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Latest Activity

savitamishra commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"गूढता इतनी जल्दी समझ जाते तो कवियों की कतार में हम ना खड़े होते क्या भाई ...असफलता आपकी नहीं हमारी ही समझ कम है जरा"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"savitamishra जी , अगर कुछ समझ से परे रह गया तो ये संभवतः असफलता हो मेरी ! बहरहाल समय देने के धन्यवाद ! आगे .. प्रस्तुत हूँ ! :-)))))"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"coontee mukerji मैम , काश कि ये अपशकुन पहचाने भी जा सकें !!!!!!! धन्यवाद"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"rajesh kumari मैम , आपने हमेसा हौसला बढ़ाया है जो मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है ! सादर धन्यवाद ! "
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"दरअसल यही तो सार्थकता है कि  जितेन्द्र 'गीत'  जी कि कवि के भावों को शब्दों का साथ मिले और पाठकों का भी ! साथ बने रहे आप ! धन्यवाद !"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर , आपकी  सूक्ष्म दृष्टि है आदरणीय जो आप इतनी गहनता से महसूस कर पा रहे हैं कविता को ! सादर !"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"सराहने  के लिए धन्यवाद Laxman Prasad Ladiwala सर  !"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
" Dr Ashutosh Mishra  जी , कविता को गहनता से समझा आपने ! समय देने के लिए धन्यवाद !"
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"बहुत  धन्यवाद Dr. Vijai Shanker जी !"
yesterday
savitamishra commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आपकी लेखनी कमाल है यह तो मालूम ही है हमे..कुछ समझे कुछ समझ से परे जबकि पढ़े कई बार"
yesterday
coontee mukerji commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"बहुत ही सशक्त और गहन अर्थ लिये हुए आपकी रचना पढ़कर एकबारगी इंसान सोचने पर मज़बूर हो जाता है....कितने सारे प्रश्न बिल्ली की तरह दबे पाँव आती है और रास्ता काट जाती है.....और छोड़ जाती है एक अनदेखे अपशकुन......आपको  अनेक साधुवाद/ कुंती. "
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"युद्ध जीत कर लौटा राजा भूल जाता है - कि अनाथ और विधवाएँ भी हैं उसके युद्ध का परिणाम !------गंभीर चिंतन ...मद में चूर राजा को कहाँ इस बात का ख्याल होता है  मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ - विजय-यात्रा पर निकलते राजा का रास्ता काट…"
yesterday
जितेन्द्र 'गीत' commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आप जो चाहते है कह  ही देते है. आपकी लेखनी कमाल है आदरणीय अरुण जी. बधाई स्वीकारें"
Tuesday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"अरुण जी आपकी अनुभूति गहरी है  i आप बहूत डूब  कर र्लिखते हैं I प्रतीक और बिम्बों का तो कहना हे  क्या  ?  आप निश्चित  रूप से herald कवि हैं  i  जब मैं यह पंक्तिया पढता हूँ इओ कभी दिनकर याद आते है और…"
Tuesday
Laxman Prasad Ladiwala commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"चिंतन परक एक अलग अंदाज में उपजे सोच पर रची रचना भाव के लिए बधाई श्री अरुण श्री जी "
Tuesday
Dr Ashutosh Mishra commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण जी ..ताजगी से परिपूर्ण रचना /..इस रचना चिंतन के लिए प्रेरित करती है ,,,यथार्थ बताती हैं और तेजी से बदलते परिवेश की तरफ इशारा भी करती है इस शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर "
Monday
Dr. Vijai Shanker commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण श्री जी , अच्छा लिखा है," तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ ," अच्छी रचना है , बधाई."
Monday
Arun Sri posted a blog post

बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !

मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ ! क्योकि -युद्ध जीत कर लौटा राजा भूल जाता है -कि अनाथ और विधवाएँ भी हैं उसके युद्ध का परिणाम !लोहा गलाने वाली आग की जरुरत चूल्हों में है अब !एक समय तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ ! क्योंकि -नई माँ रसोई खुली छोड़ असमय सो जाती है अक्सर !कहीं आदत न बन जाए दुधमुहें की भूख भूल जाना !कच्ची नींद टूट सकती है बर्तनों की आवाज से भी ,दाईत्वबोध पैदा कर सकता है भूख से रोता हुआ बच्चा ! क्योंकि -आवारा होना यथार्थ तक जाने का एक मार्ग भी है !‘गर्म हवाएं कितनी गर्म हैं’ ये बंद कमरे नहीं बताते !प्राचीरों के पार नहीं पहुँचती सड़कों की बदहवास चीखें !बंद दरवाजे में प्रेम नहीं पलता हमेशा ,खपरैल से ताकते दिखता है आंगन का पत्थरपन भी ! क्योकि -मैं कई बार शब्दों को चबाकर लहूलुहान कर देता हूँ !खून टपकती कविताएँ कपड़े उतार ताल ठोकतीं हैं !स्थापित देव मुझे ख़ारिज करने के नियोजित क्रम में -अपना सफ़ेद पहनावा सँभालते हैं पहले !सतर्क होने की स्थान पर सहम जातीं हैं सभ्यताएँ !पत्ते झड़ने का अर्थ समझा जाता है पेड़ का ठूंठ होना ! मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ…See More
Monday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"ऐसा ही हो आदरणीय ! :-))))"
Jul 22

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"अपने पारस्परिक तथ्य आपके माध्यम से रचनाकर्मियों के वृहद समूह तक व्यापे. शुभ-शुभ "
Jul 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Mughalsarai
Native Place
Kalani , Ramgarh(Kaimur)
Profession
Accountant
About me
रण में कुटिल काल सम क्रोधी .............. तप में महासूर्य जैसा !

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Arun Sri's Blog

बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !

मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ !

 

क्योकि -

युद्ध जीत कर लौटा राजा भूल जाता है -

कि अनाथ और विधवाएँ भी हैं उसके युद्ध का परिणाम !

लोहा गलाने वाली आग की जरुरत चूल्हों में है अब !

एक समय तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ !

 

क्योंकि -

नई माँ रसोई खुली छोड़ असमय सो जाती है अक्सर !

कहीं आदत न बन जाए दुधमुहें की भूख भूल जाना !

कच्ची नींद टूट सकती है बर्तनों की आवाज से भी ,

दाईत्वबोध पैदा कर सकता…

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Posted on July 28, 2014 at 10:47am — 17 Comments

मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !

नहीं सामंत !

सम्मोहित प्रजा का आँकड़ा बढाती संख्या नहीं मैं !

मेरा वैचारिक खुरदरापन -

एक प्रखर विलोम है तुम्हारी जादुई भाषा का !

पट्टे की कीमत पर पकवान के सपने बेचते हो तुम !

मेरी जीभ का चिकना होना जरुरी है तुम्हारे लिए !

 

नहीं सामंत !

रोटी का विकल्प नहीं हो सकतीं चंद्रयान योजनाएं !

प्रस्तावित अच्छे दिनों की कीमत मेरी जीभ नहीं है !

 

नहीं सामंत !

तुम्हारे मुकुट का एक रत्न होना स्वीकार नहीं मुझे…

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Posted on July 10, 2014 at 6:00pm — 22 Comments

अजन्मी उम्मीदें --- अरुण श्री

समय के पाँव भारी हैं इन दिनों !

 

संसद चाहती है -

कि अजन्मी उम्मीदों पर लगा दी जाय बंटवारे की कानूनी मुहर !

स्त्री-पुरुष अनुपात, मनुस्मृति और संविधान का विश्लेषण करते -

जीभ और जूते सा हो गया है समर्थन और विरोध के बीच का अंतर !

बढती जनसँख्या जहाँ वोट है , पेट नहीं !

पेट ,वोट ,लिंग, जाति का अंतिम हल आरक्षण ही निकलेगा अंततः !

 

हासिए पर पड़ा लोकतंत्र अपनी ऊब के लिए क्रांति खोजता है

अस्वीकार करता है -

कि मदारी की जादुई…

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Posted on June 4, 2014 at 10:30am — 10 Comments

आखिर कैसा देश है ये ? --- अरुण श्री

आखिर कैसा देश है ये ?

- कि राजधानी का कवि संसद की ओर पीठ किए बैठा है ,

सोती हुई अदालतों की आँख में कोंच देना चाहता है अपनी कलम !

गैरकानूनी घोषित होने से ठीक पहले असामाजिक हुआ कवि -

कविताओं को खंखार सा मुँह में छुपाए उतर जाता है राजमार्ग की सीढियाँ ,

कि सरकारी सड़कों पर थूकना मना है ,कच्चे रास्तों पर तख्तियां नहीं होतीं !

पर साहित्यिक थूक से कच्ची, अनपढ़ गलियों को कोई फर्क नहीं पड़ता !

एक कवि के लिए गैरकानूनी होने से अधिक पीड़ादायक है गैरजरुरी होना…

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Posted on June 1, 2014 at 1:00pm — 24 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 1:57pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

शुक्रिया अरुन जी 

At 11:54pm on February 22, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
बृजेश नीरज
said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 1:18am on July 5, 2012, deepti sharma said…
shukriya Arun ji
At 11:18am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

jaankaari ke liye dhnyvaad Arun ji 

At 10:44am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

thanks Arun ji ,I am new to this site and have to learn a lot ,please guide me 

At 8:17pm on May 14, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आपका स्वागत है मित्रवर ..................

At 12:58pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री अरुण जी.

सादर अभिवादन.
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 5:52am on January 9, 2012, Shanno Aggarwal said…

अजय, आपकी रचनायें बहुत खूबसूरत हैं. बधाई व शुभकामनायें. 

At 1:02pm on January 8, 2012, deepak kumar said…

mujhe ek mitr mila !

At 7:20am on January 6, 2012, आशीष यादव said…
Congrats. Ur creation is month's best creation.
 
 
 

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