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Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"ऐसा ही हो आदरणीय ! :-))))"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"अपने पारस्परिक तथ्य आपके माध्यम से रचनाकर्मियों के वृहद समूह तक व्यापे. शुभ-शुभ "
yesterday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"Saurabh Pandey सर ,  सच कहा आपने कि दोनों तरह के काल-खण्डों का संतुलित समुच्चय अगर दिखता मेरे कवि को तो ये कविता न होती ! बाकी जिस तरह से आपने एक सार्थक कवि कर्म की के संबंध में अपनी बातों को कहा वो निश्चित ही मुझ जैसे के लिए रास्ते के दीपक की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"राष्ट्रवाद की यूटोपियन अवधारणा, कीर्ति-सम्मोहन का इंद्रजाल, विशेष वर्ण-शृंग या इसकी अहमन्य उपत्यकाओं का मुग्धकारी इतिहास, उस इतिहास की औपन्यासिक विवेचनाएँ आदि-आदि वस्तुतः श्रेष्ठता की चकाचौंध करती ’बहकाऊ’ भावना के फट्टे पर ग्रेजुएटेड…"
Sunday
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"Saurabh Pandey सर , प्रतीक्षा रहेगी ! :-))"
Jul 15
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"जी seema agrawal  मैम , बिलकुल यही कहने का प्रयास किया है मैंने ! आपका मेरी भाव-भूमि पर उतर आना मुझे आश्वश्त कर रहा है ! सहमति के एक प्रखर स्वर के साथ धन्यवाद आपको ! :-)))"
Jul 15
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"गिरिराज भंडारी सर , अगर मेरी कविता की गहराई तक आप नहीं पहुँच पाते तो ये आपकी शर्मिंदगी का विषय नहीं है बल्कि मेरी कमी है ! बाकी इस कविता पर आपके सुझाव को ध्यान में रखकर सोचूंगा ! बहुत धन्यवाद अवलोकन करने के लिए ! सादर !"
Jul 15

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण भाई , मुझ प्रौढ़  एकलव्य के अलग अलग विधा के अलग अलग आचार्य द्रोण हैं , उनमे से एक आप भी हैं । मुझे स्वीकार करने मे कोई शर्मिदगी नही है कि मै आपकी कविता की गहराई तक अक्सर नही पहुंच पाता । यही एक कविता है जिसे मै पूरी तरह समझा , और अब…"
Jul 14
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"Santlal Karun सर , आपके विचारों का हार्दिक स्वागत आदरणीय ! अपने पक्ष में अगर कुछ कहूँ तो ये कहूँगा कि मैंने कहीं भी चंद्रयान को ख़ारिज नहीं किया बल्कि ये कहने का प्रयास किया है कि रोटी और चंद्रयान में से प्राथमिकता हमेसा रोटी को देनी चाहिए ! एक आदमी…"
Jul 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"वाउ ! .. इस रचना पर फिर समय से आता हूँ.. "
Jul 13
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"गिरिराज भंडारी सर , जिस पंक्ति की आप बात कर रहे हैं वो एक मुहावरे की तरह प्रयुक्त होने वाले वाक्य "ये करने से तो अच्छा है मर जाना" का ही भावानुवाद तो है ! दरअसल ये इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि किसी सामंत का झंडा थामना किसी विद्रोही के…"
Jul 13
जितेन्द्र 'गीत' commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"आपकी रचनाएं सदा एक नए आयामों को छूती रही है आदरणीय अरुण श्री जी :)) आपको हार्दिक बधाई"
Jul 13
seema agrawal commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"कवि का विद्रोह वास्तव में किसी विकास के प्रति नहीं होता बल्कि विकास को स्वर देने वाले जीवन के समर्थन में होता है लुंजपुंज जीवन से क्या प्रगति संभव है? अतः प्राथमिकताएं तय तो करनी ही होंगी व्यवस्था को ........ ध्रुवीकरण की परिपाटी बनती  नहीं…"
Jul 12
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
" डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर ओह !! और देखिए , मैं समझ बैठा कि कोई बड़ी चूक हुई है मुझसे इस कविता में ! मेरी इस नासमझी के कारण आपको अतिरिक्त श्रम करना पड़ा ! :-))) मैं ये नहीं कहूँगा कि मुझे प्रसिद्धि अच्छी नहीं लगेगी लेकिन ये प्रसिद्धि तत्त्व…"
Jul 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"अरुण जी मै आपकी प्रतिभा का शुरू से कायल हूँ  i मेरा मंतव्य इतना ही था कि प्रसिद्धि पाने के लिए लोग सामंत की चाटुकारिता करते है i  मेरी उक्ति में सामंत आपका आवाहन करता है कि आओ मेरे गीत गाओ  और शिखर पर छा  जाओ i विद्रोही कवि…"
Jul 12
Arun Sri commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  सर , मैं आपका मंतव्य ठीक-ठीक नहीं समझ पा रहा हूँ ! कृपया मुझे क्षमा करते हुए स्पष्ट कर दें तो कुछ-कुछ  सार्थक समझ सकूँ ! सादर !"
Jul 12
Dr. Vijai Shanker commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण श्री जी , बहुत सुन्दर . रचना के लिए बहुत बहुत बधाई।"
Jul 12
Santlal Karun commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण श्री जी, आप की कविता में सन्नहित उत्ताप-परिताप संसद के शीर्ष पर पीठासीन नायकों-महानायकों पर करारा व्यंग्य करती है | पर यह कविता पढ़कर मुझे लगा कि कविता महज़ कविता के लिए है | क्योंकि भाषा की सीमा में चंद्रयान को ख़ारिज करते हुए रोटी का…"
Jul 11
शिज्जु शकूर commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"बहुत बढ़िय़ा आदरणीय अरुण भाई इस रचना के लिये हार्दिक बधाई"
Jul 11

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Arun Sri's blog post मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !
"आदरनीय अरुण श्री भाई , रचना मे व्यक्त कवि की विद्रोही भावनाओं का मै सम्मान करता हूँ , समर्थन करता हूँ , और इस रचना केलिये हार्दिक बधाइयाँ प्रेसित करता हूँ । बस एक पंक्ति किसी सूरत स्वीकार नही कर पा रहा हूँ - वो पंक्ति है - कंगूरे से कूद आत्महत्या कर…"
Jul 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Mughalsarai
Native Place
Kalani , Ramgarh(Kaimur)
Profession
Accountant
About me
रण में कुटिल काल सम क्रोधी .............. तप में महासूर्य जैसा !

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मेरे विद्रोही शब्द ---- अरुण श्री !

नहीं सामंत !

सम्मोहित प्रजा का आँकड़ा बढाती संख्या नहीं मैं !

मेरा वैचारिक खुरदरापन -

एक प्रखर विलोम है तुम्हारी जादुई भाषा का !

पट्टे की कीमत पर पकवान के सपने बेचते हो तुम !

मेरी जीभ का चिकना होना जरुरी है तुम्हारे लिए !

 

नहीं सामंत !

रोटी का विकल्प नहीं हो सकतीं चंद्रयान योजनाएं !

प्रस्तावित अच्छे दिनों की कीमत मेरी जीभ नहीं है !

 

नहीं सामंत !

तुम्हारे मुकुट का एक रत्न होना स्वीकार नहीं मुझे…

Continue

Posted on July 10, 2014 at 6:00pm — 22 Comments

अजन्मी उम्मीदें --- अरुण श्री

समय के पाँव भारी हैं इन दिनों !

 

संसद चाहती है -

कि अजन्मी उम्मीदों पर लगा दी जाय बंटवारे की कानूनी मुहर !

स्त्री-पुरुष अनुपात, मनुस्मृति और संविधान का विश्लेषण करते -

जीभ और जूते सा हो गया है समर्थन और विरोध के बीच का अंतर !

बढती जनसँख्या जहाँ वोट है , पेट नहीं !

पेट ,वोट ,लिंग, जाति का अंतिम हल आरक्षण ही निकलेगा अंततः !

 

हासिए पर पड़ा लोकतंत्र अपनी ऊब के लिए क्रांति खोजता है

अस्वीकार करता है -

कि मदारी की जादुई…

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Posted on June 4, 2014 at 10:30am — 10 Comments

आखिर कैसा देश है ये ? --- अरुण श्री

आखिर कैसा देश है ये ?

- कि राजधानी का कवि संसद की ओर पीठ किए बैठा है ,

सोती हुई अदालतों की आँख में कोंच देना चाहता है अपनी कलम !

गैरकानूनी घोषित होने से ठीक पहले असामाजिक हुआ कवि -

कविताओं को खंखार सा मुँह में छुपाए उतर जाता है राजमार्ग की सीढियाँ ,

कि सरकारी सड़कों पर थूकना मना है ,कच्चे रास्तों पर तख्तियां नहीं होतीं !

पर साहित्यिक थूक से कच्ची, अनपढ़ गलियों को कोई फर्क नहीं पड़ता !

एक कवि के लिए गैरकानूनी होने से अधिक पीड़ादायक है गैरजरुरी होना…

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Posted on June 1, 2014 at 1:00pm — 24 Comments

नायक (अरुण श्री)

अपनी कविताओं में एक नायक रचा मैंने !

समूह गीत की मुख्य पंक्ति सा उबाऊ था उसका बचपन ,

जो बार-बार गाई गई हो असमान,असंतुलित स्वरों में एक साथ !

तब मैंने बिना काँटों वाले फूल रोपे उसके ह्रदय में ,

और वो खुद सीख गया कि गंध को सींचते कैसे हैं !

उसकी आँखों को स्वप्न मिले , पैरों को स्वतंत्रता मिली !

लेकिन उसने यात्रा समझा अपने पलायन को !

उसे भ्रम था -

कि उसकी अलौकिक प्यास किसी आकाशीय स्त्रोत को प्राप्त हुई है !

हालाँकि उसे ज्ञात था…

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Posted on April 28, 2014 at 11:00am — 27 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 1:57pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

शुक्रिया अरुन जी 

At 11:54pm on February 22, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
बृजेश नीरज
said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 1:18am on July 5, 2012, deepti sharma said…
shukriya Arun ji
At 11:18am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

jaankaari ke liye dhnyvaad Arun ji 

At 10:44am on May 16, 2012, Rekha Joshi said…

thanks Arun ji ,I am new to this site and have to learn a lot ,please guide me 

At 8:17pm on May 14, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आपका स्वागत है मित्रवर ..................

At 12:58pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री अरुण जी.

सादर अभिवादन.
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 5:52am on January 9, 2012, Shanno Aggarwal said…

अजय, आपकी रचनायें बहुत खूबसूरत हैं. बधाई व शुभकामनायें. 

At 1:02pm on January 8, 2012, deepak kumar said…

mujhe ek mitr mila !

At 7:20am on January 6, 2012, आशीष यादव said…
Congrats. Ur creation is month's best creation.
 
 
 

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