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Arun Srivastava
  • 30, Male
  • U.P.
  • India
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Saurabh Pandey commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"बहुत दिनों बाद इन पवित्र पंक्तियों पर आ पाया हूँ, भाई. काश आता ही नहीं ! कमसेकम किन्हीं आँखो की साँवली बेसाख़्ता धार में उतराने को यों न छटपटाता होता, भाई. सीने तक आये सिर के उलझे-उलझे रेशमी धागों को अपनी थरथराती हुई उंगलियों से सुलझाने की कोशिश…"
17 hours ago
Arun Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 42
"बहुत धन्यवाद सर ! आप महारथियों के बीच कुछ कहने की हिम्मत करना बड़ी बात है ! मेरा डर कम किया आपकी सहजता ने ! :-))))))"
Sunday
Arun Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 42
"ऊँचा लम्बा, बे नखरा है  नस नस में मकरंद भरा है सीधा सादा रहता बन्ना  ऐ सखि साजन ? न सखी गन्ना ................. वाह ! कमाल ! कमाल ! मास्टर स्ट्रोक लगा एकदम से ! और जीजा वाला तो गज़ब , बहुत ही ईमानदार रुमान से भरा हुआ !"
Sunday
Arun Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 42
"बहुत सुन्दर कहमुकरियाँ हुई है सर ! रिश्ते की कोमलता को रेखांकित करती हुई ! लेकिन "मुख चूमें तो मैं //शरमाऊं//"में भाव का थोड़ा विचलन लिए हुए लगते हैं ! ऐसा मुझे लगा , गलत भी लग सकता है ! :-)))))"
Sunday
Arun Srivastava commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : पूँजीवादी ईश्वर
"//तुम्हारा ईश्वर तो कब का मर चुका है//गिरते मानवीय मूल्यों पर करार व्यंग किया है आपने ! प्रभावशाली कविता ! "
Apr 9
Arun Srivastava replied to Admin's discussion खुशिया और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओह्ह ! अत्यंत दुखद ! हमेशा सबको हँसाने वाला कवि आज रुला रहा है ! ईश्वर उन्हें उनकी आत्मा को शांति दे उनके परिजनों को साहस !"
Apr 8
CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"करेजा फाड़ देहलस ई रचना भाई जी। आज अकेले में पढ़निंह आ रउवा नियन महसूस करे के कोशिश कैनिहन । का बात बा। एक दम घाव करेजा के भीतर तक करत बा इ कविता। ढ़ेर कुले बधाई रउवा के साहेंब"
Apr 8
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"coontee mukerji मैम , सच कहूँ तो ये कविता लिखने में बहुत कम समय लगा बाकी हालिया कविताओं की अपेक्षा ! और आपको यही कविता सबसे अधिक पसंद आई ! बहुत धन्यवाद मैम इन अनगढ़ भावों को कविता जैसा मान देने के लिए ! :-)))))"
Apr 8
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"Dr.Prachi Singh मैम , अच्छा लगा कि आपने औपचारिकता से अधिक कहा ! बहुत-बहुत धन्यवाद !"
Apr 8
Arun Srivastava commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - कचरों को दबाया जा रहा है ( गिरिराज भन्डारी )
"लूट के लंगोट भी बाज़ार में नंग़ा किये थे फिर वही लंगोट दे हमको मनाया जा रहा है............. आप भी कहाँ कहाँ घुमा लाए हैं गज़ल को ! ग़ज़लें आवारा हो गई हैं आप जैसो की संगत में आकर ! वर्ना महबूबा की गोद में पड़ी रहती थीं चुप-चाप ! :-))))))))  "
Apr 8
Arun Srivastava commented on Neeraj Kumar 'Neer''s blog post गाँव , मसान एवं गुडगाँव
"//गाँव के स्कूलों में शिक्षा की जगह  बटती है खिचड़ी.// ये स्थिति कचोटती है बहुत ! लेकिन यथार्थ है और किया भी क्या जा सकता है सारे करने वाले तो सूरत, दिल्ली , गुडगाँव चले गए ! प्रभावशाली कविता ! वैसे एक ही पंक्ति को अनावश्यक कई टुकड़ों में न…"
Apr 8
coontee mukerji commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"बहुत सुंदर और मार्मिक रचना...आपकी सारी रचनाओं में से मुझे यह बहुत अच्छी लगी..... मेरा दिया सिन्दूर तुम चढ़ाती रही गांव के सत्ती चौरे पर ! तुम्हारी दी हुई कलम को तोड़ कर फेंक दिया मैंने ! उत्तरपुस्तिकाओं पर उसी कलम से पहला अक्षर टांकता था मैं…"
Apr 6
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"कहाँ धर्मेन्द्र कुमार सिंह सर , ढंग से हाँथ भी नहीं खुले अभी तो ! धन्यवाद आपको ! :-))))"
Apr 5
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"जितेन्द्र 'गीत सर , बहुत धन्यवाद !"
Apr 5
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"बहुत धन्यवाद कल्पना रामानी  मैम ! सादर !"
Apr 4
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"MAHIMA SHREE मैम , "कवि" और "धनी" का संयोग बहुत ही कम होता है ! आपने करा दिया ! बहुत धन्यवाद आपको ! :-)))"
Apr 4
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"vijay nikore सर , आपने पढ़ा भी होगा बहुत मन से ! धन्यवाद !"
Apr 4
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"  coontee mukerji  मैम , मेरे प्रयास को सराहने के लिए धन्यवाद !"
Apr 4
Arun Srivastava commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"बहुत धन्यवाद आपको  Shyam Narain Verma सर !"
Apr 4
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Arun Srivastava's blog post मैं कितना झूठा था !!
"खूबसूरत प्रेम कविता। प्रेम कविताओं में आप सिद्धहस्त हो चुके हैं। बधाई स्वीकारें।"
Apr 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Mughalsarai
Native Place
Kalani , Ramgarh(Kaimur)
Profession
Accountant
About me
रण में कुटिल काल सम क्रोधी .............. तप में महासूर्य जैसा !

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मैं कितना झूठा था !!

कितनी सच्ची थी तुम , और मैं कितना झूठा था !!!

 

तुम्हे पसंद नहीं थी सांवली ख़ामोशी !

मैं चाहता कि बचा रहे मेरा सांवलापन चमकीले संक्रमण से !

तब रंगों का अर्थ न तुम जानती थी , न मैं !

 

एक गर्मी की छुट्टियों में -

तुम्हारी आँखों में उतर गया मेरा सांवला रंग !

मेरी चुप्पी थोड़ी तुम जैसी चटक रंग हो गई थी !

 

तुम गुलाबी फ्रोक पहने मेरा रंग अपनी हथेली में भर लेती !

मैं अपने सीने तक पहुँचते तुम्हारे माथे को सहलाता कह उठता…

Continue

Posted on April 3, 2014 at 11:24am — 20 Comments

गज़ल - नाफरमानी लिखना (अरुन श्री)

आह   लिखो , हुंकार   लिखो ,  कुर्बानी  लिखना

बंद    करो   किस्सों   में    राजा  रानी  लिखना

 

सूखे   खेतों   की   किस्मत  में   पानी  लिखना

अब   लिखना  तो  पीलेपन  को  धानी  लिखना

 

और   भी   हैं   रिश्ते यारों  तुम  छोडो  भी अब

महबूबा   के    दर   अपनी    पेशानी    लिखना

 

मानवता   उन्वान ,  भरा  हो   प्रेम   कहन  में    

अपना   जीवन   ऐसी   एक   कहानी   लिखना

 

जब भी  तुम अपने लब पर मुस्कान लिखो…

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Posted on January 21, 2014 at 11:00am — 33 Comments

गज़ल - जाग उठी सड़कें

जाग उठी सड़कें  उन्हें बस  सच बयानी चाहिए

कह  दो  संसद  से  न  कोई   लंतरानी  चाहिए

 

देख तो ! मैं बिक गया उसकी वफ़ा के नाम पर

ऐ  तिजारत ! अब  तुझे  नज़रें  झुकानी चाहिए

 

मैं  बना  दूँ  अपनी पेशानी पे सजदे  की लकीर

तू  बता तुझको  दिलों पर  हुक्मरानी  चाहिए ?

 

धूप  में जलना  पड़ेगा फिर सुबह से शाम तक

जिद  है बच्चों  की उन्हें  कुछ जाफरानी चाहिए

 

प्यार है तो आ मेरे माथे पर अपना नाम लिख

जिक्र  जब  मेरा …

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Posted on January 4, 2014 at 10:00am — 23 Comments

आवारा कवि

अपनी आवारा कविताओं में -

पहाड़ से उतरती नदी में देखता हूँ पहाड़ी लड़की का यौवन ,

हवाओं में सूंघता हूँ उसके आवारा होने की गंध ,

पत्थरों को काट पगडण्डी बनाता हूँ मैं !

लेकिन सुस्ताते हुए जब भी सोचता हूँ प्रेम -

तो देह लिखता हूँ !

जैसे खेत जोतता किसान सोचता है फसल का पक जाना !

 

और जब -

मैं उतर आता हूँ पूर्वजों की कब्र पर फूल चढाने -

कविताओं को उड़ा नदी तक ले जाती है आवारा हवा !

आवारा नदी पहाड़ों की ओर बहने लगती है…

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Posted on December 4, 2013 at 1:13pm — 18 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 1:57pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

शुक्रिया अरुन जी 

At 11:54pm on February 22, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
बृजेश नीरज
said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 1:18am on July 5, 2012, deepti sharma said…
shukriya Arun ji
At 11:18am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

jaankaari ke liye dhnyvaad Arun ji 

At 10:44am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

thanks Arun ji ,I am new to this site and have to learn a lot ,please guide me 

At 8:17pm on May 14, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आपका स्वागत है मित्रवर ..................

At 12:58pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री अरुण जी.

सादर अभिवादन.
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 5:52am on January 9, 2012, Shanno Aggarwal said…

अजय, आपकी रचनायें बहुत खूबसूरत हैं. बधाई व शुभकामनायें. 

At 1:02pm on January 8, 2012, deepak kumar said…

mujhe ek mitr mila !

At 7:20am on January 6, 2012, आशीष यादव said…
Congrats. Ur creation is month's best creation.
 
 
 

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