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Arun Sri's Page

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Arun Sri and Sulabh Agnihotri are now friends
yesterday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"//गुम हुई संज्ञाओं की निर्निमेष आँखों में, कहते हैं, असहायपन हुआ करता है. किन्तु यह किसी अकर्मण्य की विमूढ़ता नहीं होती, बल्कि व्यवहार में लगातार अशक्त होते चले जाने की पीड़ा हुआ करती है//मुझे अचम्भा होता है कि कैसे आप कविता की व्याख्या करते-करते मेरी…"
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"बहुत धन्यवाद सर ! "
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"मैं इसे अपना सौभाग्य कहूँगा ! सादर ! "
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"धन्यवाद सर ! "
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"आयोजन की रचनाएँ पढते-पढते आखिर मैंने भी लिख ही लिया कविता जैस कुछ  :-))))  -- ..समय की पीठ पर बैठ पुराने समय की कुछ स्मृतियाँ - न जाने किस समय की चली पहुंची हैं मेरे समय तक ! उनका स्वागत करने से पहले - मैं डरता हूँ कि कोई राजाज्ञा तो नहीं…"
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"हर इक युग में सलीबों पर मिलेगा  मसीहा झूठ को ढोता नहीं है वो पत्थर तानता है आइने पर  मगर चेहरा कभी धोता नहीं हैकमाल के अश'आर ! बेहतरीन ! मुग्ध हूँ इस गज़ल पर ! वाह !"
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"//न्याय देरी से मिला, क्या  फाइदा आप भी  तो  देखिये ये सोच कर//"
Saturday
Arun Sri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 47
"बेहतरीन छंद ! अच्छा लगा पढकर !"
Saturday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"मेरा हौसला बढ़ाने के लिए आप सभी को हार्दिक धन्यवाद !"
Sep 9
ram shiromani pathak commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"आदरणीय भाई अरुण जी आपकी रचनाओं का सदैव प्रतीक्षा रहती है।। अनुपम कृति व् भाव बहुत बहुत बधाई भाई।।। सादर"
Sep 7
जितेन्द्र 'गीत' commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"हमेशा की तरह एक कटु सत्य. आपकी रचनाओं का बड़ी बेसब्री से इन्तजार रहता है. बधाई आदरणीय अरुण भाई जी"
Sep 7
Sulabh Agnihotri commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"हमेशा की तरह चेतना को झकझोरती रचना, बधाई अरुण जी !"
Sep 6
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"आदरणीय  अरुण जी आपकी कविता का मुझे सदैव इन्तेजार रहता है i देर से आती है पर जब भी आती है उस दर्द  का अहसास करती है जो हमें पता तो है पर उसकी शिद्दत हम महसूस करने से कतराते  है i प्रशांत फिलीस्तीनी  माँ और…"
Sep 6
harivallabh sharma commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं....बहुत सशक्त भावोत्प्रेरक ....बधाई. "
Sep 5
MAHIMA SHREE commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"निशब्द... कवि की संवेदनशील कलम को नमन "
Sep 5
Dr. Vijai Shanker commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण श्री जी, आपकी जागरूक चेतना भलीभूत हो। बहुत अच्छा लिखा है। कोई क्रांतिकारी नहीं हूँ मैं ,पर पुकार लगाने का हक़ तो सभी का है , पुकार का असर भी होना चाहिए , पर यहाँ तो हालात ही ऐसे हैं की क्रांतियाँ भी बस आयोजित और प्रायोजित होती हैं ,…"
Sep 5

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Arun Sri's blog post कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !
"खींच लेते हैं ,शब्द शब्द , बरबस ही गहरे से और गहरे उतने गहरे में , जितना  स्वयं कभी गया नहीं बहते  खिंचते  , साँसे टूट टूट जातीं हैं दम फूल जाता है , छटपटा जाता हूँ शब्द गूंगे से , चेहरे की रेखाओं में मानी तलाशते खो जाते…"
Sep 5
Arun Sri posted blog posts
Sep 5

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"//मैंने लिखा है कि "एक समय तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ" ! ये किसी का नकार नहीं है बल्कि परिस्थिति विशेष में प्राथमिकताओं का निर्धारण मात्र कई किसी शासक के लिए ! //बहुत खूब ! ’एक समय’ के श्लेषात्मक प्रयोग ने मुग्ध…"
Aug 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Mughalsarai
Native Place
Kalani , Ramgarh(Kaimur)
Profession
Accountant
About me
रण में कुटिल काल सम क्रोधी .............. तप में महासूर्य जैसा !

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Arun Sri's Blog

कोई क्रन्तिकारी नहीं हूँ मैं -- अरुण श्री !

मैं नहीं जानना चाहता -

कि एक हाथ में झंडा थामे भीड़ के दुसरे हाथ में क्या छुपा है ,

कितने हैं जो गुस्से में है, कितने हैं जो मज़ा ले रहे हैं गुस्से का !

हर बार बिखर जाती भीड़ की इंकलाबी धूल में दम घुटता है मेरा !

खुले रह जाते हैं मेरे खाली हाथ ,

मैं मौन रहता हूँ , मानो ध्यान में होऊं या फिर गहरी पीड़ा में !

 

पत्नी संवरते हुए कहती है कि “मेरी ओर कम देखतें हैं इन दिनों”!

मैं मुस्कुरा भी नहीं पाता ठीक से , चुप रहता हूँ !

आँखों में तैर…

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Posted on September 5, 2014 at 10:00am — 9 Comments

बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !

मैं चाहता हूँ कि बिल्ली सी हों मेरी कविताएँ !

 

क्योकि -

युद्ध जीत कर लौटा राजा भूल जाता है -

कि अनाथ और विधवाएँ भी हैं उसके युद्ध का परिणाम !

लोहा गलाने वाली आग की जरुरत चूल्हों में है अब !

एक समय तलवार से महत्वपूर्ण हो जातीं है दरातियाँ !

 

क्योंकि -

नई माँ रसोई खुली छोड़ असमय सो जाती है अक्सर !

कहीं आदत न बन जाए दुधमुहें की भूख भूल जाना !

कच्ची नींद टूट सकती है बर्तनों की आवाज से भी ,

दाईत्वबोध पैदा कर सकता…

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Posted on July 28, 2014 at 10:47am — 24 Comments

मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !

नहीं सामंत !

सम्मोहित प्रजा का आँकड़ा बढाती संख्या नहीं मैं !

मेरा वैचारिक खुरदरापन -

एक प्रखर विलोम है तुम्हारी जादुई भाषा का !

पट्टे की कीमत पर पकवान के सपने बेचते हो तुम !

मेरी जीभ का चिकना होना जरुरी है तुम्हारे लिए !

 

नहीं सामंत !

रोटी का विकल्प नहीं हो सकतीं चंद्रयान योजनाएं !

प्रस्तावित अच्छे दिनों की कीमत मेरी जीभ नहीं है !

 

नहीं सामंत !

तुम्हारे मुकुट का एक रत्न होना स्वीकार नहीं मुझे…

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Posted on July 10, 2014 at 6:00pm — 22 Comments

अजन्मी उम्मीदें --- अरुण श्री

समय के पाँव भारी हैं इन दिनों !

 

संसद चाहती है -

कि अजन्मी उम्मीदों पर लगा दी जाय बंटवारे की कानूनी मुहर !

स्त्री-पुरुष अनुपात, मनुस्मृति और संविधान का विश्लेषण करते -

जीभ और जूते सा हो गया है समर्थन और विरोध के बीच का अंतर !

बढती जनसँख्या जहाँ वोट है , पेट नहीं !

पेट ,वोट ,लिंग, जाति का अंतिम हल आरक्षण ही निकलेगा अंततः !

 

हासिए पर पड़ा लोकतंत्र अपनी ऊब के लिए क्रांति खोजता है

अस्वीकार करता है -

कि मदारी की जादुई…

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Posted on June 4, 2014 at 10:30am — 10 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 1:57pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

शुक्रिया अरुन जी 

At 11:54pm on February 22, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
बृजेश नीरज
said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 1:18am on July 5, 2012, deepti sharma said…
shukriya Arun ji
At 11:18am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

jaankaari ke liye dhnyvaad Arun ji 

At 10:44am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

thanks Arun ji ,I am new to this site and have to learn a lot ,please guide me 

At 8:17pm on May 14, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आपका स्वागत है मित्रवर ..................

At 12:58pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री अरुण जी.

सादर अभिवादन.
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 5:52am on January 9, 2012, Shanno Aggarwal said…

अजय, आपकी रचनायें बहुत खूबसूरत हैं. बधाई व शुभकामनायें. 

At 1:02pm on January 8, 2012, deepak kumar said…

mujhe ek mitr mila !

At 7:20am on January 6, 2012, आशीष यादव said…
Congrats. Ur creation is month's best creation.
 
 
 

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