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Anuraag Vashishth
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Anuraag Vashishth's Blog

घनेरे पेड़ पर है चाँद और हम छत पर बैठे हैं - अनुराग

मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन

घनेरे पेड़  पर है चाँद  और हम छत पर बैठे हैं

हवा के पास  जैसे  आज  बस  तेरे ही किस्से हैं

अगर आ जाओ तुम तो और मीठे हो के महकेंगे

तुम्हारे  बोये   पेड़ों   पर  सुनहरे  आम  आये हैं

 

तेरे कमरे में  जो जैसे था  सब  वैसे का वैसा है

क़िताबें शेल्फ में है  मेज पर कुछ फूल रक्खे हैं

 

बचा के  रख सकूँगा क्या  इन्हें मैं गर्म झोंकों से

मेरे आँगन में इक लड़की ने उजले फूल बोये…

Continue

Posted on May 23, 2017 at 1:28pm — 16 Comments

हमारे हौसले अब तक कहाँ जालिम ने देखे हैं - अनुराग

मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन

हमारे हौसले अब तक  कहाँ जालिम ने देखे हैं

चटानें  टूट जाती  हैं  जहाँ  हम  पाँव रखते हैं

 

हमी  ने फूल  महकाए हैं सहराओं  के सीने में

हमी  ने  बंजरों  के सूने  दिल  में  बीज बोये हैं

 

हमी सर मार  के  मरते  रहे  हैं अपने तेशे पर

हमी  ने  पर्वतों  को  काट  के  रस्ते  बनाये  हैं

 

हमी ने आँधियों की सरकशी के रूख को मोड़ा है

हमी ने  जिद्दी  तूफानों  के  जालिम पंख तोड़े…

Continue

Posted on May 14, 2017 at 8:30am — 28 Comments

पंडित-मुल्ला खुद नहीं समझे, हमको क्या समझायेंगे - अनुराग

फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फा

पंडित-मुल्ला खुद नहीं समझे, हमको क्या समझायेंगे

मीर  कबीर  से  चल  के  पूछें,   वे  ही  राह  बतायेंगे 

 

झूठ  हैं  सारे  मंदिर-मस्जिद,  पंडित-मुल्ला  झूठे  हैं            

ये  कुछ  और नहीं  करने  के, सुलझे  को  उलझायेंगे

 

राह दुई की  जहर है प्यारे, इधर-उधर क्यों जाएँ हम

केवल  अपनी रूह की सुनियो, बाकी सब भटकायेंगे        

 

राह कठिन है; तल में अगिन है, ऊपर बरसे है…

Continue

Posted on April 25, 2017 at 5:42pm — 11 Comments

इक तेरी याद के भँवर में हूँ - अनुराग

फाइलातुन  मुफाइलुन  फैलुन

इक   तेरी  याद  के भँवर में हूँ

मैं   अभी  दूर  के  सफ़र में  हूँ

 

अपने ही ख्वाब की नजर में हूँ

अपने ही  आइने  के  घर में हूँ

 

तुझको अब तक यकीं नहीं है मगर

मैं  तो अब भी  तेरे  असर में हूँ

 

इर्तका में  कभी जो भड़का था

आज  भी  मैं  उसी  शरर में हूँ

 

आसमानों का मुझको खौफ नहीं

जानियो  मत की  तेरे डर में हूँ

 

तप  रहा  है  गुलाब  का सूरज

एक…

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Posted on April 12, 2017 at 6:56pm — 16 Comments

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