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महोदय मैंने अभी अपनी एक ग़ज़ल को तीन बार पोस्ट किया परंतु प्रकाशित नही की गयीं है 3 दिन बीत गए । यदि कोई समस्या हो तो बताने का कष्ट करें ।

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समस्या केवल यह है भाई नवीन मणि त्रिपाठी जी कि उक्त रचना ओबीओ पर अनुमोदित होने से पहले ही आपके सोशल मीडिया के पन्ने पर विराजमान थी जिस कारण वह अप्रकाशित नहीं रही. 

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"आ. भाई अमीरुद्ददीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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