विनय कुल का हर कार्टून सम्पूर्ण रचना है। पल भर में पाठक को अपने प्रभाव में समेट लेने वाली कृतियां। इनकी प्रभावान्विति असंदिग्ध और प्रत्यक्ष है। कार्टून सामने आते ही चेहरे पर कभी इकहरी भी तो कभी बेचैनी से भरी मुस्कान। व्यंग्य जो कभी गुदगुदाता है तो अक्सर स्तब्ध और चिन्ताकुल कर देता है। इसमें दो राय नहीं कि इनमें हमारे समय-समाज की धड़कनें सूक्ष्म पर्यवेक्षणीय दृष्टि और तीक्ष्ण अभिव्यक्ति-दक्षता के साथ दर्ज हो रही हैं ! इन चित्र-कृतियों में चित्रण-भर नहीं, बल्कि लक्षित विषय-संदर्भ पर रचनाकार का मौलिक व सम्पूर्ण सोच-दृष्टिकोण भी सामने आता है। अपना स्वयंभू और सुचिन्तित कथ्य लेकर। इस सृजन-कार्य में सर्जनशील और समीक्षकीय, दोनों दृष्टि साकार हो रही है। यह मामूली सर्जनशीलता नहीं। उल्लेखनीय योगदान है। कौन है, जो विनय कुल के कार्टून देख-पढ़कर सोचने को विवश नहीं हो जाता ! प्रश्न है कि क्या यह योगदान साहित्य में विधिवत विश्लेषित- मूल्यांकित नहीं होना चाहिए ? कौन करेगा यह पहल ?
Tags: की, पहल, मूल्यांकन, हो
Permalink Reply by Abhinav Arun on December 9, 2011 at 7:01am
Permalink Reply by Shyam Bihari Shyamal on December 10, 2011 at 7:17am त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आभार अरुण जी।

भाई श्यामलजी,
विनय जी के कार्टून अवश्य ही ओबीओ के पटल के लिये गर्व का कारण हैं तथा इस मंच को अतिशय समृद्ध कर रहे हैं. हम प्रबन्धन तथा कार्यकारिणी समिति की नुमाइंदगी करते सदस्य उनके उन्नत तथा संवेदनशील रचनाओं को हृदय से स्वीकर कर अभिभूत हैं तथा इसका अक्सर इज़हार भी करते हैं. आप इसके अलावे क्या चाहते हैं इसके प्रति कुछ स्पष्टता नहीं हो पारही है.
आज जबकि सामान्य पाठकों/अन्य सदस्यों की प्रतिक्रियाओं से पद्य और गद्य रचनाएँ तक महरूम रह जा रही हैं, हम शब्द से इतर अन्य साहित्यिक विधाओं पर सदस्यों/ पाठकों की सहभागिता और यथोचित प्रतिक्रिया के लिये सादर आग्रह ही कर सकते हैं. सदस्य/ पाठकों द्वारा रचनाओं को पढ़/देख कर प्रतिक्रिया स्वरूप दो शब्द तक न लिखने की कॉम्प्लेसेन्सी कमोबेश सभी ई-पत्रिकाएँ झेल रही हैं. उस लिहाज से ओबीओ की स्थिति उतनी बुरी भी नहीं है. किन्तु यह अवश्य है कि इस ओर सभी सदस्यों/पाठकों से जागृत और संवेदनशील होने की अपेक्षा है.
इसमें कोई शुबहा नहीं कि कार्टूनों को समृद्ध सहित्यिक विधा का दर्ज़ा मिल चुका है. सामाजिक/ राजनैतिक कार्टून अपने देश में अपनी उस शैशवावस्था से बहुत आगे निकल चुके हैं जब भारत में चालीस-पचास के दशक में आदरणीय शंकर के कार्टून ही अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा रहे थे. ओबीओ भी कार्टूनों को उसी इज़्ज़त से स्वीकार करते हैं. उसी का प्रतिफलन है कि ओबीओ के पटल पर आदरणीय विनय कूलजी की रचनाओं को सादर स्थान मिला है.
आप यदि इसके अलावे कुछ विशेष चाहते हैं तो कृपया स्पष्ट करें, अपितु पहल करें. आप हमारे अभिन्न सदस्य हैं. वैसे, निम्नलिखित पोस्ट्स पर आपका दृष्टिपात आवश्यक होगा -
सादर
सौरभ
Permalink Reply by Abhinav Arun on December 10, 2011 at 10:53am आदरणीय श्री सौरभ जी & श्री श्यामल जी ये इस दृष्टि से एक उपयोगी और सरोकार का विमर्श मुझे लगता है की यदि इस लिंक को श्री विनय कुल जी के कार्टून के नीचे जोड़ दिया जाए तो पाठक सीधे यहाँ आकर उस चित्र कृति पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते है !!
Permalink Reply by Vinay Kull on July 21, 2012 at 7:36pm बंधुवर , आपकी इस टीप पर अत्यंत विलम्ब से दृष्टि पड़ी , माफ़ी एवं मूल्यांकन का साधुवाद !- विनय कुल
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा,रचना शीघ्र अनुमोदित कराने हेतु रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिख दें । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
Raj Lally Sharma commented on Abhinav Arun's blog post ग़ज़ल - मंडी से आढ़त तक सबकी पर्ची कटी हुई !
Raj Lally Sharma commented on Kewal Prasad's blog post !!! गजल !!!
Raj Lally Sharma commented on aditya chaturvedi's blog post व्यंग्य
Raj Lally Sharma commented on डॉ नूतन डिमरी गैरोला's blog post अपने अपने हिस्से का पानी
Raj Lally Sharma commented on कल्पना रामानी's blog post एक नवगीत--सूर्य देवा...
Raj Lally Sharma commented on Rajesh Kumar Jha's blog post बस इतनी सी ख़ता हमारी
POOJA AGARWAL commented on कल्पना रामानी's blog post एक नवगीत--सूर्य देवा...
Kewal Prasad commented on aditya chaturvedi's blog post व्यंग्य
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Kewal Prasad's blog post !!! गजल !!!© 2013 Created by Admin.
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |

