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योगराज प्रभाकर's Discussions (10,547)

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सदस्य टीम प्रबंधन

"मोहतरम दोस्तों, पांच और ताज़ा शेअर आपकी नजर कर रहा हूँ, मुलाहिजा फरमाएं : देश की बात…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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सदस्य टीम प्रबंधन

"वाह वाह नवीन भाई, जवाब नहीं आपके इस इस मिज़हिया अंदाज़ का भी ! दिल खुश कर दिया आपने !"

योगराज प्रभाकर replied Sep 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"//अक्स क्या उड़ गया तेरा अलफ़ाज़ से खाली बे रंग की शायरी रह गयी // बहुत खूब हिलाल स…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"मूड नहीं नवीन भाई जी - आचार्य जी "रंगत" में आ गए है !"

योगराज प्रभाकर replied Sep 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"बेहतरीन शेअर कहे हैं अपने आचार्य जी ! हर शेअर एक अलग रंग लिए हुए मगर हर लिहाज़ से मु…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"//माँ! अधूरी मेरी बन्दगी रह गई. ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गई...// आचार्य जी, दिल…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"नवीन भाई, अभी मैदान नहीं छोड़ना ! अभी आपसे और बहुत से आशार की तवक्को है हम सब को ! आ…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"राणा भाई, ये मोहब्बत है आपकी ! हकीकत तो यह है कि अप सब दोस्तों की अशर्फियों भरी पोटल…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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सदस्य टीम प्रबंधन

"बहुत खूब बागी भाई, "देर आयद दुरुस्त आयद" वाली कहावत को सही साबित कर दिया आपने ! देरी…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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"अरविन्द भाई, बहुत खूबसूरत गजल कही है अपने ! इल्तिजा है कि दूसरे शेअर पर दोबारा से नज…"

योगराज प्रभाकर replied Sep 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
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Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post मरती हुई नदी (नवगीत)
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Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
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yesterday
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
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