवैया
"आदरणीय सौरभ जी आपका कथन स्वीकार्य है i सादर i"
1 hour ago

AMOM
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गिरने पे चोट नहीं लगती--डा० विजय शंकर
"आपको बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्षमण प्रसाद धामी जी"
1 hour ago
laxman dhami commented on Pawan Kumar's blog post कि तेरी याद आती है
"कभी रहती थी पलकों पे, हुस्न-ए-नूर बनकर तुम! वही बनके तूँ फिर आजा, कि तेरी याद आती है। आदरणीय पवन…"
1 hour ago
laxman dhami commented on savitamishra's blog post गांधी नोट
"आदरणीया सविता जी रचना के लिए जो बहुत कुछ सोचने के लिए विवश करती है , कोटि कोटि बधाई ।"
1 hour ago
laxman dhami commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गिरने पे चोट नहीं लगती--डा० विजय शंकर
"आदरणीय भाई  विजय शंकर जी इस विचारोत्तेजक रचना के लिए कोटि कोटि बधाई ।"
1 hour ago
laxman dhami commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post माँ की महिमा
"माँ भोजन में दलिया जैसी माँ गीतों में रसिया जैसी माँ वीरा, माँ धी, माँ बहना माँ अनमोल जड़ी, माँ…"
2 hours ago
laxman dhami commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सिहावलोकन सवैया
"आदरणीय भाई गोपाल नारायण जी, सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ . सुन्दर भाव पूर्ण रचना के…"
2 hours ago
laxman dhami commented on गिरिराज भंडारी's blog post ( ग़ज़ल ) जलाने को तुम्हारे हौसले तैयार बैठे हैं (गिरिराज भंडारी )
"बहुत मायूस होने की ज़रूरत है नहीं साक़ी क़तारों में अभी भी सौ तेरे बीमार बैठे हैं आदरणीय भाई गिरिराज…"
2 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Pawan Kumar's blog post कि तेरी याद आती है
" " सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर............. " "
2 hours ago

© 2014   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service