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दिव्या liked poonam singh's blog post क्यों नही लिखती तुमको
Thursday
दिव्या commented on poonam singh's blog post क्यों नही लिखती तुमको
"वाह बहुत खूबसूरती से दिल के भावो को शब्दों के जरिये उकेरा है "
Thursday
दिव्या commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
" आदरणीय जनों, को अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया और समय देंने के लिए ह्रदय से आभार   "
Thursday
shalini kaushik commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
" बहुत ही सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति ."
May 13
JAWAHAR LAL SINGH commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"दिव्या बहन, सादर! चित्र और शब्द चित्र दोनों ही अनमोल है, माँ का तो कोई मोल हो ही नहीं सकता! बधाई!  "
May 12
बृजेश नीरज commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"बहुत सुन्दर! बधाई स्वीकारें!"
May 11
Savitri Rathore commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"नेह भरे स्पर्श से तुम सारे दुःख हर जाती हो.. माँ तुम अबूझ पहेली हो  माँ तुम मेरी सहेली हो .....बधाई हो दिव्या जी इस सुन्दर रचना हेतु।"
May 11

सदस्य कार्यकारिणी
Ashok Kumar Raktale commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"ममता की तुम मूरत हो  हर लेती मेरे दुखो को  उस ख़ुदा की ही सूरत हो .........वाह! बहुत खूब!  आदरणीया दिव्या जी सादर, बहुत सुन्दर रचना. "
May 11
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"सरल शब्दों में भावपूर्ण प्रस्तुति पर बधाई! प्रवाह पर ध्यान दें पद्य निखर कर सामने आएगा!"
May 10
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"स्नेही दिव्या जी  सादर  पूरा द्रश्य आँखों के सामने से गुजर गया  मां सब कुछ है  बधाई "
May 10
ram shiromani pathak commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"bahut sundar likha hai apne divya g hardik badhai"
May 10
coontee mukerji commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"दिव्या जी , बहुत सुंदर माँ से अच्छी सहेली और कोई नहीं. भाव संचय अच्छा है .  लिखती रहें ./ सादर / कुंती ."
May 9
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"वाह आदरणीया दिव्या जी वाह अत्यंत सुन्दर माँ को समर्पित ह्रदय स्पर्शी सुन्दर रचना हेतु ह्रदय के अन्तः स्थल से ढेरों बधाई स्वीकारें."
May 9
Kewal Prasad commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"आ0 दिव्या जी, मां अबूझ पहेली नही बल्कि एक आत्मा एक रूह और एक साया बनकर सदैव हमारे साथ रहती है। और जब कभी हमें भगवान की जरूरत होती है तो सबसे पहले मां सामने आती है। मां आईना, मां गंगाजल और मां नयन सी नूर है। शेष... ’’हर लेती मेरे दुखो को…"
May 9
दिव्या posted a blog post

माँ तुम मेरी सहेली हो

माँ तुम अबूझ पहेली हो माँ तुम मेरी सहेली हो स्नेह की  डोर से बंधी ममता की तुम मूरत हो हर लेती मेरे दुखो को उस ख़ुदा की ही सूरत हो मेरा सोता हुआ चेहरा भी जाने कैसे पढ़ लेती हो कितनी अलाओं बलाओं से मुझ को रोज बचाती हो निकलती हूँ जब भी घर से नजर का टीका  लगाती हो भर के नए जज़्बे मुझ मे हार को जीत बनाती हो, दे के प्यारा सा एक बोसा माथे पर…See More
May 9
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on दिव्या's blog post इश्क से अनजान
"वाह आह वाह आह दिव्या जी सिर्फ यही शब्द हैं कुछ और शेष हैं ही नहीं, किन शब्दों में आपकी सराहना करूँ किन शब्दों में मन के भीतर उठ रहे भावों को व्यक्त करूँ. निःशब्द कर दिया है आपने, शब्दकोष से सारे शब्द आपने चुरा लिए हैं. आनंद आ गया काफी अरसे के बाद…"
May 1

Profile Information

Gender
Female
City State
देहरादून
Native Place
dehradun

दिव्या's Blog

माँ तुम मेरी सहेली हो

Posted on May 9, 2013 at 3:30pm 12 Comments

माँ तुम अबूझ पहेली हो 
माँ तुम मेरी सहेली हो 

स्नेह की  डोर से बंधी …

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इश्क कि दास्तान है प्यारे

Posted on February 9, 2013 at 7:30pm 16 Comments

इन दिनों वो अपने आस पास रेशम बुनने लगी थी | बहुत ही महीन मगर चमकीली, हर समय बस एक ही धुन सवार हो गयी थी उस को  रेशम बुनने कि | जहाँ भी वो रहती  बस रेशम के धागों में उलझी हुई रहती |

कई कई बार वो घायल हो जाती, मगर वो रेशम बुनने में ही तल्लीन रहती उसके घायल मन से बना रेशम बहुत ही खूबसूरत होता…

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इश्क से अनजान

Posted on April 18, 2012 at 2:30pm 19 Comments

इश्क की कोमल भावनाओ से 

अछूती है मेरी कविताये 

इन्हें अभी एहसास नहीं 
किसी के प्रथम छुअन का 
तडप नहीं अभी इन्हें 
किसी के इंतजार की 
धडका नहीं शब्दों मे 
कोई नाम अभी 
शर्म से बोझिल हुई…
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