For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन । 

पिछले 81 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :


"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82

विषय - "शब्द/लफ्ज़"

आयोजन की अवधि- 11 अगस्त 2017, दिन शुक्रवार से 12 अगस्त 2017दिन शनिवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

 
बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

 

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल

नज़्म

हाइकू

सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :- 

  • रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु,  एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.    

  • रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  • रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
  • रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
  • प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
  • नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  • सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.


आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है. 

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं. 

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.   

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो 11 अगस्त 2017, दिन शुक्रवार लगते ही खोल दिया जायेगा) 

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ
 

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें


मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर 
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम.

Views: 2717

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

वाह्ह्ह वाह्ह्ह लाजबाब  सृजन बहुत सुंदर ताटंक छंद हुए हैं आद० अशोक कुमार रक्ताले जी प्रदत्त विषय को इससे बेहतर सार्थकता नहीं मिल सकती |दिल से ढेरों बधाई लीजिये 

वाह जी वाह बेहद सुंदर रचना जी ।बधाई स्वीकार करे जी। सादर नमन आदरणीय अशोक जी।

सुन्दर अभिव्यक्ति ,बड़ा मज़ा आया |बधाई|

रक्ताले जी शब्दों के सब भेदो को बतलाये हैं।
शब्द शब्द इस रचना का अपने में सार छिपाये हैं।।
रक्ताले जी हृदय से बधाई स्वीकारें।

आदरणीय अशोक रक्ताले जी
प्रदत्त विषय पर शानदार प्रस्तुति निशब्द हूँ सादर नमन

बात कहता हूँ दिलों की,शब्द हूँ
कह रहे मुझको मदारी,शब्द हूँ।1

घाव देता हूँ किसीको,कह रहे
आस बनता हूँ किसीकी,शब्द हूँ।2

आग हूँ मैं गर किसीके वास्ते
प्यास हरता हूँ किसीकी,शब्द हूँ।3

शूल बनकर चुभ गया मैं ही कभी
खुशनसीबी मैं कभी की,शब्द हूँ।4

आसमानों में सजाता आपको
फिर धता मैंने बता दी,शब्द हूँ।5
@"मौलिक व अप्रकाशित"

शब्द की बहुत की विस्तृत परिभाषा प्रस्तुत की है इस ग़ज़ल के माध्यम से आ० मनन कुमार सिंह जी. शब्द मदारी है, आस है, घाव देने वाला है, आग है, शूल है, प्यार हर्ता है, कभी आसमान पर चढ़ा देता है तो कभी धत्ता भी बता देता है - वाह!! इस अनुपम ग़ज़ल पर ढेरों ढेर बधाई हाज़िर है.

आदरणीय योगराज जी,मेरे प्रयास को सराहना अता फरमाने के लिए आपका शुक्रगुजार हूँ, सादर।
आदरणीय मनन कुमार जी आदब,अच्छी ग़ज़ल । बधाई स्वीकार करें ।
आदरणीय आरिफ भाई,शुक्रिया आपका।

वाह ! बेहतरीन ग़ज़ल कही है अपने आदरणीय मनन कुमार जी | हार्दिक बधाई |

आदरणीया कल्पना जी,आभारी हूँ।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post बिखराव
"जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,जज़्बात की ज़मीन पर शब्दों की बहुत सुंदर और शानदार इमारत तैयार करना आपका…"
3 minutes ago
dilbag virk replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आंखों के सामने सदा मंज़िल हसीं रहे भूलें न खुद को, पैरों के नीचे जमीं रहे । ये मुश्किलें डराती है…"
45 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
45 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय अजीत शर्मा जी आदाब, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
47 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । दिली मुबारकबाद क़बूल कीजिए ।"
50 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए…"
54 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"बहुत बेहतरीन ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय इमरान खान जी ।"
58 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"यूँ तो सहर हैं प्यार में रुस्वाइयाँ बहुत। लेकिन बग़ैर इसके भी कोई नहीं रहे।। बहुत ख़ूब!! मज़ा आ गया…"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"दुनिया के ग़म को पास फटकने नहीं दिया ता उम्र हम तुम्हारे ही ग़म के अमीं रहे वाह! वाह!! मज़ा आ गया…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Rakshita Singh's blog post अपना सा क्यूँ न मुझको बना कर चले गये।
"आदरणीया रक्षिता जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । शे'र दर शे'र दाद के…"
1 hour ago
Rakshita Singh posted a blog post

अपना सा क्यूँ न मुझको बना कर चले गये।

रोते रहे खुद, मुझको हँसा कर चले गये-काफ़िर से अपना दिल वो लगाकर चले गये।पूँछा जो उनसे घर का पता…See More
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"बहुत अच्छा प्रयास मनन जी। पर रब्त स्पष्ट नहीं हो रहा। शेर2; चलने के बाद पर्दानशीं???? शेर3; कतई साफ…"
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service