ओबीओ पर 'अप्रकाशित' वाला नियम उचित है किंतु मेरे विचार से कोपयोगी सामग्री को इसमें कुछ छूट मिलनी चाहिए। जो सामग्री हमारे साहित्य की गौरव-गरिमा में अभिवृद्धि करने के उद्देश्य से तैयार की गई हो उसकी पाठकों में अधिक से अधिक पहुंच संभव बनाने में सबकी भूमिका है। हमारी यानि ओबीओ मंच की। यहां हमारे मित्रों को भी ऐसी सामग्री सहजता से मिलनी ही चाहिए। प्रसंगवश यहां उल्लेख आवश्यक है कि मैंने महाकवि जयशंकर प्रसाद के जीवन-युग पर आधारित अपने आगामी उपन्यास 'कंथा' का एक अंश अपने ब्लॉग पर पोस्ट करने का प्रयास किया जिसे ओबीओ एडमिन ने नियमानुसार स्वीकार नहीं किया। एडमिन का निर्णय शत-प्रतिश्ात नियमानुकूल, मान्य-सम्मान्य और स्वीकार्य है। इस संदर्भ में इन पंक्तियों के लेखक का सिर्फ यही विनम्र निवेदन है कि बेशक यह सामग्री वेब पर अन्यत्र पहले से उपलब्ध है किंतु इसे इस दृष्टिकोण के तहत यहां पोस्ट किया गया था कि हमारे ओबीओ-साथियों को भी अपने साहित्य की महानतम विभूतियों के जीवन-प्रसंगों से अवगत होने का अवसर मिले। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह वह समय है जब हमारी नई पीढि़यों में अपने अतीत के गौरव-प्रसंगों-संदर्भों के प्रति जिज्ञासा तो कम नहीं किंतु एक खास तरह की अफरातफरी व्याप्त है। हमें इस सदर्भ में समुचित पहल करनी ही चाहिए...
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Permalink Reply by Admin on February 5, 2012 at 12:52pm श्यामल जी की टिप्पणी जो गलती से अन्यत्र पोस्ट हो गई थी-
आदरणीय साथियो, 'अपवाद' वाली बात मैंने व्यापक हित में उठाई है। यह सवाल छोड़कर मै अपनी ओर से बात यहीं रोकता हूं। इस पर सभी साथी चर्चा करें तो अच्छा। सर्वसम्मति से कोई भी फैसला हो, मुझे सहर्ष स्वीकार्य है। जहां तक मेरे उपन्यास-अंश की बात है, इसे लेकर मुझे कोई जिद नहीं। मेरा लक्ष्य यहां साथियों को हिन्दी साहित्य के गौरव-संदर्भ से सहज रू-ब-रू कराना भर था। प्रसंगवश विनम्रतापूर्वक मुझे यहां उल्लेख करना ही चाहिए कि मेरा यह आगामी उपन्यास '' कंथा '' फिलहाल हिन्दी की प्रमुख साहित्यिक पत्रिका ' नवनीत ' ( मुम्बई ) में पिछले करीब दो साल से लगातार धारावाहिक छप रहा है। यह एक पाठक वर्ग तक हर माह पहुंच भी रहा है। चूंकि ओबीओ सृजन-धर्म से जुड़े लोगों का ही समृद्धतम मंच है इसलिए मैंने चाहा था कि इसकी कुछ बानगी यहां के मित्रों को यहीं सहज मिल सके, बस इतनी-सी बात। एडमिन को अपना काम निस्संदेह अपने ही ढंग से करना चाहिए, हमारा सहयोग है और आगे भी पूर्ववत् बना रहेगा। यदि किसी को मेरी बात नागवार गुजरी हो तो इसके लिए मुझे दु:ख है। सबको हार्दिक शुभकामनाएं...
Permalink Reply by N .B. Nazeel on February 7, 2012 at 1:47pm सुधिजनो के बीच मैं अपना विचार रख रहा हूँ (क्षमा सहित ) अगर हम अपनी प्रकशित रचनाए ही पोस्ट करते रहेंगे तो यहाँ पर पुरानी रचनाओं कि बाढ़ सी आ जायेगी और नई रचनाओं को पनपने का मौका ही नहीं मिलेगा | मेरे ख्याल से नियमों में कोई बदलाव नहीं आना चाहिए |
Permalink Reply by Ambarish Srivastava on February 7, 2012 at 11:31pm आप सभी का स्वागत है | मेरे विचार में ओ बी ओ के नियमों में संशोधन कराने के बजाय हमें सर्वसम्मति से बने हुए नियमों का पालन करते हुए रचनाधर्मिता को प्रोत्साहन देना चाहिए ! जय ओ बी ओ !
सादर:
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Rohit Dubey "योद्धा " commented on Rohit Dubey "योद्धा "'s blog post कोशिशों के समंदर© 2012 Created by Admin.
कुछ आवश्यक लिंक्स
| 2-ग़ज़ल तक्तीह प्रणाली पर एक चर्चा | 3-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -1, | 4-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -2 |
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