For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 9791

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

//याद फिर कोई आ गया है मुझे
ख़ूँ के आँसू रुला गया है मुझे// वाह वाह, बहुत ही बेमिसाल मतला 

//ये भी ऐज़ाज़ कम नहीं यारो 
पास दिल के रखा गया है मुझे// क्या कहने हैं साहिब, वाक़ई ये एजाज़ की ही बात होती है अगर कोई किसी को दिल के करीब रखे 

//थी तो साथ ग़म भी था

अब तो आराम आ गया है मुझे// बहुत खूब 

//आके हुजरे में एक शब कोई 
ख़ुशबुओं में बसा गया है मुझे// माशाअल्लाह, माशाअल्लाह.. (ये ज़िक्रे शब, ये खुश्बू - वैसे हुज़ूर सब खैरियत तो है? :)))))) ) 

//वक़्त जब इम्तिहान का आया
छोड़ कर वो चला गया है मुझे// अच्छा शेअर हुआ है .

//कोई मेरे सिवा न था उसमें
खोल कर दिल दिखा गया है मुझे// बहुत खूब 

//कहते कहते वो यार जग बीती
आप बीती सुना गया है मुझे// बिलकुल ऐसा ही होता है साहिब. बातों का सिलसिला जब चलता है तो अक्सर बात जग से निज तक पहुँच  ही जाती है. 

//है ये मिसरा सभी के होटों पर
"सब्र करना तो आ गया है मुझे"// वाह वाह वाह! क्या ही कमाल तरीका ढूँढा है गिरह लगाने का. गोया साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी .

//आफ़ियत है इसी में मेरी समर  

वो करूँ , जो कहा गया है मुझे// दुनियादारी का तकाज़ा भी यही है. आपकी दूसरी ग़ज़ल पढ़कर भी आनंद आया मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब. ढेरों ढेर दाद और मुबारकबाद कबूल फरमाएं.

जनाब भाई योगराज प्रभाकर साहिब आदाब, क़ुर्बान जाऊँ आपकी इस विस्तृत टिप्पणी पर जो आपने अपने मख़सूस अंदाज़ में लिखी,इस समय मेरी आँखें ख़ुशी से नम हैं और 'साहिर' की इज़्म के ये मिसरे याद आ रहे हैं :-

"मुझको इतनी महब्बत न दो दोस्तो,

मैं तो कुछ भी नहीं,

इस क़दर प्यार,इतनी बड़ी भीड़ का,

मैं रखूँगा कहाँ,

इस क़दर प्यार रखने के क़ाबिल नहीं,मेरा दिल मेरी जाँ,

मुझको इतनी महब्बत न दो दोस्तो,

कुछ बचाकर रखो,मेरे कल के लिए,

कल जो बेनाम है, कल जो अंजान है,

मुझको इतनी महब्बत न दो दोस्तो"

आपकी बेपनाह महब्बत को सलाम करता हूँ,जिसने मुझे ज़मीन से आसमान पर पहुंचा दिया,बहुत नवाज़िश,करम,शुक्रिया,मह्रबानी ।

कोई मेरे सिवा न था उसमें
खोल कर दिल दिखा गया है मुझे

आके हुजरे में एक शब कोई 
ख़ुशबुओं में बसा गया है मुझे

वाह वाह वाह । आदरणीय कबीर सर बहुत ही खूब सूरत ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बधाई । 

सादर नमन ।

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

आदरणीय समर साहब दूसरी ग़ज़ल भी जिंदाबाद हुई है पूरी ग़ज़ल उस्तादी का नमूना है, दूसरा और चौथा शेर बतौरे ख़ास पसंद आया| दाद और मुबारकबाद कबूल कीजिये|

जनाब राणा प्रताप सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

यह ग़ज़ल भी बहुत ही उम्दा है,

शेर दर शेर भा गया है मुझे 

क्या गिरह खूब आपने बाँधी 

ये हुनर अब लुभा गया है मुझे  

मुहतरम समर कबीर साहब, आपकी ग़ज़ल हम सब के लिए एक पाठ की तरह है, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल, बहुत बहुत बधाई।

"दाद मंज़ूम आपसे पाकर

आज तो चैन आ गया है मुझे'

बहुत बहुत शुक्रिया भाई गणेश जी "बाग़ी" साहिब,आपकी महब्बत सर आँखों पर,सुख़न नवाज़ी के।लिये बहुत बहुत शुक्रिया ।

आदरणीय समर भाई नमस्ते, यह ग़ज़ल भी बेमिसाल हुई है| 

ज़िन्दगी थी तो साथ ग़म भी था
अब तो आराम आ गया है मुझे

आके हुजरे में एक शब कोई 
ख़ुशबुओं में बसा गया है मुझे

वक़्त जब इम्तिहान का आया
छोड़ कर वो चला गया है मुझे

कोई मेरे सिवा न था उसमें
खोल कर दिल दिखा गया है मुझे

कहते कहते वो यार जग बीती
आप बीती सुना गया है मुझे

है ये मिसरा सभी के होटों पर
"सब्र करना तो आ गया है मुझे" बहुत खूब | 

बहुत बहुत शुक्रिया बहना आदाब ।

(दूसरा प्रयास)


'ज़िन्दगी-ट्रेक' खो गया है मुझे
'रेलवे-ट्रेक' खा गया है मुझे।


साज़िशों से डरा, मरा देखो
पर्व पर ही रुला गया है मुझे।


आश्वासन मुआवज़ा झेलूं,
सब्र करना तो आ गया है मुझे।


शोक में है वतन, दहन करके
राक्षस क्षोभ दे गया है मुझे।


रावणों से रिहा करो हमको
राहतों से सुला गया है मुझे।


(मौलिक व अप्रकाशित)

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अभी समय चाहता है,मतले और चौथे शैर में क़ाफ़िया बदल गया है,सहभागिता के लिए धन्यवाद ।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६९
"आदाब, मैं स्वयं नहीं समझ पाया। शायद सिस्टम में किसी वजह से मेरी पोस्ट उड़ गई थी, जनाब योगराज जी से…"
14 minutes ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७०
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब, ग़ज़ल में शिरकत और इस्लाह का तहेदिल से शुक्रिया। जी जनाब, ज़ल्द बाज़ी में…"
17 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पण्डे जी आपके उत्साह वर्धन से नई ऊर्जा मिली लेखनी सार्थक हुई दिल से आभार"
19 minutes ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७०
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' तीर चलता नहीं ब…"
33 minutes ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६९
"इस ग़ज़ल की टिप्पणी कहाँ गईं?"
42 minutes ago
Samar kabeer commented on Ravi Shukla's blog post गीत दफ्तर पर
"जनाब रवि शुक्ला साहिब आदाब,गीत का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें । ' लंबे चौड़े दफ्तर…"
43 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"अखाड़े चली रूढ़ियाँ तोड़करलँगोटी कसी लाज भय छोड़कर// बहुत सुन्दर   प्रदत्त चित्र के मर्म को…"
52 minutes ago
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -5 ( दोपहर की धूप में बादल सरीखे छा गए)
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' दोपहर की धूप…"
53 minutes ago
क़मर जौनपुरी commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बहुत बहुत मुबारकबाद।"
2 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय प्रतिभा पण्डे जी चित्रानुरूप बेहतरीन रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
2 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से लेखनी सफल हुई दिल से आभार"
3 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हुस्न तेरी आशिकी से कौन रखता दूरियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" ( गजल )
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service